script37 wards, 394 employees, 13 mates yet the city is drenched in filth | 37 वार्ड, 394 कर्मचारी, 13 मेट फिर भी शहर गंदगी से सराबोर | Patrika News

37 वार्ड, 394 कर्मचारी, 13 मेट फिर भी शहर गंदगी से सराबोर

कॉलोनीवासी बोले, नियमित नहीं आते कर्मचारी, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन भी नहीं
डस्टबिन रखवाए नहीं, कब तक घरों में रखे रहें कचरा
बारिश के मौसम गंदगी व बदबू से परेशान लोग

गुना

Published: August 14, 2021 01:03:34 am

गुना. शासन-प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। वार्डों और कॉलोनियों में जहां देखों वहां गंदगी पसरी पड़ी है। गंदगी और बदबू से नागरिक परेशान हैं। उनका कहना है कि शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में लोगों के गंदगी के बीच ही रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। शहर के यह हालात तब हैं जब नगर के 37 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए 394 कर्मचारी ऑन रिकार्ड दर्ज हैं। यही नहीं इनकी मॉनीटरिंग करने के लिए 13 मेट अलग से तैनात हैं। वहीं इंजीनियर भी समय-समय पर वाडो्रं में जाकर सफाई कार्य को देखते हैं। इसके अलावा शहर को स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश के टॉप-10 स्वच्छ शहरों में शामिल कराने के लिए इंदौर की एक निजी कंपनी द्वारा अलग से टीम तैनात की गई है। जिसका काम नगर के सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन को बढ़ावा देकर शहर को पूरी तरह से कचरा मुक्त बनाना है। इन सभी के प्रयासों के बावजूद शहर की हालत नहीं सुधर सकी है।
जानकारी के मुताबिक बीते दिनों हुई लगातार बारिश के बाद आई बाढ़ ने शहर के हालात बहुत खराब कर दिए हैं। शहर से निकली नदियों के तेज बहाव से नालों का कचरा कॉलोनियों की गलियों में तक आ गया है। चौक नालियों का कचरा भी इधर उधर फैल गया है। बाढ़ की चपेट में आए इलाकों में पहले से ही गंदगी बिखरी पड़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने नगर पालिका को आदेशित किया था कि वे इन दिनों सफाई कार्य में किसी तरह की कोताही न बरतें। क्योंकि इस समय गंदगी से बीमारी फैलने का अंदेशा अधिक है। इसके बावजूद नपा अधिकारियों ने कलेक्टर के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया है। यही वजह है कि रिहायशी इलाकों को तो छोडि़ए आम रास्तों से लेकर मुख्य सड़क किनारे तक कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
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37 वार्ड, 394 कर्मचारी, 13 मेट फिर भी शहर गंदगी से सराबोर
37 वार्ड, 394 कर्मचारी, 13 मेट फिर भी शहर गंदगी से सराबोर
आम आदमी तो क्या अफसरों के बंगले भी गंदगी से पटे
शहर में सफाई व्यवस्था के हालात इतने खराब हैं कि जहां आम नागरिक निवास करते हैं वहां की सफाई व्यवस्था तो छोडि़ए जहां डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारी सहित खुद सीएमओ का बंगला है, उसके आसपास का इलाका गंदगी से पटा हुआ है। इस इलाके में कई व्हीआईपी लोग भी निवास करते हैं। उनके घरों के आसपास के क्षेत्र में दो से तीन दिनों तक एक ही जगह पर कचरा पड़ा हुआ कभी भी देखा जा सकता है।
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सफाई के नाम पर लाखों रुपए का ईंधन खर्च
नगर के सभी 37 वार्डों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर माह लाखों रुपए का बजट किया जा रहा है। इनमें 500 से अधिक सफाईकर्मी शामिल हैं। वहीं मेट, सुपरवाइजर, इंजीनियर, स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के वेतन पर जो खर्च आता है वह तो फिक्स है। लेकिन प्रत्येक वार्ड से कचरा कलेक्शन कर ट्रेचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के काम जो वाहन लगे हंै, इनके ईंधन पर भी अनाप शनाप तरीके से पैसा खर्च किया जा रहा है। नपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह 80 लाख रुपए से अधिक का खर्च आता है। इसमें कचरा कलेक्शन में लगे भी वाहनों का खर्च भी शामिल है।
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ये कारण हैं सफाई व्यवस्था न सुधरने के
नगर पालिका के पास न तो सफाई कर्मियों की कमी नहीं हैं और न ही संसाधन की। लेकिन अधिकारी इनका उपयोग ठीग ढंग से नहीं करपा रहे हैं। न ही सफाई कार्य की नियमित और सही मॉनीटरिंग हो रही है। इन सभी कामों में राजनीति के साथ-साथ भाई-भतीजावाद आड़े आ रहा है। अधिकारी और निवर्तमान पार्षदों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जो राजनीतिक पहुंच रखता है वह अपने वार्ड में अपने हिसाब से सफाई कर्मियों को तैनात करवा लेता है। यदि किसी कर्मचारी पर कार्रवाई की नौबत आती है तो फिर से राजनीति होने लगती है। दो साल से भी अधिक समय से कलेक्टर नगर पालिका में प्रशासक बने हुए हैं लेकिन अब तक किसी भी कलेक्टर ने यह जानने का प्रयास नहीं किया है कि आखिर क्या वजह है शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त न हो पाने की। वार्डों के क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से यहां सफाई कर्मी क्यों तैनात नहीं किए गए हैं।

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