scriptChallenge for the urban body to implement the ban on 19 products made | सिंगल यूज प्लास्टिक से बने 19 उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को अमल में लाना नगरीय निकाय के लिए चुनौती | Patrika News

सिंगल यूज प्लास्टिक से बने 19 उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को अमल में लाना नगरीय निकाय के लिए चुनौती

मार्केट से न अब तक पुराना स्टॉक हटा और न विक्रेताओं पर विकल्प मौजूद
नपा अधिकारी बोले, कराएंगे सख्ती से पालन, पहली बार पकड़े जाने पर एक हजार तो दूसरी बार 5 हजार का जुर्माना
तीसरी बार पकड़े जाने पर दुकान को किया जाएगा सील, सजा में अर्थदंड के साथ कारावास भी हो सकता है
प्रतिबंध के आदेश को एक जुलाई से लाना है अमल में, दुकानदारों को पता ही पहीं कौन-कौनसे आइटम हुए बैन

गुना

Published: July 01, 2022 12:26:05 pm

गुना. सिंगल यूज प्लास्टिक से बने उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को एक जुलाई से नगरीय निकाय को सख्ती से पालन कराना है। लेकिन शहर में वर्तमान हालात को देखते हुए इस आदेश का ठीक से पालन कराना मुश्किल नजर आ रहा है। इसकी कई वजह सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां नगर पालिका द्वारा जागरुकता और प्रचार-प्रसार की कमी देखी जा रही है तो वहीं बाजार में प्रतिबंधित सामग्री का विकल्प न होना भी एक बड़ा कारण है। हालांकि नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि वे शहर के प्रत्येक वार्ड में चलने वाली डो-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाहन के जरिए एनाउंसमेंट करवाकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। वहींं बाजार में सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री के विकल्प के रूप में कागज की सामग्री आ चुकी है। धीरे-धीरे यह व्यवहारिक रूप ले लेगी। इसके लिए वह सख्ती से अभियान चलाकर चालानी व छापामार कार्रवाई भी अंजाम देंगे।
प्रशासनिक दावे के इतर बाजार में धरातलीय स्थिति क्या है इसे जानने के लिए पत्रिका टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर ग्राहक के रूप में असलियत की पड़ताल की। जिसमें सामने आया कि अभी भी कुछ ऐसे बड़े दुकानदार हैं जिनके पास प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का जखीरा मौजूद है। जिसे वह चोरी छिपे अभी भी ठिकाने लगाने में जुटे हुए हैं। वहीं कुछ दुकानदारों से जब सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को लेकर पूछा गया कि क्या आपको पता है कि एक जुलाई से कौन-कौनसे आइटम आप उपयोग में नहीं ला सकते। जिसके जवाब में उनका कहना था कि हमें पॉलीथिन के अलावा अन्य सामग्री की जानकारी नहीं है। वहीं एक आइसक्रीम विक्रेता ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी तो है लेकिन वर्तमान में डिस्पोजल का विकल्प मौजूद नहीं है। इसे लेकर वह ज्यादा चिंतित हैं। उनका कहना था कि 80 प्रतिशत दुकानदारी पैकिंग वाली है। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह ऐसे ग्राहकों को आइसक्रीम पैक करके कैेसे देंगे।
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सिंगल यूज प्लास्टिक से बने 19 उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को अमल में लाना नगरीय निकाय के लिए चुनौती
सिंगल यूज प्लास्टिक से बने 19 उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को अमल में लाना नगरीय निकाय के लिए चुनौती

आगे यह होना है
19 उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को मार्केट में सख्ती से अमल में लाने के लिए एक जुलाई से अभियान के रूप में कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इन आदेशों का उल्लंघन करने वाले सभी विनिर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों एवं विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी। नपा अधिकारी का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक से बनने वाले उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े पक्षों को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं। इनके अलावा स्टॉक रखने वालों, आपूर्तिकर्ताओं एवं वितरकों को भी इन उत्पादों के कारोबार से दूर रहने को कहा गया है।
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ये उत्पाद होंगे बैन
सिंगल यूज प्लास्टिक से बने 19 उत्पादों को इस पाबंदी के दायरे में रखा गया है। इनमें गुब्बारे, झंडे, कैंडी, आइसक्रीम में लगने वाली प्लास्टिक स्टिक, थर्माकॉल से बनी प्लेट, कप, गिलास, प्लास्टिक के चम्मच, कांटे, चाकू, तश्तरी के अलावा मिठाई के डिब्बों, निमंत्रण पत्र और सिगरेट पैकेट की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली फिल्म व 100 माइक्रॉन से कम के प्लास्टिक या पीवीसी बैनर भी शामिल हैं। इसके अलावा स्ट्रॉ (पेय पदार्थ पीने वाला पाइप), स्टिरर ( पेय पदार्थ घोलने वाली प्लास्टिक की छड़), इयर बड, प्लास्टिक के बर्तन, साज सज्जा में इस्तेमाल होने वाला थर्मोकोल शामिल है।
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व्यापारियों की मांग, स्टॉक खत्म करने कुछ मोहलत मिले
सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को लेकर व्यापारियों का कहना है कि चूंकि शादियों का सीजन समाप्ति की ओर है। व्यापारियों के पास कुछ स्टॉक भी शेष है। ऐेस में सरकार को सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए एक माह का समय स्टॉक खत्म करने के लिए देना प्रशंसनीय कदम होगा।
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हमें पुराने दिन याद करने चाहिए
आमजन को यह समझना और समझाना बेहद जरूरी है कि जिस सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकार प्रतिबंध लगा रही है, वह क्यों जरूरी है। इससे मानव जीवन सहित पर्यावरण को कितना ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है। जब यह बात लोग ठीक से जान जाएंगे तो स्वयं ही इसे उपयोग करने से बचने लगेंगे। जहां तक विकल्प का सवाल है तो इसके लिए हमें अपने पुराने दिन याद करना होंगे जब पॉलीथिन सहित अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक से बने मटेरियल उपयोग में ही नहीं थे। वर्तमान में हम रोजाना प्लास्टिक खा रहे हैं, पी रहे हैं और सांस के जरिए ले रहे हैं। यह कई सालों से हमारे पारिस्थितिकीय तंत्र, वन्यजीवन को खतरा पैदा कर रहा है। प्लास्टिक महज कूड़ा नहीं है बल्कि यह एक ऐसा जहरीला रसायन है, जिसके खिलाफ हमें समय रहते कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
डॉ अनिरुद्ध सेंगर, नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं साहित्यकार
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अनाधिकृत फैक्ट्रियों पर लगाम लगाना जरूरी
सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकार का प्रतिबंध स्वागत योग्य है। इस तरह की सामग्री पर्यावरण के साथ मानव के लिए भी बेहद हानिकारक है। इस आदेश का सख्ती से पालन होने पर जहां देश की छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयों में तालाबंदी होगी, वहीं लाखों कामकाजी लोग बेरोजगार हो जाएंगेे। इसलिए सरकार को यह कदम शनै : शनै उठाना चाहिए ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक पर निर्भरता कम होगी तथा विकल्पों के उत्पादों पर जोर देना जरूरी है। जिला प्रशासन प्लास्टिक बैन के नाम पर छोटे व्यवसायियों को निशाना न बनाए। उत्पादक पर ही सीधे कार्रवाई की जाए।
राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष
व्यापार एवं उद्योग महासंघ
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सिंगल यूज प्लास्टिक से बने करीब 19 उत्पादों को प्रतिबंधित किया गया है। इस आदेश को धरातल पर अमल में लाने एक जुलाई से ही अभियान के रूप में कार्रवाई की जाएगी। पहली बार पकड़े जाने पर एक हजार तो दूसरी बार में 5 हजार का जुर्माना किया जाएगा। यही नहीं तीसरी बार पकड़े जाने पर दुकान को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। याद रहे कि उल्लंघन करने पर सजा में अर्थदंड के साथ कारावास भी हो सकता है।
विवेक श्रीवास्तव, स्वच्छता निरीक्षक

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