कलेक्ट्रेट से घोटाले की फाइल गायब

गेहूं की खरीदी में गड़बड़झाला, जांच के बाद में उजागर हुआ बड़ा घोटाला

By: brajesh tiwari

Published: 24 May 2018, 07:43 AM IST

गुना. गेहूं और चने की समर्थन मूल्य पर खरीदी के मामले में सोसायटी और कुछ अफसरों की मिली भगत से शासन को लाखों रुपए की चपत लगाई जा रही है। सिरसी खरीदी केन्द्र पर हुए गेहूंं के घोटाले की जांच एक टीम से कराई गई, जिसने अपनी रिपोर्ट में जमीन से अधिक पंजीयन कराने और गेहंूं की फसल न होने के बाद भी काफी मात्रा में गेहूं बचने का घोटाला उजागर किया।

इस सबके बाद भी सोसायटी प्रबंधक और दोषी व्यापारी व एक-दो अफसरों के विरुद्ध कार्रवाई करने की जांच टीम ने अनुशंसा भी की, इस सबके बाद भी अभी तक न तो उन दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है, इसकी वजह ये है कि जांच रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष पहुंचने से गायब हो गई है।

उधर किसानों के चने की अधिक तुलाई करके लगाई जा रही चपत की जांच हुई तो उसमें भी किसानों को ठगने का मामला प्रकाश में आया है। उक्त जांच टीम ने ह मालों द्वारा चोरी कर छिपाए जा रहे नौ क्विंटल चने को जब्त किया है। इस चोरी में सोसायटी प्रबंधक और कुछ ह मालों का हाथ बताया जा रहा है। इन दोनों मामलों का पत्रिका ने अलग-अलग दिन के अंक में प्रकाशित कर खुलासा किया था।


ऐसे पकड़ में आया
पत्रिका द्वारा हम्मालों द्वारा तुलाई करके किसानों को चने के नाम पर ठगी करने एवं मंडी में सुरक्षा न होने पर चना गायब होने का मामला प्रकाशित किया था। इस खबर पर कलेक्टर बी. विजय दत्ता ने तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव, सहकारिता उपायुक्त केके द्विवेदी, मंडी सचिव रियाज खान नानाखेड़ी मंडी पहुंचे, वहां उनको कट्टों में चोरी से दस क्विंटल चना भरा हुआ मिला। तहसीलदार के अनुसार इस चने को जब्त कर लिया है जल्द ही नीलाम किया जाएगा।


जांच के दौरान यह भी दिखी गड़बड़ी
जांच टीम ने यह पाया कि जिन व्यक्तियों ने जो पंजीयन करवाए हैं उनके पास भूमि रकबा तो उपलब्ध है परन्तु जिन सर्वे नम्बरों में फसल है इसका पंजीयन फार्म में उल्लेख ही नहीं हैं।


इस तरह किया गया था खुलासा
सेवा सहकारी समिति मर्यादित मारकी महू के नाम से सिरसी में गेहूं की तुलाई चल रही थी, जिसमें शहर के बड़े-बड़े धन्नासेठों और 12० किसानों ने 3 मई तक 7359 क्विंटल गेहूं का उपार्जन किया था। इसमें सबसे अधिक भूमिका समिति के सहायक प्रबंधक हरिओम भार्गव और उनके पुत्र मोनू महाराज उर्फ नंदकिशोर भार्गव, पूरन राठौर, जगदीश अग्रवाल आदि की रही, जिन्होंने दूसरे किसानों के नाम पर गेहूं खरीदी में फर्जीवाड़ा दिखाया खास बात ये थी कि इस फर्जीवाड़े का खुलासा पत्रिका ने किया था।


ये थे जांच समिति में शामिल
पत्रिका में छपी खबर को कलेक्टर बी. विजय दत्ता ने गंभीरता से लेकर मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई थी जिसमें नायब तहसीलदार कल्याण सिंह , सहकारिता निरीक्षक, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी आशीष चतुर्वेदी, पटवारी हल्का नम्बर दस मारकी महू ज्ञानेश मठकरी, पटवारी हल्का नम्बर 7 सिरसी राजेश बुनकर, पटवारी हल्का नम्बर सनवाड़ा सुधीर श्रीवास्तव को शामिल किया गया था। इस संबंध में कलेक्टर बी. विजय दत्ता ने कहा कि जांच कराई है, जल्द ही कार्रवाई करेंगे।


जांच रिपोर्ट में यह बात आई सामने
कृषक रामप्रसाद, राजाराम निवासी मारकी महू, बलवंत जाटव द्वारा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मारकी महू पर कोई पंजीयन नहीं कराया, और न ही फसल विक्रय की गई है। मोनू भार्गव ने जांच अधिकारियों को बताया कि उनके नाम से किसी भी प्रकार की भूमि नहीं हैं। कृषकों से भूमि बंटाई पर ली है।
सेवा सहकारी समिति मारकी महू का जिन कृषकों ने पिछले वर्ष गेहूं का पंजीयन कराया था वर्तमान वर्ष में भी पिछले पंजीयन अनुसार गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।

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