न संरक्षण देने वाले बचेंगे और न कोई निर्दोष फंसेगा, कानून हाथ में लेने का कोई भी न करे प्रयास

शफीक खां की हत्या के मामले में ठोस कार्रवाई हो
मुस्लिम समाज बोला, हथियार बदल दिए, विवेचना से हम संतुष्ट नहीं, एसआईटी से कराई जाए जांच
-एसपी ने विवेचना अधिकारी बनाया टीआई मालवीय को, मॉनीटरिंग करेंगे एएसपी और सीएसपी,

 

By: praveen mishra

Published: 03 Jul 2021, 12:31 AM IST

गुना। पिछले दिनों सिटी कोतवाली अंतर्गत बोहरा कॉम्पलेक्स पर मुस्लिम समाज व जिला वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद शफीक कुरैशी उर्फ काले खां की हत्या के केस की विवेचना में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विवेचना किसी उच्च अधिकारी से कराने एवं एसआईटी से जांच कराने की मांग मुस्लिम समाज द्वारा एसपी से शुक्रवार को मिलकर की गई।
पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मंडल और शफीक के परिजनों को भरोसा दिलाया कि इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई होगी। शफीक के हत्या की साजिश करने और हत्या के आरोपियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे।हथियार जो जब्त किए हैं वे सही हैं। दूसरे आरोपी अभी फरार हैं उनसे भी हथियारों के संबंध में पूछताछ की जाएगी। एसपी ने उस प्रतिनिधि मंडल के आग्रह पर और ज्ञापन में शामिल मांग पर तत्काल कार्रवाई की और विवेचना अधिकारी जो अभी तक उप निरीक्षक श्रीराम तिवारी थे, जिन पर मृतक पक्ष द्वारा दबाब में विवेचना करने का आरोप लगाया जा रहा था, उनकी जगह सिटी कोतवाली के प्रभारी एमएम मालवीय को विवेचना अधिकारी बनाया और इस विवेचना की मॉनीटरिंग एएसपी टीएस बघेल और सीएसपी आकाश अमलकर करेंगे।
शास्त्री पार्क बना रहा पुलिस छावनी
इससे पूर्व शास्त्री पार्क को शाइन पार्क बनाकर वहां काले खां को श्रृद्धांजलि देने का कार्यक्रम कुछ लोगों द्वारा रखा जा रहा था, शाइन पार्क नाम देने पर भाजपा के कुछ नेताओं ने आपत्ति की, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा और सक्रिय हुए और उन्होंने कहा कि गुना में धारा 144 लगी हुई है, कोई भी कानून को अपने हाथ में न लेने का प्रयास करे। सुरक्षा बतौर शास्त्री पार्क, तहसील आदि पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। वहां श्रृद्धांजलि सभा कार्यक्रम स्थगित होने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने एसपी ऑफिस पहुंचकर ज्ञापन देने का निर्णय लिया।
हनीफ के कई पुलिस वालों से संबंध
इस ज्ञापन देते हुए बताया कि काले खां की हत्या एक साजिश के तहत हुई है। शुरुआती पांच दिनों में थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने इस अपराध की विवेचना अपराध की गंभीरता के हिसाब से न करते हुए बेहद सतही ढंग से की है। हत्या का
फरार आरोपी हनीफ मोहम्मद, थाना सिटी कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर है, जिसके कई पुलिसवालों से करीबी सम्बन्ध हैं। ऐसा दिखाई पड़ रहा है कि इसमें जानबूझकर ऐसी कमियां छोड़ी जा रही हैं जिससे भविष्य में जब प्रकरण कोर्ट में सुनवाई पर आए तो अभियोजन की कहानी में विरोधाभास और तथ्यों का लोप होने से आरोपियों को संदेह का लाभ मिल जाए और वो बरी हो जाएं।
ज्ञापन में ये कहा
- पुलिस ने आरोपी रानू पुत्र हनीफ और बाबू पुत्र एहसान से घटना के बारे में कोई ठोस पूछताछ नहीं की बल्कि थाने में मेहमानों की तरह बैठा कर पूछताछ की खानापूर्ति भर की। पुलिस ने दोनों आरोपियों का रिमांड लिए बिना ही जेल भेज दिया है। जबकि पुलिस को आरोपियों का रिमांड लेकर फरार आरोपियों के पता ठिकाने और हत्या की साजिश में शामिल अन्य आरोपियों के बारे में पूछताछ करना थी। आरोपियों को पिस्तौल कट्टे जैसे हथियार किसने दिए इस बात का भी पुलिस ने अभी तक की विवेचना में पता लगाने का प्रयास नहीं किया है और आरोपियों को जेल पहुंचा दिया है। जिससे लगता है कि विवेचना को जान बूझ कर प्रभावित किया जा रहा है। इस बात का भी कोई ठोस प्रमाण नहीं जुटाया गया है कि पुलिस द्वारा थाने में आरोपियों से जप्त बताए जा रहे हथियार चालू हालत में नहीं हैं जिनसे आरोपियों ने हत्या की है। इस ज्ञापन में फरियादी व फरियादी पक्ष के साक्षियों के कोरे कागजों पर तथा छपे हुए पत्रकों के कॉलम भरे बिना ही दस्तखत कराए जा रहे हैं। कैमरों के वीडियो फुटेज भी अभी तक जब्त नहीं किए गए हैं।
पहले गेट पर ज्ञापन सौंपा, बाद में की एसपी से चर्चा
मुस्लिम समाज ने एसपी ऑफिस पर पहुंचकर एएसपी टीएस बघेल को एक ज्ञापन सौंपा, इसके बाद एक प्रतिनिधि मंडल पुलिस अधीक्षक के चेम्बर में पहुंचा जहां उनको भी ज्ञापन देकर अपनी पीड़ा बताई। शहर काजी नूर उल्ला युसूफ जही, मृतक शफीक के परिजनों के अलावा मुस्लिम समाज के कई लोग उपस्थित थे।

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