script4 lakh will be spent on making Guna city beautiful and attractive | गुना शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने पर खर्च होंगे 4 लाख | Patrika News

गुना शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने पर खर्च होंगे 4 लाख

स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान की जमीनी हकीकत
धरातल पर सफाई व्यवस्था को सुधारने के बजाय दीवारों पर पुरानी पेंटिंग को मिटाकर नई कराने में जुटी नपा
शहर के ह्रदय स्थल स्थित रिहाइशी इलाके में कचरे के ढेर
स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान को बनाया कमाई का जरिया !
रतलाम की कंपनी को मिला है ठेका, काम करने वाले भी बाहर के

गुना

Published: March 11, 2022 12:47:44 pm

गुना. प्रत्येक शहर स्वच्छ और सुंदर हो, इसे साफ रखने में शहर का प्रत्येक नागरिक शासन-प्रशासन द्वारा बनाई गई व्यवस्था में सहयोग दे। इसी मंशा से प्रधानमंत्री ने स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान की शुरूआत की थी। प्रारंभ में इस अभियान से आम जनता को जोडऩे के प्रयास भी हुए लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान आमजन से दूर होता हुआ कथित रूप से व्यवसायिक कमाई का जरिया बनता जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण शहर के प्रमुख मार्गों व सार्वजनिक स्थलों पर की जाने वाली रंगाई पुताई का ठेका है। जिसे रतलाम की कंपनी ने लिया है। गौर करने वाली बात है कि यह कंपनी जिन पेंटरों से काम करवा रही है वे सभी बाहर के हैं। यानी कि शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने के काम में भी शहर के पेंटरों को काम नहंीं मिला। यही नहीं स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान के दौरान सबसे बड़ी अनियमितता यह भी सामने आई है कि नगर पालिका और प्रशासन का असली फोकस धरातल पर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने पर नहीं है। यही कारण है कि शहर के हृदय स्थल स्थित रिहायशी इलाकों में आज भी कचरे के ढेर लगे नजर आ रहे हैं। कुछ स्थान तो ऐसे हैं जहां बीते तीन सालों में स्थिति नहीं बदली है। वर्तमान में यह स्थान डंपिंग एरिया के रूप जाने जाने लगे हैं। बड़ी मात्रा में हानिकारक कचरा डंप होने से उक्त मार्ग से आवागमन तक बंद हो गया है। नपा के जिम्मेदारों से लगातार शिकायत करने के बाद भी समस्या का निराकरण न होने से अब आम जन ने शिकायत करना भी छोड़ दिया है। कुल मिलाकर प्रशासन के इस तरह के रवैए से कैसे गुना शहर प्रदेश के टॉप-10 शहरों में शामिल हो पाएगा ?
जानकारी के मुताबिक स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान के गुना में व्यवसायिक रूप लेने की कहानी तब शुरू हुई जब नवंबर 2020 में इंदौर की एक निजी कंपनी को लाखों रुपए का ठेका दिया गया। जिसकी जिम्मेदारी थी स्वच्छ सर्वेक्षण में ुगुना शहर को प्रदेश के टॉप-10 शहरों में शामिल कराना। जिसके लिए कंपनी ने शहर के कुल 37 वार्डों को कचरा मुक्त बनाने का सबसे पहला टारगेट फिक्स किया। जिसके लिए उन्होंने शुरूआती दौर में 15 वार्ड चिन्हित किए । लेकिन एक साल से ज्यादा समय हो गया लेकिन आज तक एक वार्ड तो एक कॉलोनी भी पूरी तरह से कचरा मुक्त नहीं हो पाई है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने अतिरिक्त वाहनों की खरीदी की गई। इन वाहनों पर अलग से ड्राइवर रखे गए। इनकी मॉनीटरिंग के लिए भी अलग से कर्मचारी तैनात किए गए। यही नहीं कचरा कलेक्शन वाहनों की हाइटेक निगरानी के लिए जीपीआरएस सिस्टम लगाने के साथ हाइटेक कंट्रोल रूम बनाया गया। आमजन को शिकायत करने अलग से टोल फ्री नंबर दिया गया है। इतना सब करने के बाद भी वर्तमान में रिजल्ट जीरो है।
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गुना शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने पर खर्च होंगे 4 लाख
गुना शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने पर खर्च होंगे 4 लाख

जिन पर स्वच्छता की जिम्मेदारी वे ही कचरा डंप कर रहे
यह अपना शहर है, इसे स्वच्छ बनाने में मदद करें, इस तरह से जागरुकता नारे शहर की दीवारों पर कहीं भी पढ़े जा सकते हैं। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। इसे समझने के लिए किसी मलिन बस्ती में भी जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि शहर के पॉश और रिहायशी इलाके में स्थित जिला अस्पताल परिसर में बने मेटरनिटी वार्ड का बेहद गंदा और हानिकारक कचरा बाउंड्री वॉल के पार बोहरा कॉम्पलैक्स वाली गली में पिछले चार सालों से डंप किया जा रहा है। इस गली की हालत इतनी बद्तर हो चुकी है कि इस मार्ग से आवागमन तक बंद हो चुका है। यहां के दुकानदार और कॉलोनी वासियों का कहना है कि वे पिछले चार सालों से लगातार नपा व प्रशासन के आला अधिकारियों से शिकायत करते आ रहे हैं लेकिन आज तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने निराश होकर शिकायत करना तक छोड़ दिया है लेकिन कचरा फेंकने वालों ने अपना रवैया नहीं बदला।
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तत्कालीन कलेक्टर ने स्कूली बच्चों से कराई थी वॉल पेंटिंग
स्वच्छ भारत अभियान आमजन से जुड़ा हुआ है। इसमें शहर के प्रत्येक नागरिक को भागीदार बनाए बिना शहर को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता। इस मंशा को समझते हुए तत्कालीन कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने शहर को सुंदर बनाने के लिए स्कूली बच्चों की मदद ली थी। जिसके तहत नपा व प्रशासन के सहयोग से बच्चों ने दीवारों पर एक से बढ़कर एक पेंटिंग बनाई थी। जो हर शहर वासी के लिए आकर्षण और प्रेरणा का काम कर रही थी। इस काम में खर्चा भी न के बराबर आया था। लेकिन वर्तमान में नगर पालिका ने यह काम कराने के लिए जिले की किसी फर्म को ठेका न देकर रतलाम की फर्म को ठेका दिया। जिस पर करीब 4 लाख रुपए का बजट खर्च किया जा रहा है। यही नहीं उक्त फर्म द्वारा शहर के पेंटरों को रोजगार न देते हुए बाहर लोगों से काम लिया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर नगर पालिका सीएमओ तेज सिंह यादव से उनका पक्ष जानने कई बार फोन लगाया गया लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

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