scriptAfter the sterilization operation, women forced to lie on the ground i | अव्यवस्था और अमानवीयता की हद : नसबंदी ऑपरेशन के बाद कड़कड़ाती ठंड में खुले में जमीन पर लेटने को मजबूर महिलाएं | Patrika News

अव्यवस्था और अमानवीयता की हद : नसबंदी ऑपरेशन के बाद कड़कड़ाती ठंड में खुले में जमीन पर लेटने को मजबूर महिलाएं

शासन से मिले बजट को किया जा रहा खुर्दबुर्द, निजी और किराए के वाहनों से घर जाने को विवश महिलाएं
निर्धारित संख्या से ज्यादा बुलाते हैं महिलाएं, ऑपरेशन करने में करते हैं देरी
रात के समय नहीं मिलते साधन, जाएं तो कहां

गुना

Published: December 18, 2021 12:24:21 am

गुना. परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत इन दिनों आयोजित किए जा रहे नसबंदी कैंपों में अमानवीयता की हदें पार की जा रही हैं। ताजा मामला जिले के मधुसूदनगढ़ स्वास्थ्य केंद्र पर सामने आया है। जहां गुरुवार को लगाए गए नसबंदी कैंप में महिलाओं को परिसर में ही खुले आसमान के नीचे जमीन पर लेटने को मजबूर होना पड़ा। शिविर की अव्यवस्थाओं को देख महिलाओं सहित उनके परिजनों में काफी रोष देखा गया। उनका कहना था कि जब मरीजों को लिटाने बैड तो क्या जगह तक नहीं है तो फिर शिविरों का आयोजन क्यों किया जा रहा है। इतनी तेज ठंड में यदि किसी महिला की तबियत बिगड़ जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
जानकारी के मुताबिक सरकार परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत नसबंदी कैंपों के आयोजन को लेकर जरूरी सुविधाएं व व्यवस्थाएं जुटाने के लिए पर्याप्त बजट देती है। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग के पास महिलाओं को घर छोडऩे के लिए वाहन की सुविधा भी उपलब्ध है इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इन शिविरों में कोई भी इंतजाम नहीं कर रहे हैं। यह जमीनी हकीकत मधुसूदनगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार को आयोजित नसबंदी कैंप में देखने को मिली।
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इन बदइंतजामियों से शिविर में फैली अव्यवस्था
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि नसबंदी शिविरों के लिए ऐसे स्थान का चयन किया जाए जहां शिविर में आने वाली महिलाओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऑपरेशन से पहले उनकी सभी जरूरी जांचें आसानी हो जाएं तथा उन्हें नसबंदी के बाद लिटाने पर्याप्त व सही जगह हो। जहां उन्हें सर्दी न लगे। ओढऩे बिछाने के लिए पर्याप्त कपड़े हों। साथ ही उन्हें घर तक छोडऩे की जिम्मेदारी कैंप के आयोजक की है। इन सभी दिशा निर्देशों में से एक भी बिन्दु का पालन मधुसूदनगढ़ कंैप में नहीं दिखा।
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महिला व परिजनों ने ऐसे सुनाई पीड़ा
बांसखेड़ी से आई संतोष बाई ने बताया कि घर से बिना कुछ खाए सुबह 10 बजे मधुसूदनगढ़ अस्पताल पहुंच गए थे। दोपहर तक सभी जरूरी जांचें भी हो गईं। लेकिन जब पूछा कि ऑपरेशन कब होगा तब कहा गया कि 7 बजे। इतनी देर तक कैसे भूखा रहा जा सकता है, यह सोचने वाली बात है।
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्रग्राम महू से आए पवन राजपूत ने बताया वे अपने परिवार की महिला राजकुमारी को नसबंदी ऑपरेशन के लिए लाए थे। जैसे-तैसे दिन भर मशक्कत करते हुए जांच होने के बाद ऑपरेशन तो हो गया। लेकिन बाद में लिटाने जगह तक नहीं मिली। मजबूरी में अस्पताल के बाहर खुले आसमान में तेज ठंड के बीच जमीन पर ही लिटाना पड़ा।
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यह है शासन का प्रोटोकॉल
नसबंदी शिविरों के लिए शासन ने बकायदा प्रोटोकॉल निर्धारित किया है। जिसके अनुसार एक डॉक्टर एक कैंप में सिर्फ 30 ही नसबंदी ऑपरेशन कर सकता है। इसकी वजह भी साफ है। क्योंकि एक ऑपरेशन करने में 5 से 15 मिनट का समय लगता है। जो सर्जन ज्यादा अनुभवी होते हैं वे इससे कम समय में भी ऑपरेशन कर देते हैं। एक महिला के ऑपरेशन के बाद ओटी को इन्फेक्शन मुक्त करना होता है। इस काम में भी समय लगता है। लेकिन प्रति ऑपरेशन मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के चक्कर में अधिकांश डॉक्टर निर्धारित संख्या से ज्यादा ऑपरेशन कर देते हैंं। मधुसूदनगढ़ कैंप में 150 महिलाएं नसबंदी के लिए बुलाई गई थीं। जिनमें से 110 के ऑपरेशन किए गए।
ऑपरेशन से पहले सभी महिलाओं की बीपी, शुगर, यूरिन, प्रेग्नेंसी तथा अन्य जरूरी जांचें किया जाना जरूरी है। यदि किसी महिला के दो बच्चे सीजर से हुए हैं तथा जांच रिपोर्ट में किसी तरह की परेशानी सामने आती है तो उक्त महिला का ऑपरेशन नसबंदी कैंप में न कर उसे जिला अस्पताल रैफर किया जाता है ताकि उसे ऑपरेशन के बाद किसी तरह की दिक्कत होने पर उसे कंट्रोल किया जा सके। क्योंकि यह सुविधा नसबंदी कैंप में उपलब्ध नहीं रहती।
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घर तक छोडऩे की जिम्मेदारी कैंप आयोजक की
शासन नसबंदी कैंप में आने वाली महिलाओं के परिजनों के लिए रिफ्रेशमेंट के लिए 100 रुपए प्रति हितग्राही राशि देता है। वहीं नसबंदी ऑपरेशन के पश्चात महिलाओं को घर तक छोडऩे की जिम्मेदारी कैंप आयोजक यानी बीएमओ व स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी की है। यही नहीं ओढऩे बिछाने के लिए कपड़े उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। इस काम के लिए भी सरकार बजट देती है।
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ऐसे दृश्य देख हर कोई हुआ भावुक
मधुसूदनगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार को नसबंदी कैंप के दौरान जो दृश्य देखने को मिले, उसने सभी को अंदर झकझोर दिया। वहां मौजूद हर कोई न सिर्फ भावुक हो गया बल्कि शासन-प्रशासन को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सबसे पहले तो ऑपरेशन के बाद सभी महिलाओं को अस्पताल भवन के बाहर खुले आसमन के नीचे जमीन पर लेटना पड़ा। इस दौरान कैंप के आयोजकों ने ओढऩे बिछाने कपड़े तक उपलब्ध नहीं कराए। सबसे ज्यादा गंभीर बात तो यह थी कि जिन महिलाओं को ठंड से बचाना है उन्हें सर्दी के बीच छोड़ दिया गया। कई महिलाएं तो ऐसी अव्यवस्था देख किसी तरह ऑटो में लेटकर अपने घर पहुंची। इस दौरान उन्हें रास्ते में काफी दर्द सहना पड़ा। वहीं कई महिलाएं ऐसी भी थीं जो अपने छोटे दूध पीते बच्चों के साथ आई थीं। इन बच्चों को शिविर स्थल पर रखने में बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामन करना पड़ा। कुछ परिजन तो दो बाइकों के बीच कपड़ा बांधकर झूले में बच्चों को झुलाते देखे गए।
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