मिस्र में शुरू हुई राष्ट्रपति चुनाव की जंग, जानिये क्यों तय मानी जा रही है सीसी की जीत

मिस्र में शुरू हुई राष्ट्रपति चुनाव की जंग, जानिये क्यों तय मानी जा रही है सीसी की जीत

| Updated: 26 Mar 2018, 06:07:16 PM (IST) गल्फ

मिस्र में राष्ट्रपति चुनाव के लिए तीन दिवसीय मतदान प्रक्रिया की आज शुरुआत हो गई है। यहां अब्देल फतेह अल सीसी व मौसा मुस्तफा मौसा के बीच टक्‍कर है।

काहिरा। मिस्र में राष्ट्रपति चुनाव के लिए सोमवार से मतदान की शुरुआत हो गई है। यहां मतदान की प्रक्रिया बुधवार यानी 28 मार्च तक चलेगी। इस दौरान करीब छह करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चुनाव में दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। इनमें एक मौजूदा राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी हैं, जबकि दूसरे एल गद पार्टी के प्रमुख मौसा मुस्तफा मौसा हैं। राष्ट्रपति चुनाव के कई उम्मीदवार पहले ही नाम वापस ले चुके हैं। गौरतलब है कि 2011 में हुई क्रांति के बाद मिस्र में राष्ट्रपति चुनाव के लिए तीसरी बार मतदान हो रहा है।

1 मई को होगा नतीजे का ऐलान
राष्ट्रपति चुनाव में पहले चरण के मतदान के प्राथमिक नतीजे 29 मार्च को आएंगे, हालांकि अंतिम नतीजों के लिये 2 अप्रैल तक का इंतजार करना पड़ेगा। इस चरण को जीतने के लिए प्रत्याशियों को कम से कम 51 फीसदी वोट हासिल करने पड़ेंगे। इसके बाद यदि दूसरे चरण की जरूरत पड़ी तो उसके लिए 19 से 21 अप्रैल के बीच मतदान होगा। इस चरण में वो लोग मतदान करते हैं, जो मूलरूप से मिस्र के हैं, लेकिन बाहर रहते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के अंतिम नतीजों का ऐलान 1 मई को होगा।

इसलिए तय मानी जा रही है सीसी की जीत
2014 में हुए चुनाव में बिना किसी विशेष प्रचार या अपील के भी सीसी को करीब 97 फीसदी मिले थे। हालांकि उस समय मतदान के लिए करीब तीन दिनों का समय बढ़ाए जाने के बावजूद आधे से ज्यादा लोगों ने मतदान नहीं किया था। इस चुनाव में भी सीसी को चुनौती देने वाले कई उम्मीदवार या तो गिरफ्तार कर लिए गए हैं या हमलों के शिकार हो गए। ऐसे में ज्यादातर इस दौड़ से बाहर हो गए। मौसा लंबे समय से सीसी के समर्थक रहे हैं और ऐन वक्त पर मौसा की उम्मीदवारी से पहले तक उनकी पार्टी भी सीसी का समर्थन करती रही है। ऐसे में उनकी चुनौती महज एक औपचारिकता मानी जा रही है।

महासंकट में है मिस्र की अर्थव्यवस्था
राष्ट्रपति सीसी 2013 में मोहम्मद मुर्सी के तख्ता पलट के बाद 8 जून 2014 को राष्ट्रपति बने थे। 63 साल के सीसी का मौजूदा कार्यकाल 8 जून 2018 को खत्म होगा। दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे सीसी ने दावा किया है कि उनके पहले कार्यकाल में देश को स्थिरता और सुरक्षा मिली है। हालांकि सीसी के आलोचकों का कहना है कि उनकी नीतियों ने अपने विरोधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र मीडिया पर बुरा असर डाला है। आपको बता दें कि 2011 में हुई क्रांति के बाद से ही मिस्र की अर्थव्यवस्था बड़े संकट का सामना कर रही है। पर्यटन और विदेशी निवेश यहां की अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख स्तंभ हैं।

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