जनता बोली 'पहले सफाई और बाद में हो स्वच्छता शुल्क'

बिना मंजूरी के स्वच्छता शुल्क वसूलने पर पार्षदों ने भी किया विरोध...

गुना@प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट...
जनता व दुकानदारों से नगर पालिका द्वारा स्वच्छता शुल्क वसूले जाने का आदेश पूरी तरह से असंवैधानिक है। साथ ही जनता से विभिन्न प्रकार का टैक्स वसूलने वाली नपा का यह फरमान जनता विरोधी है। नपा पहले ही जनता से टैक्स वसूलने के बाद वार्डों में सफाई नहीं करवा पाई है।

ऐसे में इस बात की क्या गांरटी है कि जनता से नया स्वच्छता शुल्क वसूलने के बाद सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी। यह कहना है नगर पालिका के वार्ड पार्षद, जनता व दुकानदारों का। दरअसल, नपा ने हाल ही में नया स्वच्छता शुल्क वसूलने की घोषणा की है।

जिसके तहत वार्डों में मकान मालिक व किराएदार से प्रतिदिन एक रुपए के हिसाब से 30 रुपए प्रति माह तथा दुकानदारों से 200 रुपए प्रति माह स्वच्छता शुल्क लिया जाएगा। खास बात यह है शुल्क वसूले जाने को लेकर अभी तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं।

जनता बोली 'पहले सफाई और बाद में हो स्वच्छता शुल्क की वसूली'

पार्षदों का भी यही कहना है कि उनके पास अभी तक इस संबंध कोई पत्र नहीं आया है इसलिए वे शुल्क की निर्धारित राशि को लेकर अधिकृत रूप से कुछ नहीं कह सकते हैं।

नपा द्वारा जनता व दुकानदारों से नया स्वच्छता शुल्क वसूलने जाने के फरमान को लेकर पत्रिका ने विभिन्न वार्डों के पार्षद, दुकानदार व जनता से उनका पक्ष जाना। कुछ पार्षदों ने परिषद की बिना मंजूरी के स्वच्छता शुल्क वसूले जाने को पूरी तरह से असंवैधानिक बताया।

वहीं कुछ ने इसे मौजूदा समय में गैर जरूरी बताया। उनका तर्क था कि पहले वार्डों में सफाई हो इसके बाद ही शुल्क लेना ठीक रहेगा।

शुल्क को लेकर किसी की हां तो किसी ने जताई नाराजगी
नपा द्वारा नया स्वच्छता शुल्क वसूले जाने का निर्णय सही नहीं है। क्योंकि जनता से तो पहले ही विभिन्न टैक्स के जरिए शुल्क लिया जा रहा है। इसके बाद भी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
- जितेंद्र ओझा, वार्डवासी

वार्ड में पहले ही सफाई ठीक ढंग से नहीं हो रही है। ऐसे में स्वच्छता शुल्क वसूलने के बाद सफाई ठीक से होगी इसकी क्या गारंटी है ? पहले से कई कॉलोनियों में विकास नहीं हो सका है।
- मुन्नीबाई, वार्डवासी

नगर पालिका पहले से ही दुकानदारों से शुल्क ले रही है। ऐसे में फिर से स्वच्छता शुल्क के रूप में 200 रुपए प्रति माह वसूला जाना औचित्यहीन है।
- अनिल अहिरवार, दुकानदार

कचरा फेंकने के लिए डस्टबिन नहीं रखवाए हैं। कचरा कलेक्शन गाड़ी नियमित रूप से व समय पर नहीं आती। दुकानदार कचरा का कहां डालें। जो डस्टबिन हैं, उनको खाली नहीं किया।
- राजू रजक, दुकानदार

सबसे बड़ा सवाल ये है कि नपा का हर महीने लाखों का बजट सफाई के नाम ठिकाने लगाती है। जब कलेक्टर ने अभियान चलवाया तो कचरा निकलने लगा। शुल्क वापस ली जाना चाहिए।
- दीपक सेन, दुकानदार


यह बोले जनप्रतिनिधि
परिषद व पीआईसी की मंजूरी के बिना मौखिक रूप से स्वच्छता शुल्क वसूला जाना पूरी तरह से असंवैधानिक है। यदि यह कदम लोकोपयोगी है तो विशेष सम्मेलन बुलाया जाना चाहिए था।
- वीरेंद्र शर्मा, पार्षद वार्ड-3

मकान मालिक व किराएदारों से प्रतिदिन एक रुपए के हिसाब से स्वच्छता शुल्क लिए जाने की बात सुनी है लेकिन इस तरह के आदेश अभी हमारे पास लिखित में नहीं आए हैं। स्वच्छता शुल्क लेने से व्यवस्था में सुधार हुआ तो यह कदम ठीक है।

- वंदना मांडरे, पार्षद वार्ड-4

स्वच्छता शुल्क वसूलने से व्यवस्था में सुधार आएगा इसकी कोई गारंटी नहीं है।सफाई में सबसे बड़ी बाधा संसाधनों की भारी कमी है। डस्टबिन, कचरा कलेक्शन गाड़ी कम होने की वजह से लोग कचरा जमीन पर फेंक देते हैं। इसके लिए नपा को काम करना चाहिए।
- दीपेश पाटनी, वार्ड-13

सफाई के लिए फंड की कमी नहीं है। नया शुल्क वसूले जाने का फरमान दुकानदार व जनता पर अतिरिक्त बोझ है। नपा पहले ही जनता से संपत्ति व हाउस टैक्स वसूल रही है फिर भी सफाई नहीं होती है।
- अंजना जाट, वार्ड-25

दुकानदारों से 200 रुपए प्रति माह स्वच्छता शुल्क वसूला जाना गलत है। जनता पहले से ही नपा को कई टैक्स दे रहे हैं।
- उर्मिला ओझा, पार्षद वार्ड 9

जनता के लिए एक रुपए प्रतिदिन स्वच्छता शुल्क ज्यादा तो नहीं है। यदि इस व्यवस्था से नपा की गाड़ी नियमित रूप से कचरा लेने आती है तो यह कदम ठीक है। जनता को सहयोग करना चाहिए।
- सुनील मालवीय, पार्षद वार्ड-23 नगर पालिका परिषद गुना

दीपेश तिवारी
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned