गुना के औद्योगिक क्षेत्र में दुग्ध प्लांट पर प्रशासन की छापामार कार्रवाई

शुभम डेयरी के नाम से चल रही थी दूध पैकिंग की बड़ी फैक्ट्री
गुना संपूर्ण जिला सहित शिवपुरी, अशोकनगर तक होती है दूध के पैकिटों की सप्लाई
मौके पर बड़ी मात्रा में मिला है कास्टिक सोड़ा, स्किम्ड मिल्क पाउडर
पैकिटों पर पैकिंग व एक्सपायर डेट भी नहीं मिली

By: Narendra Kushwah

Published: 09 Jan 2021, 09:59 PM IST

गुना. शनिवार को प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक दुग्ध प्लांट पर छापामार कार्रवाई अंजाम दी। जहां प्रथम दृष्टया ही बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ां मिली हैं। चार घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। जिसमें दूध में मिलावट, पैकिटों पर पैकिंग व एक्सपायर डेट का न मिलना। दूधियों से दूध खरीदने के बाद पैकिंग करने तक की प्रोसेस के दौरान सफाई का बिल्कुल भी ध्यान न रखा जाना सामने आया है। यही नहीं प्लांट किस लाइसेंस पर संचालित हो रहा है तथा नजदीक ही बर्फ फैक्ट्री चल रही है इसका लाइसेंस है कि नहीं इसकी जानकारी खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी को ठीक से नहीं थी। एसडीएम और नायब तहसीलदार ने प्लांट संचालक से दूध खरीदने व बेचने संबंधित बिल मांगे तो वह नहीं दिखा सका। यह पूरी कार्रवाई करीब 4 घंटे तक चली। इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक शहर के औद्योगिक क्षेत्र में शुभम डेयरी के नाम से दूध पैकिंग प्लांट संचालित है। जिसका संचालन रोहित साहू पिछले एक साल से अपने पिता व भाईयों के साथ मिलकर कर रहा है। बकौल रोहित, दूध पैकिंग प्लांट के पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब एक करोड़ है। जिसे उन्होंने लोन लेकर स्थापित किया है। उद्योग विभाग से लीज पर ली गई जमीन का सालाना किराया करीब 22 हजार रुपए बताया गया है। खास बात है यह है कि दूध पैकिंग प्लांट शुभम डेयरी के नाम से संचालित पाया गया है जबकि इसी नाम से एक साल पहले बजरंगगढ़ रोड पर दूध डेयरी संचालित थी। वर्तमान में यह प्लांट किस लाइसेंस पर संचालित है इसका जवाब खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं दे पाए। यही नहीं प्लांट परिसर में ही बर्फ फैक्ट्री भी संचालित मिली है। इसका लाइसेंस है कि नहीं यह भी अधिकारी नहीं बता पाए। एसडीएम अंकिता जैन ने बताया कि इस प्लांट पर गड़बड़ी को लेकर शिकायत मिली थीं। जिसके आधार पर आज यहां छापामार कार्रवाई अंजाम दी गई है।

शनिवार सुबह करीब 11 बजे एसडीएम व नायब तहसीलदार खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम के साथ दुग्ध प्लांट पर पहुंच गए थे। इस दौरान वहां बड़ी संख्या में दूधिए मौजूद थे, जो प्लांट पर दूध देने आए थे। प्रशासनिक टीम को देखते ही प्लांट पर हड़बड़ी मच गई। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि दूध में बड़े पैमाने पर मिलावट कर बेचा जा रहा है। मौके पर बड़ी मात्रा में कास्टिक सोड़ा व स्किम्ड मिल्क पाउडर के कट्टे रखे मिले। एसडीएम ने जब प्लांट संचालक रोहित साहू व उसके पिता महेश साहू से पूछा कि इनका क्या इस्तेमाल करते हो, जिस पर उन्होंने बताया कि पैकिंग दूध को शासन द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप बनाने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाया जाता है। जबकि कास्टिक सोड़ा का उपयोग प्लांट की मशीनरी की सफाई के लिए किया जाता है। संचालक ने बताया कि यहां सिर्फ दूध पैकिंग का काम होता है जबकि निरीक्षण में पैकिंग छाछ के पैकिट भी मिले। साथ ही घी भी बरामद हुआ है। पैकिंग दूध व छाछ के कई पैकिटों पर पैकिंग व एक्सपायर डेट लिखी नहीं मिली। प्लास्टिक ड्रमों में भरा दूध को एसडीएम ने हाथ में लेकर देखा तो समझ ही नहीं आया कि यह दूध है कि पानी। हर तरफ गड़बड़ी मिलने के बाद एसडीएम ने खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम से 10 सेंपल भरवाए हंै। इनमें दूधियों से लिया गया दूध, प्लांट पर विभिन्न माध्यमों में रखा दूध, छाछ, घी, कास्टिक सोडा, स्किम्ड मिल्क पाउडर शामिल है।
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गुना सहित शिवपुरी व अशोक नगर तक होती है सप्लाई
प्लांट संचालक रोहित साहू के मुताबिक प्रतिदिन करीब 4 हजार लीटर दूध आता है। जिसमें से तीन हजार लीटर दूध का वितरण गुना जिला सहित अशोकनगर व शिवपुरी तक होता है। जो दूध बच जाता है उसमें स्किम्ड मिल्क पाउडर की निर्धारित मात्रा मिलाकर बेचा जाता है।
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सीलिंग की कार्रवाई से बचने दूधियों को किया आगे
बड़े पैमाने पर मिली गड़बड़ी को लेकर जब एसडीएम ने कहा प्लांट को सील किया जाएगा। यह सुनते ही प्लांट संचालक रोहित व उसके पिता महेश पहले तो हाथ जोड़कर गुहार लगाने लगे कि ऐसा न करें क्योंकि इससे दूधियों का क्या होगा। यह उन्हें 20 साल से दूध दे रहे हैं। जब एसडीएम नहीं मानीं तो कुछ दूर बाद प्लांट संचालक ने दूधियों को आगे कर सीलिंग की कार्रवाई से बचने का असफल प्रयास किया। यह स्थिति देख एसडीएम भड़क गईं और उन्होंने संचालक से कड़े शब्दों में कहा कि वह नेतागिरी न करेें अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। एसडीएम का सख्त रवैया देख दूधिए वहां से चले गए।

Narendra Kushwah Reporting
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