जिस मामले को सीएम ने गंभीरता से लिया उसमें 5 दिन बाद भी प्रशासन नहीं लगा सका कोई सुराग

समिति प्रबंधक की संपत्ति कुर्क करने बैंक के बाहर जाहिर सूचना लगाकर की इतिश्री
2 करोड़ 20 लाख के चना खरीदी घोटाले में पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई सुस्त
भुगतान को लेकर आज भी भटक रहे किसान
वर्ष 2018 में बमोरी विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने बेचा था 5 हजार क्विंटल चना

By: Narendra Kushwah

Published: 12 Feb 2021, 09:53 PM IST

गुना. किसानों के फायदे के लिए सरकार द्वारा शुरू की गईं योजनाओं को उनके मतहत ही पलीता लगा रहे हैं। इसकी ताजा नजीर बमोरी विधानसभा क्षेत्र से सामने आई है। यहां के सहकारी समिति प्रबंधक की देखरेख में तीन साल पहले सैैकड़ों किसानों से 5 हजार क्विंटल चना खरीदा गया। लेकिन तीन साल बाद न तो खरीदे गए चना का कोई अता पता है और न ही बेचने वाले किसानों को उपज का पूरा भुगतान आज तक हो पाया है। यह कथित घोटाला 2 करोड़ 20 लाख का सामने आया है। इस मामले में सहकारिता विभाग सहित पुलिस व प्रशासन को अभी तक कोई कामयाबी हासिल नहीं हो सकी है। तीन साल बाद भी कथित घोटाले की इस स्थिति ने जिम्मेदार अधिकारियों के साथ खरीदी में शामिल लोगों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं दो फरवरी के अंक में पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद इस मामले को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लेते हुए संज्ञान में लिया है। साथ ही किसानों को उनकी उपज का भुगतान कराने के निर्देश प्रशासन को दिए हैं। लेकिन अब तक संबंधित विभाग सिर्फ आरोपी की संपत्ति कुर्क करने जाहिर सूचना ही चस्पा करा सका है।
जानकारी के मुताबिक सरकार द्वारा शुरू की गई भावांतर योजना के तहत वर्ष 2018 में बमोरी विधानसभा क्षेत्र के करीब एक सैकड़ा किसानों ने अपनी चना की उपज जिला मुख्यालय पर गोपालपुरा मैदान में बनाए गए उपार्जन केंद्र पर बेची थी। जिसके बाद अधिकांश किसानों के खाते में एक दो किश्त के रूप में ही कुछ राशि आई। जब काफी समय पश्चात भी भुगतान नहीं हुआ तो किसानों ने स्थानीय स्तर से लेकर कलेक्ट्रेट जाकर आला अधिकारियों को लिखित में शिकायत कर मामले से अवगत कराया। लेकिन मामले में उचित कार्रवाई नहीं हो सकी। यही कारण है कि यह घोटला तीन साल बाद भी अनसुलझा बना हुआ है। न तो किसानों से खरीदे गए 5 हजार क्विंटल चने का पता चल सका है और न हीं भुगतान की जाने वाली 2 करोड़ 20 लाख की राशि का।
बताया जाता है कि यह पूरी खरीदी समिति प्रबंधक सतीश बैरागी की देखरेख में हुई। कागजों में जितना चना खरीदना बताया जा रहा है उतना वास्तविक रूप से खरीदा नहीं गया। हम्माल ने जो पर्ची उपार्जन केंद्र पर तैनात कम्प्यूटर ऑपरेटर को दे दी, उसने उसी आधार पर कप्म्यूटर पर चने की मात्रा दर्ज कर दी। इसी आधार पर भुगतान की जाने वाली राशि सामने आई है। जो किसानों को अभी तक नहीं मिली। पीडि़त किसानों ने पत्रिका को मामले से अवगत कराया। जिसके बाद पत्रिका ने दो फरवरी के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए वीडियो कान्फ्रेंस के दौरान गुना प्रशासन को आदेशित किया कि इस मामले को दिखवाएं कि आखिर किसानों का भुगतान अभी तक क्यों नहीं आया। जिसके बाद प्रशासन ने संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर दिए और विभाग ने औपचारिक कार्रवाई करते हुए समिति प्रबंधक की संपत्ति कुर्क करने के लिए जाहिर सूचना स्थानीय बैंक कार्यालय के बाहर चस्पा करा दी। जिसमें कहा गया है कि ग्रामजन से अनुरोध है कि सतीश बैरागी के पास चल-अचल संपत्ति की जानकारी उपलब्ध हो तो संस्था कार्यालय बमोरी को उपलब्ध कराएं ताकि आगामी कार्यवाही की जा सके। लेकिन अभी तक विभाग समिति प्रबंधक से जुड़ी से कोई जानकारी हासिल नहीं कर सका है।
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2 करोड 20 लाख के घोटाले के आरोपी पर पक्का मकान तक नहीं !
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक 5 हजार क्विंटल चना खरीदी के मामले में जिस समिति प्रबंधक सतीश बैरागी पर 2 करोड 20 लाख रुपए के घोटाले का आरोप है। वह मूलत : बमोरी विधानसभा क्षेत्र के फतेहगढ़ थाना अंतर्गत झिरी गांव का रहने वाला है। यहां गांव बावड़ीखेड़ा पंचायत में आता है। गांव में जो घर बना है वह कच्चा है जबकि खेत पर सिर्फ झोंपड़ी है। सूत्रों का कहना है कि उसके पास इतनी संपत्ति भी नहीं है कि उसकी कुल कीमत 5 लाख हो सके।
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खास खास (2 करोड़ 20 लाख का घोटाला)
वर्ष 2018 में 5 हजार क्विंटल चना की खरीदी हुई
3 साल बाद भी किसानों को पूर्ण भुगतान नहीं
8 अप्रैल 2019 को सहकारिता विभाग ने थाने में शिकायत की
एफआईआर 1 साल बाद 27 जनवरी 2021 को दर्ज हुई
वर्ष 2019 में समिति प्रबंधक को एसडीएम ने धारा 151 में जेल पहुंचाया
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यह बोले जिम्मेदार
5 हजार क्विंटल चना खरीदी का जो घोटाला सामने आया है, यह हमारी जानकारी में तो है। लेकिन वर्तमान में इस मामले में क्या प्रोसेस हुई है, इसकी जानकारी हमें नहीं है। इस बारे में वहां के शाखा प्रबंधक ही बता पाएंगे।
मुकेश जैन, उपायुक्त सहकारिता विभाग

Narendra Kushwah Reporting
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