कोरोना कफ्र्यू ने बिगाड़ा रसोई का बजट, किराने के साथ-साथ सब्जियों और फलों के बढ़े दाम

महंगाई डायन खाय जात है
-सिलेण्डर भी महंगा, माल न आने की बात कहकर मनमाने दाम पर बेचने लगे किराने का सामान,प्रशासन ने जारी किए होम डिलेवरी के लिए फोन नम्बर

By: praveen mishra

Published: 20 Apr 2021, 12:54 AM IST

गुना। जहां एक ओर कोरोना की मार सह रहे हैं तो दूसरी और कोरोना कफ्र्यू लागू हो गया है, यह 27 अप्रैल की सुबह छह बजे तक चलेगा। इस कोरोना कफ्र्यू में पूर्व में किराना की दुकानों को सुबह छह से दस बजे तक खोलने की अनुमति दी थी। लेकिन जिला दंडाधिकारी के नए आदेश में किराना की दुकानें बंद रहेंगी। केवल वे होम डिलेवरी ही कर पाएंगे। बीते वर्ष कोरोना काल में होम डिलेवरी तत्कालीन कलेक्टर ने व्यवस्था लागू कराई थी, लेकिन जनता को किराने का सामान रेट की अपेक्षा दुगुने भाव में मिला था। कोरोना कफ्र्यू के लागू होने के बाद किराने के सामान में महंगाई पूर्व की अपेक्षा दुगुनी हो गई है। कोरोना कफ्र्यू की आड़ में मुनाफाखोरी भी गुना शहर समेत जिले भर में तेजी से बढऩे लगी है। अब तो लोग खुलकर कहने लगे हैं कि मंहगाई डायन खाय जात है।
कोरोना के बाद कोरोना कफ्र्यू ने जनता की परेशानी को दोगुना कर दिया है। जान है तो जहान है का पालन करते हुए लोग घरों में तो कैद होने लगे हैं। लॉकडाउन की बंदिशों ने एक बार फिर से महंगाई व कालाबाजारी बढ़ा दी है। जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पर पड़ रहा है। किराना सामान सहित फल, सब्जियां महंगी हो गई हैं। विक्रेताओं का कहना है कि उनके पास जो पुराना स्टॉक है, उसे ही बेच रहे हैं। अभी नया सामान नहीं मिल पा रहा है।


गुना की जनता ने पत्रिका को बताया कि लॉक डाउन में बढ़ोत्तरी न हो जाए, इसके लिए जो दाल 1०० और 1०5 बिक रही थी, उसके गुना के दुकानदारों ने मुनाफा कमाने के उद्देश्य से 115-12० रुपए प्रति किलो बेची। इसी तरह जो तेल 14० रुपए चल रहा था, वह अब 155-16 ० रुपए तक बिक रहा है। बिस्कुट, आटा समेत अन्य सामग्री भी मनमाने भाव पर बेची जा रही है। कुछ व्यापारियों का कहना था कि लॉक डाउन दूसरे शहरों में लग गया है, वहां से सामान ट्रांसपोर्ट कराकर मंगाने में परेशानी आएगी। वहीं कुछ लोगों ने बताया कि महंगाई का तो ये हाल है कि रसोई गैस सिलेण्डर जो पूर्व में सात सौ रुपए में आता था वह अब 8 8 1 रुपए में आ रहा है। ऐसे ही फलों के दामों में देखा जाए तो आम, अंगूर, अनार जैसे फलों के दाम भी कोरोना कफ्र्यू के दाम की अपेक्षा पांच से दस रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है।

प्रशासन ने जारी किए होम डिलेवरी के लिए नम्बर
कोरोना कफ्र्यू के दौरान बनाए गए कन्टेन्मेन्ट जोन वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को घर बैठे ही सामान मिल जाए, इसके लिए होम डिलेवरी की व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत गुना शहर के 37 वार्डोँ में डेयरी और किराना व्यवसायियों के नाम व पते की सूची जारी किए हैं, इन पर फोन लगाकर कोई भी किराना या डेयरी से सामान मंगा सकता है। इसके साथ ही ऐसे नम्बर जारी करके कहा है कि वे लोग उन नम्बरों पर फोन करके किराना सामग्री, डेयरी सामग्री, दवाई और हरी सब्जी मंगा सकते हैं। फिलहाल प्रशासन ने उन्हीं क्षेत्रों को चुना है जहां कोरोना पॉजीटिव मरीज बहुतायत संख्या में निकले हैं। प्रशासन द्वारा जारी सूची में कुछ वार्ड रह गए हैं जहां होम डिलेवरी की सूची जारी नहीं हो पाई है।
एक नजर यहां भी
सामग्री प्रति किलो- कोरोना कफ्र्यू से पहले और अब
सरसों तेल- 1४०-155-16 ०
तुअर दाल- 1०5-115-12०
काबुली चना- 8 5-95-1००
चना दाल- 6 ०-75-8 ०-8 5
शक्कर- 36 -38 -4०
मसूर- 8 ०-8 5-9०
मूंग छिलका- 9०-1००-1०5
उड़द छिलका- 9०-1००-1०5
सोया रिफाइंड- 14०-15०
पोहा- 3०- 35-4०
आटा- 12०- 13०-135
ऐसे बिकी फुटकर में सब्जी
सब्जी- कोरोना कफ्र्यू से पहले और अब
बैगन-2०-२०- 35-4०
प्याज- 12-14- 18 -2०
कद्दू- 15-16 18 -2०-
नीबू- 12०-13०- 14०-15०
भिंडी- 2०-25-35-4०-
पत्ता गोभी- 18 -2०- 2०-25
टमाटर- 15-15- 2०-25
आलू- 1०-12- 15-2०
खीरा- 2०-25-25-3०-5
करेले- 15-2० -25-3०
तोरई- 18 -2०-45-5०- 15-2०
जरा इनकी भी सुनो
-कोरोना संक्रमण को रोकने प्रशासन जो कदम उठा रहा है, वह ठीक हैं। लेकिन ज्यादा बंदिशों से यदि जनता को परेशानी होती है तो उसे कम करने वैकल्पिक इंतजाम भी प्रशासन को करना चाहिए। जब किराना व्यवसायियों के पास नया माल नहीं आएगा, डिमांड बढ़ेगी तो निश्चित रूप से जमाखोरी व महंगाई बढ़ेगी। इसका असर गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार पर ज्यादा पड़ेगा।
राघव गुप्ता, किराना व्यवसायी
-कोरोना की चैन तोडऩे लॉकडाउन जैसे सख्त फैसले लेना जरूरी है। जनता भी इसे भलीभांति समझ रही है और घर के अंदर रहकर प्रशासन का पूरा सहयोग कर रही है। लेकिन घर के अंदर बिना भोजन के कोई व्यक्ति कब तक रह सकता है। शहर की इतनी बड़ी आबादी में हर वर्ग यानि कि मजदूर वर्ग होम डिलेवरी के जरिए सामान मंगाने में सक्षम नहीं है। यही नहीं वह जिस इलाके में रहता है वहां ज्यादातर दुकानदार होम डिलेवरी की सुविधा नहीं देते हैं।
देशराज नागरिक

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