Kuwait: New Expat Bill से 8 लाख भारतीय चिंतित, ये है सबसे बड़ी वजह

HIGHLIGHTS

  • कुवैत सरकार ( Kuwait Government ) एक नया expat bill लेकर आई है, जिसमें प्रवासियों की संख्या को 30 फीसदी तक कम करने का प्रावधान किया गया है।
  • कानून के मसौदे में कहा गया है कि कुवैत में रहने वाले भारतीयों ( Indians In Kuwait ) की तादाद को देश की कुल आबादी के 15 फीसद तक सीमित किया जाना चाहिए।

By: Anil Kumar

Updated: 16 Jul 2020, 05:13 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना महामारी ( Corona Epidemic ) को लेकर पूरी दुनिया में भयावाह स्थिति है। ऐसे में कुवैत में रहने वाले भारतीयों ( Indians In Kuwait ) के लिए अब एक नया संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, कुवैत सरकार एक नया बिल ( kuwait expat bill ) लेकर आई है, जिसमें प्रवासियों की संख्या को 30 फीसदी तक कम करने का प्रावधान किया गया है। ऐसे में सबसे बड़ी मुश्किल भारतीय नागरिकों पर आई है, क्योंकि कुवैत में करीब 70 फीसदी आबादी प्रवासियों की है, जिसमें सबसे अधिक भारतीय हैं।

प्रवासियों को लेकर कुवैत में बनाए जा रहे कानून ने खाड़ी देश में रह रहे भारतीयों के मन में उन 'चिंताओं को फिर से जगा दिया है' जब दो साल पहले नियमों में बदलाव के चलते सैकड़ों भारतीय इंजीनियरों ( Indian Engineers ) को नौकरी से हाथ धोना पड़ा था।

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अब एक बार फिर से कुवैत में विदेशी श्रमिकों यानी प्रवासियों ( Foreign workers or migrants ) की संख्या को कम करने के लिए लाए गए बिल के बाद सभी का भविष्य अनिश्चित लग रहा है। विधेयक को कुवैत की राष्ट्रीय विधानसभा की कानूनी और विधायी समिति ( Legal and Legislative Committee of the National Assembly ) ने मंजूरी दे दी है और अब इसे कानून बनने के लिए सरकार की मंजूरी की आवश्यकता है।

8 लाख भारतीयों पर खतरा

यदि बिल को सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो इससे 8 लाख से अधिक भारतीयों को कुवैत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कुवैत की नेशनल एसेंबली ( National Assembly of Kuwait ) की कानूनी समीति ने प्रवासियों पर तैयार हो रहे एक बिल के प्रावधान को विधिसम्मत माना है। अब इस मंजूरी के लिए इस प्रस्ताव को दूसरी समितियों के पास भेजा जाने वाला है। इस बिल के मसौदे में ये स्पष्ट कहा गया है कि कुवैत में रहने वाले भारतीयों की संख्या को देश की कुल आबादी के 15 फीसद तक सीमित किया जाना चाहिए।

ऐसे में अब ये माना जा रहा है कि कुवैत में रहने वाले तकरीबन 10 लाख प्रवासी भारतीयों में से आठ या साढ़े आठ लाख लोगों को देश छोड़ना पड़ सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम कुवैत की अर्थव्यवस्था ( Kuwait Economy ) में मंदी और स्थानीय लोगों के बीच नौकरियों की बढ़ती मांग के कारण उत्पन्न हुआ है। प्रधान मंत्री शेख सबा ( prime minister sheikh sabah al khalid al sabah ) ने कहा कि प्रवासियों की बढ़ती संख्या के कारण एक बड़ा असंतुलन था। हमारे पास इस असंतुलन को दूर करने के लिए भविष्य की चुनौती है।

भारत सरकार ने कुवैत से चर्चा शुरू की

बता दें कि इस नए कानून से भारतीयों के अलावा, पाकिस्तान, फिलीपींस, बांग्लादेश, श्रीलंका और मिस्र के नागरिक भी प्रभावित होंगे। अब भारतीयों पर बढ़ते संकट को देखते हुए भारत सरकार ने कहा है कि उसने बिल के बारे में कुवैत के साथ चर्चा शुरू कर दी है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय समुदाय के लोगों को कुवैत और खाड़ी क्षेत्र में अच्छी तरह से माना जाता है और उनके योगदान को अच्छी तरह से पहचाना जाता है। हमने अपनी उम्मीदों को साझा किया है और कुवैत के फैसले को ध्यान में रखा जाएगा।

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कुवैत भारत के लिए विदेशी मुद्रा ( foreign currency ) के आय के स्रोतों में से एक है। प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, वहां रहने वाले भारतीयों ने 2017 में लगभग 4.6 बिलियन डॉलर भारत भेजे थे। कुवैत में लगभग 300,000 भारतीय ड्राइवर, रसोइया और कार्यवाहक के रूप में काम करते हैं। अब ये समझा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर इन रिक्तियों को भरना आसान नहीं होगा।

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