scriptA village where ambulances cannot go inside during rainy days | एक ऐसा गांव जहां बारिश के दिनों में अंदर नहीं जा पाती एंबुलेंस | Patrika News

एक ऐसा गांव जहां बारिश के दिनों में अंदर नहीं जा पाती एंबुलेंस

- क्षतिग्रस्त मार्ग को दुरुस्त करने 17 साल पहले डाली थी मुरम, अब तक मार्ग को नहीं किया गया ठीक
- परेशान ग्रामीण खुद ही चंदा कर डलवाते हैं मुरम
- बदहाल मार्ग गांव के बच्चों को स्कूल जाने में बन रहा बाधा

गुना

Published: May 27, 2022 01:47:08 am

गुना. गांव के संपूर्ण विकास के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हर साल करोड़ों का बजट उपलब्ध करवा रही है लेकिन इसके बाद भी ग्रामीण सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे हैं। ताजा मामला गुना जनपद की ग्राम पंचायत परसोदा के हिनौतिया गांव का सामने आया है। जहां गांव की मुख्य सड़क इतनी जर्जर हालत में है कि इस गांव में एंबुलेंस तक नही आ पाती। ग्रामीणों को बीमार व्यक्ति को अन्य माध्यम से एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है तब जाकर वह अस्पताल पहुंच पाता है। सबसे ज्यादा परेशानी तब आती है जब किसी गर्भवती महिला को डिलवेरी के ले जाना हो। ग्रामीणों की यह परेशानी यहीं तक सीमित तक नहीं है। गांव के बच्चे इस मार्ग से स्कूल भी नहीं जा पाते। उन्हें दूसरे लंबे मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। गौर करने वाली बात है कि सड़क की यह समस्या दो पांच साल पुरानी नहीं है बल्कि जब से गांव बसा है तब से यह सड़क पक्की नहीं बनी है। इसी वजह से यह समस्या बेहद गंभीर हो गई है।
यहां बता दें कि हिनौतिया गांव गुना जनपद की ग्राम पंचायत परसोदा अंतर्गत आता है। जिसकी कुल आबादी 500 के करीब है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जब भी चुनाव होते हैं तो सड़कों का मुद्दा हावी रहता है। जो चुनाव लड़ने वाले होते हंै वे तत्समय सड़क बनवाने का आश्वासन दे देते हैं लेकिन यह सड़क आज तक नहीं बन सकी। निवर्तमान सरपंच से जब कहा गया तो उन्होंने एकाध बार मनरेगा मद से मुरमीकरण करवा दिया लेकिन यह सड़क एक बारिश भी नहीं झेल सकी। वर्तमान में इस सड़क की हालत बेहद जर्जर है। गांव वालों को इस सड़क से बार-बार गुजरना पड़ता है इसलिए उन्होंने मजबूरीवश खुद ही चंदा कर ट्रेक्टर ट्रॉली से मुरम डाल ली है। लेकिन बारिश के दिनों में यह प्रयास भी बेअसर हो जाता है।
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हमारे गांव में मुख्य सड़क एक बड़ी समस्या बन गई है। जब से गांव बसा है तब से एक बार भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। जब भी परेशानी बढ़ जाती है तो गांव वाले चंदा कर मुरम डलवा लेते हैं। इसकी वजह से न सिर्फ ग्रामीण बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे भी बहुत परेशान हैं। कोई भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
रामेश्वर धाकड़, ग्रामीण
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हिनौतिया गांव से बरखेड़ागिर्द तक 3 किमी का रास्ता बहुत खराब है। इस मार्ग से न सिर्फ हिनौतियावासी बल्कि आसपास के गांव के लोग भी गुजरते हैं। हिनौतिया गांव में 5 वीं तक स्कूल है। वहां जाने के लिए भी इसी मार्ग से बच्चों को जाना होता है। लेकिन बारिश में यहां इतना पानी भर जाता है कि बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
भूरे सिंह, ग्रामीण
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हां यह बात सही है कि हिनौतिया गांव की मुख्य सड़क की हालत बहुत खराब है। लेकिन इसे पंचायत चाहकर भी ठीक नहीं करवा पा रही। क्योंकि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में मंजूर हो चुकी है लेकिन टैंडर प्रक्रिया न होने से काम अटका हुआ है। इससे पहले पंचायत मनरेगा के तहत मुरमीकरण करवा चुकी है। लेकिन बारिश की वजह से सड़क वैसी की वैसी हो गई।
देवेंद्र सिंह धाकड़, सरपंच
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मैं खुद इसी गांव का रहने वाला हूं। मुख्य मार्ग की वजह से होने वाली परेशानी को कई सालों से खुद झेल रहा हूं। चूंकि यह मार्ग अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत चला गया है इसलिए इसमें पंचायत कुछ नहीं कर पा रही। टैंडर प्रक्रिया न होने की वजह से यह काम अब तक अटका है।
चन्द्रमोहन अहिरवार, रोजगार सहायक
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