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लंबे समय से प्रभारी सीएमओ के भरोसे रही चांचौड़ा-बीनागंज नगर परिषद् में समस्याओं का अंबार

  • पत्रिका इलेक्शन इश्यू :
  • 5 साल बाद भी नलजल योजना का नहीं हो सका काम पूरा
  • वार्डों में गलियां खुदी पड़ीं, नालियां क्षतिग्रस्त, सफाई व्यवस्था देखने वाला कोई नहीं
  • अध्यक्ष पद पर लंबे समय से भाजपा का है कब्जा

गुना

Published: June 11, 2022 01:08:08 am

गुना. जिले में गुना और राघौगढ़ दो नगर पालिका हैं और 4 नगर परिषद्। इनमें नवगठित मधुसूदनगढ़ को छोड़कर कुंभराज और आरोन नगर परिषद् से चांचौड़ा-बीनागंज की तुलना की जाए तो सबसे बुरी हालत चांचौड़ा नप की है। इस पर शुरूआत से ही कांग्रेस का कब्जा रहा लेकिन 2008 के बाद से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। यही वजह है कि इस बार के निकाय चुनाव में भी भाजपा इस जीत को बरकरार रखना चाहेगी। क्षेत्र के दो राजनीतिक क्षत्रपों की बात करें तो कांग्रेस से चांचौड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह हैं तो वहीं भाजपा से पूर्व विधायक ममता मीणा। इन्हीं दो दिग्गजों के बीच यहां की राजनीति चलती है। दोनों प्रमुख दलों की लंबे समय तक नगर सरकार रही। इस दौरान क्षेत्र में कौन-कौन से विकास कार्य हुए जिनका फायदा जनता को मिल रहा है और कौनसे काम नहीं हुए जिनकी वजह से नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। क्या यह समस्याएं इस बार के निकाय चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनकर उभरेंगी। यह जानने का प्रयास पत्रिका टीम ने वार्ड के नागरिकों से चर्चा कर जाना।
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पेयजल : नगर में परिषद् का गठन हुए वर्षों हो गए। जिसका सबसे पहला काम नगर की पूरी आबादी को घर-घर शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना होता है। इस पहली जिम्मेदारी में ही नगर सरकार पूरी तरह से फेल रही है। फिर चाहे सरकार कांग्रेस की रही हो या फिर भाजपा की। जनता के वोट से चुनकर आने वाले प्रतिनिधि उसी जनता के प्रति कितने जवाबदेह हैं इसका जीता जागता उदाहरण है नलजल योजना। जिसका काम शुरू हुए 5 साल से भी ज्यादा समय हो चुका है लेकिन अभी तक यह योजना चालू नहीं हो सकी है। वर्तमान में हालात यह हैं कि आधे नगर में भी पेयजल लाइन नहीं बिछ सकी है। निर्माण की गुणवत्ता और गति को देखकर यह भी नहीं कहा जा सकता कि कब तक और जनता को इंतजार करना पड़ेगा। इस तरह मूल आवश्यकता को लेकर दोनों ही पार्टियों ने जनता को निराश किया है।
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सफाई : नगरीय सरकार की दूसरी और अहम जिम्मेदारी प्रत्येक वार्ड में सफाई व्यवस्था मुहैया कराना है। लेकिन इस काम में भी स्थानीय निवर्तमान पार्षद से लेकर वर्तमान में नप के प्रशासक तक फेल रहे हैं। ऐसा कोई वार्ड नहीं है जहां गंदगी के ढेर लगे नजर न आएं। नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं। क्षतिग्रस्त नालियों को सुधारा नहीं गया है। वहीं नई नालियों का निर्माण नहीं कराया। यह पूरी स्थिति बारिश के दिनों में नगर में बाढ़ के हालात निर्मित कर देती है।
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सड़क : नगर में कुल 15 वार्ड हैं। इनमें एक भी ऐसा वार्ड नहीं है जहां सड़क की समस्या न हो। कई साल पहले जो सड़कें बनी थीं, वह वर्तमान में क्षतिग्रस्त हालत में है। जो ठीक-ठीक सड़कें थीं उन्हें नलजल योजना के तहत पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदकर डाल दिया।
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इन कारणों से नगर विकास हुआ अवरुद्ध
चांचौड़ा और बीनागंज को मिलाकर नगर परिषद् का दर्जा तो दे दिया गया। लेकिन नगर के विकास को धरातल पर उतारने के लिए जैसे जनप्रतिनिधि और जिम्मेदारी अधिकारियों की जरूरत थी वह यहां की जनता को नहीं मिल पाए। नगर परिषद् अध्यक्ष का कार्यकाल दो साल से भी अधिक समय पहले ही खत्म हो चुका है। प्रशासनिक स्तर की बात करें तो इस नगर परिषद् को स्थायी सीएमओ कभी मिला ही नहीं। जो प्रभारी सीएमओ भी आए तो वे मुश्किल से एक साल भी नहीं टिक पाए। इस तरह निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग करने के लिए कोई यहां मौजूद नहीं रहा। जिसका एक उदाहरण है 9 करोड की नलजल योजना। जिसका काम 5 साल में पूरा नहीं हुआ और ठेकेदार को भुगतान भी हो गया। ऐसे में जनता परेशानी का सामना कर रही है।
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नगर परिषद् : चांचौड़ा बीनागंज
कुल वार्ड : 15
कुल मतदाता : 17229
मतदान कब होगा : 13 जुलाई
अध्यक्ष पद : अनारक्षित मुक्त
वार्डवार आरक्षण की स्थिति
एससी महिला : 14
एससी मुक्त : 15
ओबीसी महिला : 3, 4, 6
ओबीसी मुक्त : 2, 13
अनारक्षित महिला : 5, 7, 10, 12
अनारक्षित मुक्त : 1, 8, 9, 11
लंबे समय से प्रभारी सीएमओ के भरोसे रही चांचौड़ा-बीनागंज नगर परिषद् में समस्याओं का अंबार
लंबे समय से प्रभारी सीएमओ के भरोसे रही चांचौड़ा-बीनागंज नगर परिषद् में समस्याओं का अंबार
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