5 करोड 85 लाख की सड़क एक साल भी नहीं चली, कई जगह धसकी

डिवाइडर बनाने के बाद न कलर किया और न लगाया रेडियम
नानाखेड़ी से अंबेडकर चौराहा तक के मार्ग में नहीं जलती स्ट्रीट लाइट
अंधेरे में नजर नहीं आते डिवाइडर, हर समय बनी रहती है दुर्घटना की आशंका

गुना. आम जनता से टैक्स के रूप में वसूली गई राशि को सरकारी विभाग के अधिकारी व ठेकेदार किस तरह ठिकाने लगा रहे हैं, इसकी एक नजीर है नानाखेड़ी से हनुमान चौराहा तक की सड़क। जिसके निर्माण को बमुश्किल एक साल ही गुजरा है लेकिन इससे पहले ही यह सड़क कई स्थानों पर बैठक ले चुकी है। सड़क की यह खतरनाक स्थिति आए दिन वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का सिलसिला यही नहीं थमा बल्कि सड़क के बीच सीमेंट के डिवाइडर बनाकर उन्हें अधूरा छोड़ दिया गया है। यह डिवाइडर अंधेरा होते ही वाहन चालकों को नजर नहीं आते हैं। क्योंकि नानाखेड़ी से अंबेडकर चौराहा तक स्ट्रीट लाइट भी नहीं लगाई गई है। जिससे यह मार्ग और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के तहत नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी से लेकर हनुमान चौराहा तक करीब 1.8 किमी लंबी सड़क के निर्माण पर 5 करोड़ 85 लाख की राशि खर्च की गई है। इस सड़क के बीच में डिवाइडर बनाने के अलावा मार्ग का 100 मीटर तक विस्तारीकरण भी किया गया है। पैदल चलने वाले राहगीरों को पेवर्स टाइल्स लगाकर फुटपाथ भी तैयार किया गया है। इस पूरे कार्य में निर्माण एजेंसी नगर पालिका है। जिसके जिम्मेदार अधिकारियों ने इस निर्माण कार्य के दौरान ईमानदारी पूर्वक मॉनीटरिंग नहीं की। नतीजतन ठेकेदार अपने मंसूबों मेें सफल रहा और उसने गुणवत्ताहीन सड़क का निर्माण कर दिया। जिसका खामियाजा वाहन चालकों को अब दुर्घटना के रूप मेें उठाना पड़ रहा है।
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सबसे महंगी सड़कों में से एक है यह रोड
नानाखेड़ी से हनुमान चौराहा तक 1.8 किमी लंबी सड़क की लागत 5 करोड़ 85 लाख है। जो लागत के हिसाब से शहर की दूसरी सबसे महंगी सड़कों में से एक है। इसके बावजूद इस सड़क का निर्माण इतना घटिया हुआ है कि एक साल के अंदर ही यह सड़क कई जगहों पर धसक चुकी है। ऐसे मेें जब दो व चार पहिया वाहन चालक सामान्य स्पीड में भी वाहन को चलाता है तब भी उसे यह धसका हुआ हिस्सा आसानी से नजर नहीं आता है। चिंता जनक पहलु यह है कि चार पहिया वाहन चालक तो जैसे तैसे एडजस्ट कर लेता है लेकिन दो पहिया वाहन चालक, यदि उसके ऊपर महिला सवारी या बच्चे बैठे हों तो दुर्घटना होने का ***** बढ़ जाता है।
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रात में नजर नहीं आते डिवाइडर
5 करोड 85 लाख की लागत से बनी सड़क को वाहन चालकों के लिए और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए सड़क के बीच में डिवाइडर बनाया गया है। लेकिन निर्माण एजेंसी ने आरसीसी के डिवाइडर बनाने के बाद इन्हें अधूरा छोड़ दिया है। जिससे कारण सीमेंट के यह डिवाइडर रात में वाहन चालकों को बिल्कुल भी नजर नहीं आते हैं। इस खतरे को स्ट्रीट लाइट के अभाव ने और अधिक खतरनाक बना दिया है। उल्लेखनीय है कि डिवाइडर का निर्माण तो एक साल पहले ही हो गया लेकिन अब तक इनकी रंगाई-पुताई नहीं की गई है। रात के समय वाहन चालकों को दुर्घटना से बचाने इन डिवाइडरों पर रेडियम नहीं लगाए गए हैं जिससे यह अंधेरे में दूर से नजर आ जाएं।
फुटपाथ पर भी भारी वाहनों का कब्जा
आमजन व वाहन चालकों की विशेष सुविधा का ख्याल रखते हुए सरकार ने विभाग को भारी भरकम बजट तो उपलब्ध करवा दिया लेकिन काम की गुणवत्ता का ध्यान रखने ठीक से मॉनीटरिंग नहीं करवाई गई। वाहन चालकों के अलावा पैदल चलने वालों को परेशानी न आए इसके लिए सड़क का 100 मीटर तक विस्तारीकरण किया गया। साथ ही पैदल चलने वालों के लिए पैवर्स टाइल्स लगाए गए हैं। जिन पर इस समय भारी वाहनों का कब्जा है। रेत, गिट्टी व बिल्डिंग मटेरियल के विक्रेताओं के ट्रेक्टर ट्रॉली से लेकर अन्य भारी वाहन पूरे समय यहां खड़े रहते हैं।

Narendra Kushwah Reporting
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