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एक्सीडेंट के बाद एक माह से घर पर पड़े फिर भी लग गया दूसरा डोज

  • एक बार फिर वैक्सीनेशन में फर्जीबाड़ा उजागर
  • किसी को मैसेज के जरिए तो किसी को सेंटर पर जाकर ही पता चला, उसे तो पहले ही लग गया टीका
  • एक ही दिन में एक ही क्षेत्र के चार मामले सामने आए

गुना

Published: January 11, 2022 01:01:54 am

गुना. टारगेट पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम किस तरह फर्जीबाड़ा कर रही है, इसकी हद हो चुकी है। लगभग हर परिवार में एक ऐसा व्यक्ति मिल रहा है जिसके मोबाइल नंबर से किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को वेक्सीन लगी है। यही नहीं ऐसे व्यक्ति भी लगातार सामने आते जा रहे हैं जिन्हें अब तक दूसरा डोज नहीं लगा है लेकिन दस्तावेजों में वह फुली वैक्सीनेट हो चुके हैं। इस तरह की अनियमितता से विभाग के अमले को कोई फर्क नहीं पड़ रहा लेकिन हितग्राही काफी परेशान हो रहे हैं। क्योंकि कई जगह वेरिफिकेशन के लिए तैनात स्टाफ हितग्राही की सुनवाई नहीं करता और उन्हें वैक्सीन लगाने से भी इंकार कर देता है। ऐसे एक नहीं बल्कि दर्जनों मामले लगभग प्रत्येक सेंटर पर सामने आ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने गुना जिले के स्वास्थ्य महकमे को 18+ वाले कुल 8 लाख 87 हजार नागरिकों को शत प्रतिशत वैक्सीनेशन करने का लक्ष्य दिया था। जिसे 25 दिसंबर तक पूरा करना था। लेकिन जैसे ही विभाग के पास जो आंकड़े एकत्रित हुए तो उन्हें लगा कि यह टारगेट निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो पाएगा। जिसके बाद लगातार कथित रूप से वैक्सीनेशन के डेटा में फर्जीबाड़ा किया जाने लगा। विभाग के मैन्युअल आंकड़े और कोविड पोर्टल पर दर्ज डेटा अलग-अलग कहानी बयां कर रहा है। यह जानकारी जैसे ही विभाग के अधिकारियों को लगी तो उन्होंने मैन्युअल डेटा सार्वजनिक करना बंद कर दिया। जिससे डेटा की भिन्नता तो बंद हो गई। लेकिन जैसे ही लोगों के दूसरे डोज की तारीख आई और वे डोज लगवाने सेंटर पर पहुंचने लगे तो हर दिन फर्जीबाड़े के मामले परत दर परत निकलने लगे। यह देख हितग्राही आश्चर्यचकित हैं कि उन्होंने अभी तक दूसरा डोज लगवाया नहीं और कम्प्यूटर में कैसे फुली वेक्सीनेट हो गए। अधिकारी इस तरह की गड़बड़ी को मैन्युअल तकनीकी त्रुटि बताकर सामान्य मानकर चल रहे हैं। यही कारण है कि इस तरह का कथित फर्जीबाड़ा आज भी जारी है।
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इन उदाहरणों से उजागर हुआ फर्जीबाड़ा
केस : 01
जिले के बमूरिया निवासी रुबी धाकड़ (24) ने बताया कि उन्होंने पहला डोज 28 अगस्त को कबूलपुरा गांव में लगवाया था। इस दौरान उन्हें कोवीशील्ड की वैक्सीन लगाई गई थी। जिसका दूसरा डोज लगने की तिथि 20 नवंबर थी। इस तिथि पर वह दूसरा डोज लगवाने गईं तो मोबाइल पर ओटीपी नहीं आया, जिससे उन्हें वैक्सीन नहीं लग सकी। उन्होंने डेढ़ माह तक कई बार अलग-अलग सेंटर पर जाकर वैक्सीन लगवाने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं। कई जगह जानकारी लेने पर बताया गया कि आप स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर एक बाद देख लें। यहां आईं तो पता चला कि कम्प्यूटर में कोविन एप पर उन्हें 24 नवंबर को ही दूसरा डोज लग चुका है। सर्टिफिकेट निकालकर देखा तो उस पर लिखा था फुली वैक्सीनेट (दो डोज) तथा दूसरा डोज लगने का केंद्र धीनाखेड़ी सामने आया। यह केंद्र तो जामनेर क्षेत्र में है। जहां वह आज तक गई ही नहीं।
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केस : 02
धरनावदा थाना क्षेत्र के रुठियाई कस्बे के निवासी अंकित जैन ने बताया कि 25 दिसंबर को उनके पास फोन आया कि उन्हें दूसरा डोज लगना है। उन्होंने कहा कि अभी मैं बाहर हूं, वापस लौटकर लगवाता हूं। दो तीन दिन बाद जब वह सेंटर पर गए तो पता चला कि उन्हें तो पहले ही दूसरा डोज लग चुका है।
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केस : 03
रुठियाई निवासी विजय सिंह मीना की कहानी तो बिल्कुल ही चौका देने वाली है। क्योंकि उनका एक माह पहले एक्सीडेंट हो गया था। तब से ही वह घर पर बिस्तर पर ही पड़े हैं। शारीरिक रूप से वे कहीं आने जाने लायक नहीं थे। इसी बीच उनके बेटे के मोबाइल पर मैसेज आया तो वह देखकर चौक गया। क्योंकि पापा तो कहीं गए नहीं तो फिर दूसरा डोज कैसे लग गया।
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केस : 04
निजी संस्थान में नौकरी करने वाले देवेंद्र सैनी व पवनेश सेन की कहानी भी दूसरों से अलग नहीं है। इन्होंने पहला डोज तो अपने गांव मेंं ही लगवाया था लेकिन जब उन्हें मैसेज आया तब पता चला कि दूसरा डोज लग चुका है, वह भी ऐसे सेंटर पर जिस पर वे गए ही नहीं। पवनेश तो इस बात से खुश है कि पहले टीके में उसे बुखार आया था और दर्द हुआ था। अब जबकि दूसरे डोज का सर्टिफिकेट बिना लगवाए ही मिल गया तो फिर वह लगवाकर क्या करेगा।
एक्सीडेंट के बाद एक माह से घर पर पड़े फिर भी लग गया दूसरा डोज
एक्सीडेंट के बाद एक माह से घर पर पड़े फिर भी लग गया दूसरा डोज
एक्सीडेंट के बाद एक माह से घर पर पड़े फिर भी लग गया दूसरा डोज

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