ग्रामीण मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे झोलाछाप डॉक्टर

नोटिस देने तक सिमटी स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही
अंचल के स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं मिल रहा इलाज इसलिए झोलाछाप के सहारे

By: Narendra Kushwah

Published: 07 Mar 2020, 12:10 PM IST

गुना. जिले का स्वास्थ्य महकमा न तो सरकारी अस्पतालों में इलाज मुहैया करा पा रहा है और न ही झोलाछाप डॉक्टर्स की क्लीनिकों को आज तक बंद करा पाया है। यही कारण है कि ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराने को मजबूर हैं। यह झोलाछाप जानकारी के अभाव में ग्रामीण मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। अब तक कई झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण मरीजों की जान ले चुके हैं। यही नहीं इनकी क्लीनिकों से बड़ी मात्रा में ऐलोपैथिक दवाएं भी बरामद हो चुकी हैं। इनमें कुछ डॉक्टर की क्लीनिक पर तो सरकारी दवाएं तक मिल चुकी हैं। इतने बड़े पैमाने पर अनियमितता मिलने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा गंभीर नजर नहीं आ रहा है। कुल मिलाकर अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कार्रवाई सिर्फ नोटिस देने तक ही सीमित है।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने ग्रामीण जनता को गांव में सहज इलाज मुहैया कराने के लिए ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक व तहसील मुख्यालय पर स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए हैं। लेकिन इन पर पर्याप्त स्टाफ मुहैया न कराने तथा समय समय पर मॉनीटरिंग न होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसी मजबूरी के कारण ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टर्स की क्लीनिक पर इलाज कराने को मजबूर हैं। वहीं यह झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके स्वास्थ्य से लगातार खिलवाड़ कर रहे हैं। जिसके मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं।
-
घटना के बाद ही जागता है प्रशासन
बुधवार को पड़ौसी जिला अशोकनगर में जब झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से एक मरीज की मौत हो गई। मामला मीडिया के जरिए हाइलाइट हुआ तो गुना जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। इसी क्रम में कलेक्टर ने सीएमएचओ को निर्देशित किया और उन्होंने ड्रग इंसपेक्टर औपचारिकता निभाने ग्रामीण क्षेत्र में भेज दिया। गुरुवार को ड्रग इंसपेक्टर राधेश्याम बट्टी ने बमोरी विधानसभा के ग्राम पाटन में छापामार कार्यवाही करते हुए एक बंगाली क्लीनिक से डॉ सुखदेव बाला उर्फ भोला बंगाली को पकड़ लिया। क्लीनिक की छानबीन करने पर बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवा का संग्रहण मिला। जिसके बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया।
- मृगवास थाना क्षेत्र के ग्राम जोहरीपुरा में रामधन नामक मजदूर की मौत बीते माह झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के पश्चात हुई थी। परिजनों ने झोलाछाप का नाम परवेज खान बताया था। उनके अनुसार शाम करीब 6 बजे जब वह मजदूरी का काम कर रहा था तभी उसे बुखार आया तो वह पास ही में स्थित झोलाछाप डॉक्टर परवेज खान की क्लीनिक पर दवा लेने चला गया। उसने रामधन को एक गोली क्लीनिक पर ही खिला दी। जिसके बाद रामधन क्लीनिक से बमुश्किल 100 मीटर ही चल पाया था कि उसकी अचानक से तबियत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने रामधन के घरवालों को सूचना दी और फिर वे रामधन को लेकर परवेज खान की क्लीनिक पर पहुंचे लेकिन वह नहीं मिला। इधर रामधन की हालत देख परिजन उसे कुंभराज अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर ने जांच उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।
-
फतेहगढ़ क्षेत्र में मासूम बच्चे की जा चुकी है जान
फतेहगढ़ में एक झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मासूम बच्चे की मौत होने के बाद डॉक्टर के खिलाफ पुलिस ने गैर इरादन हत्या का मामला दर्ज कर लिया था। बताया गया था कि बच्चे की मौत झोलाछाप डॉक्टर के गलत इंजेक्शन की वजह से हो गई थी। इस घटना के बाद भी फतेहगढ़ क्षेत्र में दर्जन भर झोलाछाप डॉक्टर अभी भी सक्रिय बने हुए हैं।
-
गांव में ही नहीं जिला मुख्यालय पर भी हैं झोलाछाप
प्रशासनिक उदासीनता व अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी होने के कारण शहर सहित जिले भर में झोलाछाप डॉक्टर्स की क्लीनिक कुकुरमुत्तों की तरह संचालित हो रही हैं। लेकिन इन पर आज तक पूरी तरह से लगाम नहीं लग सकी है। खास बात यह है कि जिला मुख्यालय पर ही दर्जन भर से अधिक ऐसी क्लीनिक संचालित हो रही हैं, जहां डॉक्टर अपनी पैथी को छोड़ दूसरी पैथी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। लेकिन इनकी क्लीनिकों पर आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। शहर के हाट रोड, पुरानी छावनी तथा कैंट रोड पर कई क्लीनिक बिना बोर्ड के छोटे से कमरों में संचालित हो रही हैं।
मृगवास में दो दर्जन झोलाछाप सक्रिय
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक मृगवास में करीब दो दर्जन झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। जो गरीब ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हंैं। लेकिन स्वास्थ्य महकमा सबकुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त झोलाछाप डॉक्टर कहते हैं कि उनके तार आला अधिकारियों तक जुड़े हैं इसलिए उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा।
-
कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित
झोलाछाप डॉक्टर्स पर कार्रवाई करने सुप्रीम कोर्ट कई साल पहले शासन को आदेशित कर चुका है। इसी क्रम में शासन भी प्रशासन को लिखित में आदेशित कर चुका है। प्रशासन ने कार्रवाई को लेकर लिखित आदेश स्वास्थ्य विभाग को दे दिए लेकिन आज तक धरातल पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। हर साल स्वास्थ्य विभाग एक टीम गठित करता है, यह टीम कार्रवाई करने जाती भी है लेकिन अधिकांश मौकों पर खाली हाथ ही लौट आती है। कई बार सिर्फ झोलाछाप डॉक्टर्स को नोटिस देकर ही कार्रवाई की इतिश्री समझ ली जाती है। इसी तरह का सिलसिला लगातार जारी है।
-
यह है झोलाछाप की श्रेणी
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक वह डॉक्टर जो स्वास्थ्य विभाग में रजिटर्ड नहीं हैें। जिनके पास इलाज करने की उपयुक्त डिग्री या डिप्लोमा नहीं है। यही नहीं वे डॉक्टर भी झोलाछाप की श्रेणी में आते हैं जो अपनी पैथी छोड़ दूसरी पैथी में मरीज का इलाज करते हैं। जैसे कि ऐलोपैथिक डॉक्टर आयुर्वेद की दवा नहीं लिख सकता तो वहीं आयुर्वेदिक डॉक्टर ऐलोपैथिक दवा नहीं लिख सकता है।
-
क्लीनिक पर न पंजीयन न डिग्री चस्पा
नियमानुसार क्लीनिक चलाने के लिए न सिर्फ सीएमएचओ कार्यालय में पंजीयन होना अनिवार्य है। बल्कि क्लीनिक में पंजीयन नंबर सहित उपयुक्त योग्यता के दस्तावेज चस्पा होना जरूरी है। लेकिन जिला मुख्यालय पर ही दर्जनों क्लीनिक ऐसी चल रही हैं जहां कोई भी जरूरी सूचना अंकित नहीं है। ऐसी क्लीनिक कार्रवाई से बचना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही हैं।
-
जिम्मेदारों का हर बार एक ही जवाब
जिले भर में झोलाछाप डॉक्टर्स की क्लीनिक पर लगाम न लग पाने का कारण जब भी सीएमएचओ से पूछा जाता है तो वे हर बार एक ही जवाब देते हैं। हमने झोलाछाप डॉक्टर्स के खिलाफ छापामार कार्यवाही के लिए एक टीम अलग से बना ली है जो समय समय पर कार्रवाई करेगी। लेकिन उक्त झोलाछाप डॉक्टर्स को कहीं से हमारी सूचना मिल जाती है। जिसके कारण वे पहले ही क्लीनिक सील कर भाग जाते हैं। हमने संबंधित क्षेत्र के बीएमओ को झोलाछाप डॉक्टर्स की लिस्ट देने के लिए कहा है लेकिन उन्होंने नहीं दी। यही कारण है कि झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

Narendra Kushwah Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned