पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट : 20 साल से सड़क के इंतजार में बजरंगगढ़वासी

- स्वास्थ्य और पेयजल के हालात भी ठीक नहीं
- वर्षों बाद भी घरों तक नहीं पहुंच पाया नलजल योजना का पानी
- कुछ ग्रामीण कुओं से तो कुछ ट्यूबवैल से भरकर लाते हैं पानी

By: Narendra Kushwah

Published: 22 Jul 2021, 01:04 AM IST

गुना. सरकार शहर के साथ-साथ गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपए का बजट उपलब्ध करवा रही है। इसके बावजूद कई सालों बाद भी अधिकांश गांव मूलभूत सुविधाओं से महरूम बने हुए हैं। गांव में न तो चलने के लिए सुविधानजक सड़क है और न ही पेयजल के इंतजाम। स्वास्थ्य सुविधाओं के हालात भी बेहद चिंताजनक हैं। इन सभी समस्याओं से ग्रामीण इतने ज्यादा परेशान हो चुके हंै कि अब तो उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों को आवेदन देना तक छोड़ दिया है। गांवों में जैसे हालात हैं उन्हीं के साथ जीने की आदत डालने को मजबूर हो गए हैं ग्रामीण। हम बात कर रहे हैं जिले की सबसे बड़ी पंचायतों में से एक बजरंगगढ़ की। जो ऐतिहासिक व पुरातत्व महत्व की धरोहरों की वजह से प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के नक्शे पर भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यहां स्थित किला पुरातत्व विभाग की विरासत है। लेकिन पूरे बजरंगगढ़ की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हो गई हैं।
स्थानीय ग्राीमणोंं ने बताया कि बजरंगगढ़ गांव एक समय जिला मुख्यालय हुआ करता था। लेकिन यह उपलब्धि यहां से छिनने के बाद हालत गांव से बद्तर हो गए हैं। पंचायत भवन व जैन मंदिर के आसपास के इलाके को छोड़कर पूरे गांव में कहीं भी बीते 20 सालों से सड़क नहीं बनी है। यहां तक कि जिस एरिया में गांव का मुख्य बाजार व सब्जी मंडी है, वहां भी सड़क निर्माण आज तक नहीं कराया गया है। पूरे गांव में जगह-जगह गड्ढे होने होने से मार्ग ऊबड़-खाबड़ हालत में है। बारिश होने पर जल भराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं अन्य समय में धूल उडऩे की समस्या से जूझना पड़ता है।
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भूमि पूजन तो हुआ लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यूं तो बजरंगगढ़ में पिछले 20 सालों से मुख्य मार्ग की सड़क नहीं बनी है। ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत व मांग करने पर हाल ही में पंचायत मंत्री और विधायक की मौजूदगी में सड़क का भूमि पूजन तो कर दिया गया है। लेकिन 15 दिन बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। पंचायत स्तर पर ऐसी कोई गतिविधि भी नजर नहीं आ रही जिससे ऐसा लगे कि जल्द ही काम शुरू होगा। इस तरह के व्यवहार से ग्रामीण काफी नाराज हैं। क्योंकि जहां सबसे ज्यादा सड़क की जरूरत है वहां अभी तक सड़क नहीं डलवाई गई जबकि ऐसे इलाकों में सड़क महज 10 दिनों में ही डलवा दी गई जहां उसकी बहुत ज्यादा जरूरत नहीं है।
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पेयजल के लिए कोई कुआं तो कोई बोर पर निर्भर
सरकार पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नलजल योजना सहित ट्यूबवैल उत्खनन व हैंडपंप लगवाने के लिए हर साल भारी भरकम बजट प्रशासन को उपलब्ध करवाती है। इसके बावजूद यहां के ग्रामीण बारिश का मौसम तो छोडि़ए पूरे 12 महीने ही कुआं व ट्यूबवैलों से पानी भरकर ला रहे हैं। नलजल योजना कागजों में मंजूर तो है लेकिन धरातल पर उसका अस्तित्व कहीं नजर नहीं आता। नलजल योजना की पुरानी टंकी क्षतिग्रस्त होने के बाद नई टंकी अभी तक नहीं बनी है।
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स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन स्टाफ नहीं मिलता
गांव में इलाज के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो है लेकिन यहां स्टाफ बहुत कम मिलता है। ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह से भगवान भरोसे हैं। कोई भी अधिकारी यहां निरीक्षण नहीं आते हैं। जिससे स्टाफ को कोई डर नहीं रहता। डॉक्टर व अन्य स्टाफ के न मिलने से ग्रामीणों को प्राइवेट डाक्टर या फिर गुना जाकर ही इलाज करवाना पड़ता है।

Narendra Kushwah Reporting
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