दलालों के चंगुल में RTO कार्यालय: न टेस्ट ना ट्रायल, एजेंट को 3500 रुपए दो और स्थायी ड्रायविंग लाइसेंस ले लो

दलालों के चंगुल में RTO कार्यालय: न टेस्ट ना ट्रायल, एजेंट को 3500 रुपए दो और स्थायी ड्रायविंग लाइसेंस ले लो

Deepesh Tiwari | Updated: 23 Aug 2019, 12:15:53 PM (IST) Guna, Guna, Madhya Pradesh, India

- पैसा नहीं दिया तो टेस्ट व ट्रायल में कर देते हैं फेल...

- यहां नहीं चलते नियम-कायदे...

- दो दलालों का स्टिंग...

गुना@प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट...

मध्य प्रदेश के आरटीओ RTO विभाग को दलालों के चंगुल से आजाद कराने के तमाम दावों के बीच भी लगातार यहां फैले दलालों के जाल की आवाज साफ सुनाई देती है।
इन्हीं सब बातों को देखते हुए लोगों का भी मानना है कि यदि आपको ड्रायविंग लाइसेंस बनवाना है, तो इसके लिए आपको आरटीओ कार्यालय में एजेन्टों का सहारा ही लेना पड़ेगा। बगैर उनके लर्निंग लाइसेेंस बनवाना आसान नहीं हैं।

बताया जाता है कि एजेन्ट बगैर लाइसेंस का आवेदन करने वालों को आरटीओ के बाबू टेस्ट और ट्रायल में फेल करने पर आमादा हैं। कुल मिलाकर ये है आरटीओ कार्यालय में आजकल एजेन्ट का जमकर बोलबाला है, जिसकी वजह से बगैर दलाल के लाइसेंस बनवाने वालों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

दरअसल, प्रदेश सरकार ने तय किया है कि लर्निंग लाइसेंस बनवाने वाले को ऑन लाइन आवेदन के साथ-साथ तय फीस 500 रुपए जमा करना होंगे। हैवी लाइसेेंस के लिए 1100 रुपए लगेंगे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच आरटीओ कार्यालय में होगी, उसके बाद टेस्ट और ट्रायल होगा, पास होने पर ही संबंधित आवेदक का लर्निंग लाइसेंस मिल जाएगा, इसके एक माह बाद दो पहिया या चार पहिया वाहन चलाने के लिए लाइट लाइसेंस मिल जाएगा।

यही प्रक्रिया हैवी लाइसेंस बनवाने की है। लर्निंग लाइसेंस परीक्षण प्रक्रिया में यह भी अंकित है कि पूरी प्रक्रिया के अंतर्गत दस प्रश्न पूछे जाएंगे एवं हर प्रश्न के तीन विकल्प होंगे। टेस्ट के 24 घंटे बाद आप अपना लर्निंग लाइसेंस परिवहन विभाग की बेवसाइट के माध्यम से प्रिंट कर सकते हैं।

यहां नहीं चलते नियम-कायदे :

प्रदेश सरकार के नियम हैं कि आरटीओ कार्यालय परिसर के अंदर एजेन्ट किसी किस्म के नहीं बैठेंगे। लेेकिन गुना आरटीओ कार्यालय परिसर के अंदर अस्थाई निर्माण कर एजेन्टों की दुकानें सजी हुई दिखाई दीं।


ये लगाना होंगे दस्तावेज
-आधार कार्ड
-वोटर कार्ड
-दसवीं की मार्कशीट
-दो फोटो

ये दिखा नजारा
पत्रिका टीम गुरुवार को दोपहर तीन बजे करीब आरटीओ कार्यालय पहुंचीं, तो इस कार्यालय परिसर के अन्दर जगह-जगह एजेन्ट बैठे हुए दिखे, चार पहिया वाहन जिस पर ऑन लाइन आरटीओ सर्विस लिखा हुआ था, उनमें सारी सुविधा थी, जिन पर लोग एकत्रित दिखाई दिए। कार्यालय में अन्दर जाकर देखा तो एक बाबू दलालों से चर्चा में मशगूल थे। आरटीओ रवि बारोलिया अपनी सीट पर दिखाई नहीं दिए।

ऐसे हुआ दो दलालों का स्टिंग : sting operation-
पत्रिका ने जब आरटीओ के एजेन्ट रविन्द्र आरटीओ के मोबाइल पर लाइसेंस बनवाने के लिए स पर्क साधा तो उनसे की बातचीत के अंश...


पत्रिका: मुझे ड्रायविंग लाइसेंस बनवाना है।
रविन्द्र: बन जाएगा, किस चीज का चाहिए, दो पहिया, चार पहिया या ट्रेक्टर का ...

पत्रिका: ट्रेक्टर का बनवाना है, कितने पैसे और दस्तावेज लगेंगे
रविन्द्र: बन जाएगा, आपको आधार कार्ड, वोटर कार्ड, मार्कशीट और दो फोटो देना होंगे।

पत्रिका: पैसे कितने लगेंगे।
रविन्द्र: 3500 रुपए देना होंगे। इसमें दो हजार रुपए अभी और 1500 रुपए बाद में देना होंगे।

पत्रिका: ट्रायल और टेस्ट के लिए आरटीओ कार्यालय आना होगा।
रविन्द्र: आ जाना आप तो, ट्रायल में फेल तो नहीं कर देंगे, चिंता मत करो, हम सब सेटिँग कर लेंगे।

पत्रिका: अभी आ जाओ, पैसे दो, जल्दी दे देंगे।

 


दूसरे आरटीओ एजेन्ट वंशी के मोबाइल पर संपर्क साधा तो उन्होंने यूं बताई प्रक्रिया...

पत्रिका: लर्निंग लाइसेंस बनवाना है। इसमें क्या करना होगा
वंशी: बन जाएगा, इसमें आपको दस्तावेज पूरे देना होंगे।

पत्रिका: खर्चा कितना आएगा।
वंशी: आप तो मार्कशीट, आधार कार्ड, वोटर कार्ड , दो फोटो दे दो, पैसे तो बाद में बता देंगे।
पत्रिका: पैसा बता दो, दस्तावेज साथ में भेज देंगे।

वंशी: आप तो दस्तावेज लेकर भेज दो, पैसे यहीं आ जाना हम बता देंगे।

( नोट: एजेंटों से बातचीत की रिकार्डिंग पत्रिका के पास उपलब्ध है। )

केस : 1
पुरानी गल्ला मंडी के पास रहने वाले बल्ला बताता है कि वह ऑटो चलाता है, उसने लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑन लाइन आवेदन किया, जब वह आरटीओ कार्यालय गया, जब उसे दलाल बगैर देखा तो टेस्ट में फेल कर दिया। दुबारा जब वह दलाल के माध्यम से गया तो न टेस्ट हुआ ओर न ट्रायल लिया, दो दिन में लर्निंग लाइसेंस बनाकर दे दिया। बस उसे 3000 रुपए खर्च करना पड़े।

केस : 2
भार्गव कॉलोनी निवासी सुनील किरार अपनी पीड़ा बताते हैं कि मैं कई बार आरटीओ कार्यालय गया, लेकिन अपना लाइसेंस नहीं बनवा पाया, वहीं एक दलाल के माध्यम से आरटीओ कार्यालय गया, वहां दलाल ने पूरी कार्रवाई कराकर मुझे लाइसेंस बनवाकर दे दिए। इसके बदले जरूर मुझे दलाल को 3500 रुपए देना पड़े।

कोई भी काम कराओ पैसे तो देना ही पड़ेंगे
आरटीओ कार्यालय में आने वाले कुछ लोगों से पत्रिका ने चर्चा की तो अलग-अलग राय निकलकर आई । इनमें से एक झागर से आए बीके किरार का कहना था कि मुझे ट्रेक्टर-ट्राली के लिए लाइसेंस बनवाने के लिए दलालों ने अलग-अलग रेट बताई।

मैंने ऑन लाइन आवेदन किया। आरटीओ कार्यालय पहुंचने पर पहले मुझे ट्रायल में फेल कर दिया, जब वहां मैंने आरटीओ कार्यालय में पदस्थ एक महिला कर्मी से ट्रायल में पास करने को लेकर चर्चा की, तब काम हुआ। वहीं इस मामले में आरटीओ रवि बारोलिया का कहना था कि दलालों का प्रवेश पूरी तरह बंद है,अधिक पैसे लेने पर कार्रवाई की जाएगी।

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