script394 sweepers, 14 mates in charge, yet this condition of the cleaning s | 394 सफाईकर्मी, 14 प्रभारी मेट, फिर भी सफाई व्यवस्था के यह हाल | Patrika News

394 सफाईकर्मी, 14 प्रभारी मेट, फिर भी सफाई व्यवस्था के यह हाल


पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट :
शहर को स्वच्छ बनाने जिस कंपनी पर नपा करोड़ों रुपए खर्च कर रही वह 2 साल में एक वार्ड को भी आदर्श नहीं बना सकी
आधुनिक संसाधन और कर्मचारियों के वेतन पर हर माह लाखों खर्च फिर भी रिजल्ट निराशाजनक
अधिकारी बैठकों में आदेश निर्देश तो दे रहे लेकिन फील्ड में जाकर सही मॉनिटरिंग नहीं कर रहे

गुना

Published: July 31, 2022 12:21:49 pm

गुना. शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगर पालिका सालाना करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर रही है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा
इंदौर की एक निजी कंपनी को भुगतान किया जा रहा है। इस कंपनी ने नवंबर 2020 से गुना शहर में काम संभाला था। जिसकी जिम्मेदारी थी कि वह शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण की रैकिंग में बेहतर से बेहतर परिणाम दे। साथ ही संपूर्ण शहर को कचरा मुक्त व सुंदर बनाए। लेकिन इस कंपनी को दो साल से अधिक समय काम करते हुए हो चुका है लेकिन शहर तो बहुत दूर की बात है कुल 37 वार्डों में से मात्र एक वार्ड को भी आदर्श नहीं बना पाई है।
बता दें कि यह स्थिति तब है जब नगर पालिका के पास 37 वार्डों में सफाई करने 394 कर्मचारी मौजूद हैं। यही नहीं वार्ड और एरिया के हिसाब से सफाई व्यवस्था की मॉनीटरिंग करने के लिए 14 प्रभारी मेट तैनात किए हैं। इनके ऊपर भी नपा के इंजीनियर से लेकर सीएमओ खुद मॉनीटरिंग का जिम्मा संभालते हैं। गौर करने वाली बात है कि शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास यहीं तक सीमित नहीं हैं। कलेक्टर ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी क्षेत्र के हिसाब से सुबह व शाम को मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी दी है। इतना सब कुछ करने के बाद भी शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर रिहायशी इलाकों में कभी भी गंदगी के ढेर आसानी से देखे जा सकते हैं। यह स्थिति गुना शहर के लिए वाकई में चिंताजनक है।
इन हालातों को लेकर पत्रिका ने फील्ड में जाकर जमीनी पड़ताल की। जिसमें सामने आया कि जिन अधिकारियों की ड्यूटी क्षेत्रवार मॉनीटरिंग में लगाई गई है वे अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहे हंै। कलेक्टर सहित आला अधिकारिेयों ने बैठकों में जो निर्देश दिए हैं उनका जमीनी स्तर पर ठीक ढंग से पालन नहीं हो रहा है।
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394 सफाईकर्मी, 14 प्रभारी मेट, फिर भी सफाई व्यवस्था के यह हाल
394 सफाईकर्मी, 14 प्रभारी मेट, फिर भी सफाई व्यवस्था के यह हाल

व्यवस्था में सुधार न होने की ये हैं प्रमुख वजह
शहर और वार्ड की जनसंख्या तथा क्षेत्रफल के हिसाब से सफाईकर्मियों का वितरण नहीं किया गया है। जो वार्ड बड़ा है वहां सफाई कर्मी बेहद कम हैं जबकि छोटे वार्ड में अधिक संख्या है।
कई वार्ड ऐसे हैं जहां खुला एरिया ज्यादा है। कई नागरिक खुले में कचरा फेंक देते हैं जिसकी सफाई नहीं हो पाती।
प्रत्येक वार्ड में कुछ स्थान ऐसे हैं जो डंपिंग एरिया बन गए हैं। वहां नियमित रूप से कचरे का उठाव नहीं हो पा रहा है।
शहर के प्रत्येक वार्ड और गलियों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन गाड़ी नहीं जा रही है। ऐसे में कुछ स्थानों पर डस्टबिन का होना जरूरी है।
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इस गंभीर समस्या पर नपा गंभीर नहीं
नाली निर्माण में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। जो पुरानी नालियां हैं वह क्षतिग्रस्त होकर काफी ज्यादा चौड़ी और गहरी हो गई हैं। जब यहां से वाहन चालक गुजरते हंै तो न सिर्फ उनके वाहनों में टूट फूट होती है बल्कि उनके कमर में गंभीर चोट भी लग जाती है। जो उन्हें जिंदगी भर का दर्द दे रही है। इन कॉलोनी में आने वाले दूधियों ने बताया कि उनका काम ही अलग-अलग कॉलोनी में जाकर घर-घर दूध बांटना है। इसलिए उन्हें इन चौड़ी और गहरी नालियों से होकर ही जाना पड़ता है। कई बार तो दूध तक फैल जाता है। स्पीड से गाड़ी निकालो तो कमर में ंचोट लग जाती है। ऐसी नालियों पर जाली रखी जानी चाहिए ताकि वाहन चालक दुर्घटना से बच सकें। खासकर गर्भवती महिलाओं को ऑटो से ले जाने में बहुत ज्यादा दिक्कत आती है।
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रैंकिंग में हो रहा सुधार धरातल पर नहीं
आम जनता की नजर में भले ही शहर की सफाई व्यवस्था में कोई खास फर्क नहीं आया है। लेेकिन साल दर साल स्वच्छता रैकिंग में जरूर सुधार देखने को मिल रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 में गुना को 79 वी रैंक मिली थी। इससे पहले यह रैंक 163 थी। नपा की स्वच्छता रैकिंग में सुधार के लिए काम कर रही निजी कंपनी के अधिकारी के अनुसार अच्छी रैकिंग के लिए उनकी टीम ने लोगों की मानसिकता में बदलाव लाया है। जिसके तहत गीला-सूखा कचरा अलग रखने और कचरे को डस्टविन या कचरा गाड़ी में ही डालने की आदत विकसित की। इसके लिए उन्होंने वार्ड और कॉलोनी में जाकर जागरुकता कार्यक्रम किए। साथ ही डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का दायरा बढ़ाकर लगभग 37 वार्डों में किया है। सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने दोनों टाइम यानी सुबह-शाम मानीटरिंग की जा रही है। कचरे अड्डों की संख्या घटाई है। कम से कम समय में कचरे का उठाव करने जैसे कदम कारगर साबित हुए हैं।
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