अभिभावकों का बजट बिगाड़ा,महंगे कोर्स व स्कूल संचालकों के कमीशन ने बढ़ाई टेंशन

अभिभावकों का बजट बिगाड़ा,महंगे कोर्स व स्कूल संचालकों के कमीशन ने बढ़ाई टेंशन

Deepesh Tiwari | Updated: 07 Jul 2019, 05:57:04 PM (IST) Guna, Guna, Madhya Pradesh, India

अच्छे स्कूलों ( School operators ) में बच्चों को पढ़ाना होता जा रहा है मुश्किल...

गुना। महंगे कोर्स ने अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है। स्थिति यह है कि पहली से आठवीं तक का कोर्स चार हजार से पांच हजार रुपए ( Course rate ) तक मिल रहा है। इस वजह से जहां अभिभावकों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा रही है।

वहीं उनके लिए अच्छे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। इस स्थिति के लिए पूरी तरह से निजी स्कूल संचालकों ( school operators ) की मनमानी व कमीशनखोरी जिम्मेदार है।

स्कूल संचालक कक्षा केजी से आठवीं तक लगभग सभी किताबें निजी पब्लिशर्स ( publishers ) की चला रहे हैं। इस दौरान स्कूल, अभिभावकों को बुरी तरह आर्थिक ( Budget ) नुकसान पहुंचा देेते हैं। कक्षा नौवीं से 12वीं तक का कोर्स इसलिए महंगा नहीं है, क्योंकि यहां एनसीईआरटी ( NCERT ) की किताबें चलती हैं। अभिभावकों की मांग है कि सभी स्कूलों में पहली कक्षा से ही एनसीईआरटी ( NCERT ) का सिलेबस लागू किया जाए।

निजी स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक की कॉपी-किताबें जरूरत से ज्यादा महंगी हैं। क्योंकि बुक डिपो, बुक सेलर और स्कूल संचालक ( School operators ) के बीच 40 से 60 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जा रहा है, इसकी मार अभिभावकों की जेब पर पड़ी रही है।

कमीशन के लिए निजी प्रकाशकों की चलाते हैं किताबें!
अभिभावक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि कमीशन के चलते स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें चलाते हैं। देश भर के सीबीएसई स्कूलों में एक जैसी किताबें होनी चाहिए ताकि अगर स्कूल भी बदला जाए तो अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

साथ ही बच्चों का मानसिक विकास भी एक जैसा होगा, क्योंकि वे एक जैसा कोर्स पढ़ रहे हैं। लेकिन निजी स्कूल ऐसा नहीं करते हैं।

स्कूल बैग की रेट : 150 से 2 हजार रु...

नये स्कूल बैग के साथ स्कूल जाना बच्चों को भले ही खुश कर रहा हो, लेकिन पढ़ाई का खर्च पालकों के लिए सहन करना मुश्किल हो रहा है।

नर्सरी से केजी कक्षा तक पिछले साल लगने वाला चार हजार रुपए का खर्च इस बार लगभग छह हजार हो गया है। क्योंकि कोर्स के साथ साथ स्कूल बैग भी बहुत महंगे हो गए हैं। अलग अलग ब्रांड के बैग 150 रुपए से लेकर 2 हजार रुपए तक में उपलब्ध हैं।

 

सरकारी आदेश : सिर्फ कागजों में...

सरकार भले ही निजी स्कूलों के विद्यार्थियों पर थोपे जाने वाले खर्चों पर नियंत्रण करने की बात कहती है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों की बुक सेलर से सांठगांठ अभिभावकों पर भारी पड़ती नजर आ रही है।

निजी स्कूल संचालक बच्चों के माध्यम से अभिभावकों को चिन्हित दुकान से ही कोर्स खरीदने को विवश कर रहे हैं। यही कारण है कि अभिभावकों की भीड़ शहर की कुछ चुनिंदा दुकानों पर देखी जा रही है।

बुक डिपो पर भी एकाधिकार की स्थिति
निजी स्कूलों की किताबें चुनिंदा बुक डिपो पर उपलब्ध हैं। बाजार में अन्य दुकानों पर यह नहीं मिल रहीं और अगर मिल भी जाएं तो पूरा कोर्स नहीं मिलता। इस कारण अभिभावकों को मजबूरी में इन्हीं दुकानों से कोर्स खरीदना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

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