निजी दुकानों से यूरिया की ब्लैक मार्केटिंग, किसान खाद को तरसे

28 स्थानों पर बांटा जा रहा है खाद

By: Mohar Singh Lodhi

Updated: 27 Nov 2019, 09:54 AM IST

गुना. जिले में यूरिया खाद का संकट फिर गहराने लगा है। खाद लेने सुबह से दुकानों पर किसानों की कतार लगने लग गई हैं। नानाखेड़ी मंडी परिसर स्थित मार्कफेड की दुकान और शहर की निजी दुकानों पर सुबह से भीड़ लगी रही। दिनभर की मशक्कत के बाद भी कई किसान खाद लेने से वंचित हो गए।


उधर, कुछ निजी दुकानों पर ब्लैक मार्केटिंग की जानकारी सामने आई है। इस संबंध में एक शिकायत विभाग के पास भी पहुंची है। गुना के अलावा कुंभराज में शिकायत मिली है। एक दिन पहले भी एक दुकानदार को नोटिस दिया गया था। लेकिन विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय नोटिस देकर खानापूर्ति कर रहे हैं।


उल्लेखनीय है कि जिले के करीब 3 लाख किसानों को 28 केंद्रों से खाद दिया जा रहा है। इनमें 7 मार्कफेड की दुकान और 21 निजी दुकानें हैं। निजी दुकानें पर कृषि विभाग के अधीन खाद का वितरण हो रहा है। इस साल गेहूं का रकबा बढऩे से खाद की डिमांड बढ़ गई है। उधर, एनएफएल प्लांट में दो इंजन बेपटरी होने से ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया है। इस वजह से प्लांट से खाद की सप्लाई नहीं हो पाई।


आधार दिखाने पर मिल रहा खाद
किसानों को किताब दिखाने पर मुश्किल से खाद मिल पाया। कृषि विभाग ने एक किसान को 5 से 10 बोरी खाद देने की व्यवस्था की है, लेकिन कई किसानों को 5-5 बोरी भी खाद नहीं मिल पाया। किसान मनोज धाकड़, रविंद किरार और हेमंत लोधा ने बताया, सुबह से कतार लगने के बाद भी पर्याप्त खाद नहीं मिल रहा है। हर दिन खाद लेने के लिए कतारों में लगना पड़ रहा है।


किसानों ने कहा-बारीक दाने की बजाय थमा दिया मोटे दाने का खाद
उधर, यूरिया की गुणवत्ता को लेकर किसान भड़क गए हैं। किसानों ने बताया कि उनको एनएफएल यूरिया प्लांट का खाद नहीं दिया गया। विजयपुर से आने वाला खाद बारीक है और जल्दी घुल जाता है। जबकि मोटा दाना वाला यूरिया खाद देरी से खुल रहा है। उधर, विभाग ने एक पत्र जारी कर किसानों को बताया कि दोनों तरह के खाद में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने किसानों को बताया कि बोवनी से लेकर सिंचाई तक एक हेक्टेयर में सवा दो क्विंटल यूरिया का इस्तेमाल किया जाए। इससे अधिक करने पर फसलों को नुकसान हो सकता है।


दुकानदार दे रहे सौ-सौ बोरी खाद
जिले में 21 दुकान प्राइवेट व्यक्तियों द्वारा संचालित हैं। यहां से यूरिया खाद का वितरण किया जा रहा है। लेकिन दुकानदार बड़े किसानों से सांठगांठ कर सौ-सौं बोरी खाद दे रहे हैं। इस वजह से जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल पाया और उनके द्वारा शिकायत की गई। शिकायत सामने आने के बाद भी कृषि विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है।


ये है मार्कफेड पर यूरिया की स्थिति
जिले में अब तक करीब 27 हजार मीट्रिक टन यूरिया आ चुका है। इसका वितरण किया जा रहा है। उधर, मार्कफेड ने अपने 7 भंडारण केंद्रों से माध्यम से 9367 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण कर दिया है। 4 हजार की डिमांड एनएफएल को भेजी है। इसमें 2500 हजार मीट्रिक टन खाद आना है। डीएमओ उपेंद्र गुप्ता ने बताया, दिसंबर के लिए हमने 10 हजार मीट्रिक टन की डिमांड भेज दी है। रिलीज आर्डर और नकद में खाद दिया जा रहा है।

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