पिता की मौत से गुस्साए बेटे ने कोविड वार्ड में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर तोड़ा, सेंट्रलाइज ऑक्सीजन पाइप लाइन तोडऩे की कोशिश की

वार्ड बॉय और परिजन ने बेटे को पकड़ा तब जाकर मामला हुआ शांत
जिला अस्पताल के ट्रॉमा केअर सेंटर में बनाए गए कोविड वार्ड में हुई घटना

By: Narendra Kushwah

Updated: 02 May 2021, 12:29 AM IST

गुना. जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में शनिवार को ऐसी घटना घटित हुई है जिसने सभी को दुखी व चिंतित कर दिया है। पिता की मौत की खबर सुन बेटे ने आपा खो दिया और कोविड वार्ड के अंदर घुसकर न सिर्फ जमकर तोडफ़ोड़ की बल्कि डॉक्टर व स्टाफ से अभद्रता भी की। चिंताजनक बात तो यह है कि गुस्साए युवक ने गंभीर मरीजों के लिए बेहद जरूरी उपकरण ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर तोड़ दिया। यही नहीं वार्ड में लगी सेंट्रलाइज ऑक्सीजन लाइन भी तोडऩे का प्रयास किया। वह तो अच्छा हुआ कि वहां मौजूद वार्ड बॉय व परिजनों ने युवक को पकड़ लिया वरना और भी बड़ी घटना हो सकती थी। क्योंकि उक्त वार्ड में 8 गंभीर मरीज भर्ती थे। जो इस तरह की घटना को देख बेहद चिंतित नजर आए।
जिला अस्पताल से मिली जाननकारी के मुताबिक शहर की न्यू सिटी कॉलोनी निवासी 6 3 वर्षीय आरडी श्रीवास्तव को कोरोना पॉजिटिव होने के चलते कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार की देर रात उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। यह जानकारी जब वार्ड के बाहर बैठे उनके बेटे पवन श्रीवास्तव को शनिवार सुबह 5 बजे के करीब पता चली तो वह अपना आपा खो बैठा और सीधे ट्रामा केयर सेंटर में बने कोविड वार्ड में घुस आया और जोर जोर चिल्लाते हुए पिता के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए तोडफ़ोड़ करना शुरू कर दिया। इस दौरान उसने पिता के पलंग के पास रखा ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर को जमीन पर पटक कर तोड़ दिया। गद्दे चादर सहित पलंग को उठाकर गैलरी में फेंक दिया। जब ड्यूटी स्टाफ ने उसे ऐसा करने से रोकना चाहा तो उसने सभी से अभद्रता की। इतना सब करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा और उसने वार्ड में लगे सेंट्रालाइज ऑक्सीजन लाइन को भी तोडऩे का प्रयास किया। यह बेहद घातक कदम था। क्योंकि ऐसा करने से वहां भर्ती मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती थी। यह देखते ही वार्ड बॉय व परिजनों ने युवक को पकड़ा तब जाकर वह शांत हो सका।

वार्ड में भर्ती थे 22 मरीज, 8 ऑक्सीजन पर
जिला अस्पताल के जिस वार्ड में युवक ने हंगामा बरपाया उसमें कुल 22 कोविड मरीज भर्ती थे। इनमें से 8 ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। यदि उक्त युवक सेंट्रालाइज ऑक्सीजन लाइन को तोडऩे में सफल हो जाता तो सभी 8 गंभीर मरीजों की जान जा सकती थी। इस लिहाज से यह बहुत बड़ी घटना है। हालांकि युवक ने कंसंट्रेटर तोड़कर भी बहुत बड़ा नुकसान किया है। क्योंकि यह वह कीमती व जरुरी उपकरण है जो इस समय ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों के लिए जीवनदायिनी से कम नहीं है। इस समय इस उपकरण की बहुत ज्यादा जरूरत है। जो कहीं भी आसानी नहीं मिल पा रहा है। उपकरण के अभाव में पूरा नुकसान मरीज व परिजनों का ही है।
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हंगामा करने वाले युवक पर मामला दर्ज
कोविड वार्ड में तोडफ़ोड़ चिकित्सकीय पैरामेडिकल स्टाफ से अभद्रता करने वाले युवक पवन श्रीवास्तव पर सिटी कोतवाली पुलिस ने धारा 18 6 , 294 व 506 एवं मप्र चिकित्सक या चिकित्सा से संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा अधिनियम 2008 की धारा 3/4 भादवि के तहत मामला दर्ज कर लिया है।वहीं पुलिस ने आरोपी पवन को गिरफ्तार भी कर लिया है।
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अस्पताल की सुरक्षा पर सवाल
कोविड वार्ड सहित पूरे जिला अस्पताल में इस समय स्वास्थ्य सुविधाओं के जो हालात बने हुए हैं, उसमें इस तरह की घटनाएं होना आश्चर्यचकित कर देने वाली नहीं हैं। क्योंकि परिजन अपने मरीज को गंभीर स्थिति में लाता है और चिकित्सकीय स्टाफ से ज्यादा अपेक्षाएं होती हैं। संवादहीनता और पारदर्शिता न होने के कारण परिजन के मन में इलाज को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं बन रही। यही कारण है कि अपनो को खो देने के बाद वह आपा खो बैठता है। इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन ने प्रत्येक वार्ड के अलावा खासकर कोविड वार्ड में अलग से पुलिस की तैनाती की है। लेकिन कहीं न कहीं हॉस्पिटल प्रशासन की मामले को समझने को लेकर चूक हुई, जिसका परिणाम यह सामने आया है। उल्लेखनीय है कि इस समय कोविड वार्ड में हर दिन गंभीर मरीजों की मौतें हो रही हैं। ऐसे में असुरक्षा की भावना के बीच स्टाफ कैसे ड्यूटी कर पाएगा।
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इनका कहना है
कोविड वार्ड में मरीज के परिजन ने घटना घटित की है, वह बेहद दुखद व निंदनीय है। कोई भी चिकित्सकीय स्टाफ जानबूझकर लापरवाही नहीं करता। इस समय पूरा स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर परिवार को छोड़ मरीजों की जान बचाने में समर्पण भाव से लगा है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पूरे स्टाफ का मनोबल गिराती हैं। घटना के बाद स्टाफ काम करने को राजी नहीं था, मैंने उन्हें बहुत समझाया तब जाकर वह वापस काम पर लौटे हैं। हर किसी को मेडिकल स्टाफ के बारे में सोचना चाहिए कि वह कितने कठिन दौर में सेवाएं दे रहा है। इस तरह की घटनाएं होंगी तो नुकसान आम जनता का ही होगा, जो नहीं होना चाहिए।
डॉ सत्येंद्र भोला, प्रभारी सीएस
जिला अस्पताल

Narendra Kushwah Reporting
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