नौकरी लगने के बाद खेल का साथ छूटा तो साइकिलिंग को बनाया फिट रहने का माध्यम

- साइकिल चलाते-चलाते ऐसा जुनून हुआ सवार अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कर रहे हिस्सेदारी
- दूसरे जिलों के नागरिकों के लिए प्रेरणा बने गुना के साइकिलिस्ट आशीष गलगले

By: Narendra Kushwah

Published: 06 Oct 2021, 12:42 AM IST

गुना. शरीर को स्वस्थ रखना है तो साइकिलिंग से अच्छा दूसरा माध्यम नहीं हो सकता। साथ ही पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच यदि साइकिल को आवागमन का भी नियमित साधन बना लिया जाए तो इससे और बेहतर नहीं हो सकता। इस तरह की सोच को प्रेक्टीकल कर दिखाया है गुना की हीराबाग कॉलोनी में रहने 49 वर्षीय आशीष गलगले ने। जो वर्तमान में जिले के नेगमा गांव में सरकारी शिक्षक हैं। खास बात यह है कि वह अपनी सरकारी ड्यूटी करने के अलावा अपनी फिजिकल फिटनेस पर खास ध्यान देते हैं। यही वजह है कि जब सरकारी नौकरी लगने की वजह से जब उनका क्रिकेट से साथ छूटा तो उन्होंने फिटनेस को मेंटेन करने के लिए साइकिलिंग शुरू कर दी। जो अब उनका शौक ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का जरिया भी बन गया है।
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आशीष को फुल यूनिफार्म में साइकिल चलाते देख दूसरे ले रहे प्रेरणा
मौजूदा समय में ऐसे बहुत ही कम लोग हैं जिनके पास आज भी साइकिल मौजूद हैं। वहीं इसके उलट बाइक लगभग हर व्यक्ति के पास मौजूद रहने लगी हैं। इस समय यदि कोई साइकिल चलाता नजर आता है तो उसे उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है। उसके बारे में लोगों की सोच है कि वह आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है इसलिए वह बाइक न चलाकर साइकिल चला रहा है। इस सोच के बीच आज भी ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो महीने में 30 से 50 हजार रुपए का वेतन लेने के बाद भी ऑफिस साइकिल से जाते हैं। इसी तरह का उदाहरण आशीष भी पेश कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि 1995 में उनकी सरकारी नौकरी लग गई थी। जिसके बाद वे कई बार साइकिल से स्कूल गए। आज भी वह कई बार साइकिल से ही स्कूल जाते हैं तो लोग उन्हें हैरानी भरी नजरों से देखते हैं। लेकिन वे जब फुल यूनिफार्म पहनकर साइकिलिंग करते हुए शहर व जिले से बाहर निकलते हैं तो उन्हें अचरच और उत्सुकूता की नजरों से देखा जाता है। यहां बता दें कि आशीष को साइकिलिंग करते देख काफी लोग उनसे प्रेरणा पाकर साइकिल खरीद चुके हैं। जो प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक को छोड़ साइकिलिंग करने लगे हैं। इनमें कई युवा व धनाढ्स वर्ग के लोग भी हैं। जो अपनी फिटनिस को मेंटेन करने के लिए साइकिलिंग करने लगे हैं।


राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के बाद बाद कश्मीर से कन्याकुमारी तक साइकिलिंग का लक्ष्य
आशीष गलगले पेशे से सरकारी शिक्षक होने से पहले क्रिकेटर के अलावा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग भी कर चुके हैं। उन्होंने इस विधा में ए ग्रेड का सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। मप्र सिविल सर्विसेज की तरफ से दो साल तक मप्र की क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।
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क्रिकेट छोड़ साइकिलिंग से ऐसे जुड़े
पेशेवर क्रिकेट और अंपायरिंग कर चुके आशीष गलगले बताते हैं 1995 से पहले वह क्रिकेट को काफी समय देते थे। लेकिन सरकारी शिक्षक बनने के बाद उतना समय नहीं मिल पाता है। एक बार वह मुंबई में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अंपायरिंग के लिए गए थे। यहां वे जब स्टेडियम में थे, इसी दौरान उन्होंने कुछ लोगों को साइकिल करते देखा तो मन में भाव जागा कि फिटनिस बनाए रखने के लिए साइकिलिंग से बेहतर दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। गुना लौटते ही उन्होंने सबसे पहले एक सेकंड हैंड साइकिल खरीदी और साइकिलिंग शुरू कर दी। धीरे-धीरे साइकिलिंग का ऐसा जुलून सवार हुआ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की साइकिलिंग प्रतियोगिता में भाग लेने लगे। वर्तमान में उनका लक्ष्य कश्मीर से कन्याकुमारी तक 3800 किमी की दूरी तय करना है। वर्तमान में वह प्रतिदिन 30 से 50 किमी तक साइकिलिंग करते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंच से ऐसे जुड़े
आशीष बताते हैं कि उन्होंने शुरूआत में कई प्रतियोगिता में हिस्सेदारी की। इस दौरान वे कई प्रोफेशनल साइकिलिस्ट से मिले। जिन्होंने स्टारवा ऑन लाइन एप्स के बारे में बताया। इसके माध्मय से उन्हें साइकिलिंग के क्षेत्र में अंततराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सेदारी करने का मौका मिला है। इस एप्स की विशेषता है कि संबंधित व्यक्ति की जीपीआरएस के जरिए पूरी मॉनीटरिंग होती है। साथ ही साइकिलिस्ट गार्मिंग वॉच के जरिए अपने शरीर की हर स्थिति भी जान सकते हैं। जिसमें हार्ट रेट, ऊंचाई तथा स्पीड भी रिकार्ड होती है।

Narendra Kushwah Reporting
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