script17 year old CT scan machine is getting damaged again and again | 17 साल पुरानी सीटी स्केन मशीन बार-बार हो रही खराब | Patrika News

17 साल पुरानी सीटी स्केन मशीन बार-बार हो रही खराब

- मेंटनेंस पर खर्च हो रहा लाखों का बजट, नई मशीन मिलने में हो रही देरी
- जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा हो रही प्रभावित
- गरीब मरीज नहीं करा पाते बाजार मे महंगी जांच
- सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को लाने-ले जाने में भी आती है परेशानी
- प्रबंधन बोला, जानकारी ऊपर भेज दी है, जल्द नई मशीन मिलने की उम्मीद

गुना

Published: March 04, 2022 12:39:36 am

गुना. गरीब व जरुरतमंदों को हर जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार सरकारी अस्पतालों पर करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर रही है। इसके बावजूद मरीजों को इलाज से वंचित होना पड़ रहा है। क्योंकि जांच व इलाज के लिए जरूरी मशीनरी की देखरेख व मेंटनेंस समय-समय पर नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप मशीनें बार-बार खराब हो रही हैं। ताजा मामला सीटी स्कैन मशीन का सामने आया है। जो पिछले काफी समय से खराब है। जिसके कारण मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। ऐसे में उनका इलाज आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में जो सीटी स्कैन मशीन है, उसे 17 साल हो चुके हैं। यह मशीन जिस कंपनी की है वह आउट डेटेट हो चुकी है। यही वजह है कि मशीन बार-बार खराब हो रही है। साथ ही उसे ठीक कराने में भी बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सूचना देने के बाद भी कई-कई दिनों तक इंजीनियर नहीं आ पा रहे। वहीं कई ऐसे उपकरण भी हैं जो अब आसानी से नहीं मिल पा रहे हैं। इन सभी कारणों के चलते सीटी स्कैन जांच प्रभावित हो रही हैं। उधर डॉक्टर मरीजों को सीटी स्कैन जांच लिख रहे हैं। लेकिन मरीजों के समक्ष संकट यह है कि
बाजार में यह जांच बहुत महंगी है, जिसे गरीब मरीज नहीं करवा पा रहा है। जिससे उसका इलाज आगे नहीं हो पा रहा। वहीं दूसरी परेशानी दुर्घटना में घायल उन मरीजों की है, जिनकी सरकारी अस्पताल से दूसरी जगह जाने लायक शारीरिक स्थिति नहीं है। वहीं उनके पास अटैंडर भी नहीं हैं। जिसकी मदद से वे उन्हें किसी तरह उठाकर निजी नर्सिंग होम तक ले जा सकें।
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17 साल पुरानी सीटी स्केन मशीन बार-बार हो रही खराब
17 साल पुरानी सीटी स्केन मशीन बार-बार हो रही खराब
कहां जरुरत होती है एचआरसीटी टेस्ट की
विशेषज्ञ के मुताबिक कोरोना के नए स्ट्रेन को जानने के लिए रैपिड एंटिजन, ट्रूनेट, आरटीपीसीआर जैसे टेस्ट किए जाते हैं। रैपिड एंटिजन में देखा गया है कि अगर 100 लोगों को कोविड है तो ये 20 से 30 फीसद में ही ये कोविड को पकड़ पाता है। जब वायरल लोड बहुत हाई होता है तभी रैपिड एंटीजन रिपोर्ट में कोविड पॉजिटिव आ पाता है। ट्रूनेट टेस्ट में 50 से 60 फीसद में कोरोना के सही परिणाम आते हैं। सबसे ज्यादा प्रभावी टेस्ट आरटीपीसीआर है जिसमें मुंह और नाक से सैंपल लिया जाता है। जिससे कोरोना की जांच की जाती है। इस टेस्ट की सेंसटिविटी 70 से 80 फीसद होती है। कोरोना के नए स्ट्रेन में देखा गया है कि मरीज की आरटीपीसीआर नेगेटिव होती है लेकिन मरीज को लक्षण सभी कोरोना के दिखाई देते हैं। ऐसे पेशेंट का डायग्नोस करने के लिए एचआरसीटी टेस्ट (उच्च रिजॉल्यूशन कम्प्यूटेड टोमोग्राफी) किया जाता है। इस टेस्ट से 91 फीसद परिणाम सही आते हैं। इसके अलावा पल्मोनरी एंबोलिज्म के लिए भी एचआरसीटी स्कैन किया जाता है। फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के बन रहे हैं जिसकी वजह से पल्मोनरी एंबोलिज्म और हार्ट अटैक की परेशानी हो जाती है। पल्मोनरी एंबोलिज्म भी एचआरसीटी से ही पहचाना जाता है।
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फेफड़ों की जांच के लिए होता है एचआरसीटी
एचआरसीटी को ही सीटी स्कैन कहा जाता है। फेफड़ों की जांच के लिए एचआरसीटी किया जाता है। डॉक्टर के अनुसार जिन पेशेंट का आरटीपीसीआर नेगेटिव है लेकिन उनको लक्षण कोरोना के हैं। ऐसे पेशेंट को एचआरसीटी स्कैन कराना चाहिए। अगर ऐसे मरीजों में निमोनिया निकलता है तो उन मरीजों का इलाज कोरोना का ट्रीटमेंट ही होता है।
एचआरसीटी की जरूरत तब भी पड़ती है जब मरीज को मालूम है कि उसे कोरोना है, लेकिन डॉक्टर गंभीरता को जांचना चाहते हैं तो उन्हें पेशेंट का एचआरसीटी स्कोर देखना पड़ता है। फेफड़े कितने खराब हुए हैं, यह जानकर मरीज का इलाज किया जाता है। सीटी स्कैन में अगर पेशेंट के फेफड़े 50 फीसद से ज्यादा खराब आ रहे हैं तो उस पेशेंट को गंभीर स्थिति वाले इलाज के लिए रेफर किया जाता है। अगर पेशेंट का सीटी स्कोर कम होता है उसके ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है। रोग की गंभीरता जानने के लिए एचआरसीटी स्कैन किया जाता है। इसके अलावा फेफड़ों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या जैसे सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ तथा बलगम में खून आना शामिल है। दुर्घटना या मारपीट में घायल मरीज के सिर में यदि गंभीर चोट है, तब भी सीटी स्कैन करवाई जाती है।
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सरकारी में फ्री प्राइवेट में 2 से 6 हजार में जांच
जिला अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन ठीक होना बेहद जरूरी है। क्योंकि जो जांच सरकारी में नि:शुल्क होती है, वही जांच बाजार में दो से 6 हजार रुपए में होती है। यहां बता दें कि सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड, श्रमिक कार्ड, बीपीएल कार्डधारियों सहित वास्तविक जरुरतमंद को देखकर फ्री में सीटी स्कैन की जाती है। यहां सिर्फ एपीएल श्रेणी में आने वाले मरीज के लिए मात्र 600 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है।
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इनका कहना
हां यह बात सही है कि अस्पताल के सीटी स्कैन मशीन वर्तमान में चालू नही हैं। जिसे ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इंजीनियर उक्त मशीन को आउट डेटेट बता चुके हैं। मशीन के मेंटनेंस पर काफी पैसा खर्च किया जा चुका है। नई मशीन के लिए प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है कि मार्च माह में नई आ जाएगी। जिसके बाद पुरानी को हटाकर नई स्थापित कर दी जाएगी।
डॉ हर्षवर्धन जैन, सीएस जिला अस्पताल
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