यहां का भी एफओबी जर्जर, हर दिन निकल रहे ५ हजार यात्री, दुर्घटना का डर


रैम्प भी नहीं, शुरू नहीं लिफ्ट का काम, यात्रियों को नहीं मिल रही सुविधाएं

गुना. ये है गुना का रेलवे स्टेशन। यहां भी एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) बना हुआ है। यह भी काफी पुराना हो गया है, जो कई जगह से चटकता हुआ दिखाई दिया। इस पर ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब ये पचास साल पुराना फुट ओवरब्रिज पर कहीं भोपाल ओवर ब्रिज जैसा हादसा न हो जाए।५० साल पुराने इस ब्रिज के ऊपर से हर दिन ५ हजार से ज्यादा यात्री गुजरते हैं।
इतना ही नहीं रेलवे लाखों रुपए यात्रियों को सुविधाएं दिलाने का दावा करती है, लेकिन यहां न तो दिव्यांगों के लिए रैम् प है और न लिफ् ट का अभी तक काम शुरू हो पाया है। यहां न तो साफ-सफाई नजर आती है और न यात्रियों को बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था है। गुना रेलवे जंक्शन जिला मुख्यालयों के रेलवे स्टेशनों में महत्वपूर्ण है। गुना स्टेशन से मुंबई, दिल्ली, जयपुर और जबलपुर और इंदौर जैसे बड़े शहरों को जोड़ता है। यहां यात्रियोंको सुविधाएं, व्यवस्थाओं को पत्रिका टीम ने रेलवे स्टेशन का भ्रमण कर देखा तो लेकिन यहां भी सुविधाओं का अभाव दिखाई दिया। उधर, १७ फरवरी को डीआरएम अशोकनगर से गुना का निरीक्षण करने आ रहे हैं।
रेलवे स्टेशन पर तीसरी आंख भी बंद
रेलवे स्टेशन पर प्लेट फार्म की मॉनीटरिंग के लिए १६ सीसीटीवी कैमरा लगाए थे। लेकिन सभी कैमरा लंबे समय से बंद पड़े हैं। कई बार शिकायत की जा चुकी हैं। फिर भी कैमरों को चालू करने रेलवे गंभीर नहीं दिखा। जबकि स्टेशन पर आए दिन घटनाएं होती हैं। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया गया। यहां जीआरपी के कैमरा भी लंबे समय तक बंद पड़े रहे। चोरी की घटना और बच्चों के किडनैपिंग की घटनाओं पर अंकुश लगाने जिला पुलिस बल ने मॉनीटरिंग के लिए जीआरपी के कैमरा चालू करवाए हैं, पर रेलवे अब तक अपने कैमरा चालू नहीं कर पाया।
हर दिन १० ट्रेन हो रही हैं प्रभावित
उधर, कोटा के पास रेल लाइन पर काम चलने की वजह से इन दिनों १० ट्रेनों का रूट प्रभावित है। तीन एक्सप्रेस और एक पैसेंजर को निरस्त किया है, जबकि ६ ट्रेनों का रूट बदल दिया है। इसके अलावा भोपाल इंटरसिटी और ग्वालियर से बीना जाने वाली पैसेंजर भी निरस्त है। इस कारण से यात्रियों को ट्रेन नहीं मिल रही हैं। बीते साल इन दिनों ट्रेन से सफर करने वालों की संख्या ६३०० थी, जबकि इस शुक्रवार को २८०० यात्री यहां से विभिन्न स्थानों के लिए रवाना हुए। यहां हर दिन तीन हजार यात्री कम आ रहे हैं। इससे रेलवे को भी काफी घाटा हो रहा है। इस रूट पर १९ तक १० ट्रेनें प्रभावित रहेंगी।
बैठने तक नहीं कुर्सियां कई जगह नहीं छांव
गुना स्टेशन का दो साल पहले ही विस्तार किया है। लेकिन यहां पर बैठने पर्याप्त कुर्सी नहीं लगाई हैं। जहां कुर्सी लगी हैं, वहां पर छांव नहीं हैं। धूप और बारिश में यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा स्टेशन पर टिकट के लिए लंबी कतार लगती हैं। दो टिकट वेंडिंग मशीन होने के बाद भी एक लंबे समय से बंद रहती है। इसके अलावा यहां पर बोगी डिस्प्ले भी चालू नहीं हैं। इस कारण ये पता नहीं चल पाता कि ट्रेन की कौन सी बोगी कहां हैं। ट्रेन में बैठने दौडऩा-भागना पड़ता है।
न रैम्प और ना ही लिफ्ट का काम शुरू
रेलवे स्टेशन पर प्लेट फार्म एक से दो और तीन पर जाने कोई रैम् प नहीं है। विकलांगों, महिला, बच्चों और बुजुर्गों को एक प्लेट फार्म से दूसरी पर जाने में दिक्कत होती है। यात्रियों ने बताया, एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज कम समय का होता है। ऐसे में अचानक ट्रेन आती है और पहले से ऐलान नहीं किया जाता है। यात्रियों को अचानक प्लेट फार्म बदलना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग व विकलांग गिरते-गिरते बचते हैं। यहां दो लिफ्ट लगाने भूमिपूजन किया गया, लेकिन १५ दिन बीत जाने के बाद भी अब तक लिफ्ट का काम शुरू नहीं हो पाया।
&साफ सफाई का अभाव है। बैठने के लिए कुर्सी नहीं हैं। जहां कुर्सी हैं, वहां छांव नहीं है। टिकट के लिए कतार लगती हैं। इस वजह से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
-राहुल जोशी, यात्री
&भोपाल में एफओबी गिरा है। गुना का ब्रिज भी जर्जर है। यहां विकलांगों को रैम्प नहीं है। व्हील चेयर भी नहीं है। ट्रेनों के डिस्प्ले बोर्ड भी चालू नहीं हो पाए।
-रामलाल पुरवैया, यात्री

Mohar Singh Lodhi
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