दुबई में फंसे 10 भारतीय मेडिकल हेल्पर कोरोना पॉजिटिव, सरकार से लगाई मदद की गुहार

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- इन 10 लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण हुआ है

ये लोग सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं

By: Kapil Tiwari

Updated: 24 Apr 2020, 06:32 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना वायरस ( CoronaVirus ) महामारी की वजह से विदेशों में कई भारतीय पिछले 2 महीनों से फंसे हुए हैं। विदेशों में फंसे ये भारतीय भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। ऐसा एक मामला दुबई से सामने आया है, जहां एक अस्पताल में मेडिकल हेल्पर के तौर पर काम कर रहे कुछ भारतीयों ने SOS संदेश भेजकर कहा है कि उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मेडिकल सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। आपको बता दें कि SOS संदेश एक तरह का इमरजेंसी संदेश होता है।

10 भारतीय मेडिकल हेल्परों को कोरोना

दुबई में ये 10 भारतीय मेडिकल हेल्पर के रूप में काम कर रहे थे। लेकिन, जब उनमें कोरोना होने की पुष्टि हुई तो उनके एम्प्लॉयर ने कथित तौर पर किसी भी तरह की मदद से इनकार कर दिया। यही नहीं, उन सभी को एक ऐसे बिल्डिंग में कैद कर दिया गया है, जहां 70 अन्य भारतीय मौजूद हैं। इन सभी को एक ही शौचालय इस्तेमाल करने के लिए भी मजबूर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ये सभी दुबई के सेंट्रल जेल के पास एक लेबर कैम्प में रखे गए हैं।

ज्यादातर केरल और तेलंगाना के लोग

दुबई में फंसे इन लोगों में ज्यादातर तेलंगाना और केरल से हैं। इन सभी ने दुबई और शारजाह के प्रतिष्ठित अस्पतालों और क्लीनिकों में हेल्पर, सफाई कर्मी के तौर पर काम किया है। इसके अलावा इन लोगों ने कोविड-19 के मरीजों की भी देखभाल की है।

अमित शाह और राज्य सरकार से मांगी मदद

इन सभी का कहना है कि कोरोना संक्रमितों के इतने पास रहने के बावजूद इनका मालिक बाकी लोगों के टेस्ट कराने से इनकार कर रहा है। ऐसे में अब उन्होंने भारत से ही मदद की उम्मीद लगाई है। उन्होंने रक्षा मंत्री अमित शाह और तेलंगाना मंत्री केटी रामा राव को ट्वीट करके अपनी परेशानी बताई है। इन लोगों ने भारत के कुछ मीडिया हाउस को भी सन्देशभरा वीडियो भेजा है।

मदद के लिए आगे आया ये एसोसिएशन

वहीं, तेलंगाना के गल्फ वेलफेयर एसोसिएशन ने इस मामले पर मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा है कि दुबई एम्बेसी से बात करके सभी का टेस्ट कराया जाएगा। जो भी कोरोना नेगेटिव पाया जाएगा उसको भारत वापस लाने की भी व्यवस्था की जाएगी। बाकी कोरोना पीड़ितों का अस्पताल में इलाज होगा।

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