बैंक प्रबंधन का शुल्क वसूलने पर ध्यान ग्राहकों की सुविधा पर नहीं

बिना सुरक्षा गार्ड के संचालित हो रहे अधिकांश एटीएम

By: Narendra Kushwah

Published: 07 Mar 2020, 11:48 AM IST

गुना. सरकार एक तरफ जहां डिजीटलाइजेशन को बढ़ावा दे रही है। वहीं बैंक प्रबंधन तकनीकी प्रणाली का विस्तार करती जा रही है। लेकिन इस व्यवस्था में ग्राहकों की सुविधा का ख्याल कतई नहीं रखा जा रहा है। जिसके कारण ही हर दिन लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। वहीं बैंक प्रबंधन ग्राहकी की गलती बताकर अपनी जिम्मेदारी से दूर भाग रहा है। शहर सहित जिले भर में सरकारी व निजी बैंकों द्वारा एटीएम बूथ तो स्थापित कर दिए गए हैं लेकिन ग्राहकों की सुविधा के लिए इन पर सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किए गए हैं। जिससे लोगों को जरुरत के समय आवश्यक जानकारी नहीं मिल पाती और अनजान व्यक्ति से मदद लेेने के लिए विवश होकर ठगी का शिकार हो रहे हैंं। चिंताजनक बात है कि ठगी के शिकार ग्राहकों की मदद न तो बैंक प्रबंधन कर रहा है और न ही पुलिस।
जानकारी के मुताबिक नगरीय क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक के ही करीब 20 एटीएम हैं। इनमें से सिर्फ बैंक शाखा वाले एटीएम पर ही सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। शेष एटीएम सुरक्षा गार्ड विहीन बने हुए हैं। खास बात यह है कि अधिकांश एटीएम बूथ ऐसे हैं जो एकांत में हैं। जहां वास्तविक रूप से सुरक्षा गार्ड की जरुरत है। लेकिन बैंक प्रबंधन ने यहां गार्ड तैनात नहीं किए हैं। जिसके कारण एकांत इलाके वाले एटीएम बूथ अव्यवस्था का शिकार बने हुए हैं। कई एटीएम ऐसे हैं जिनके की-पैड से लिखाबट तक गायब हो चुकी है। गेट टूटे हुए हैं, अंदर गंदगी पड़ी हुई है। उपभोक्ता की सहायता के लिए जरूरी हेल्पलाइन नंबर भी नहीं लिखे गए हैं।
-
इन घटनाओं के बाद भी नहीं लिया सबक
- बूढ़े बालाजी स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी शिक्षक अजय सिंह सेंगर ने बताया कि वह 7 दिसंबर की सुबह 10 बजे शहर के बोहरा मस्जिद के पास स्थित एटीएम बूथ से 5 हजार रुपए निकाले। अगले दिन गए तो पता चला कि खाते में रकम ही नहीं है। बैंक जाकर जानकारी ली तो पता चला कि किसी ने दिल्ली के किसी एटीएम से दो बार में 29 हजार रुपए निकाल लिए। ठगी का दूसरा मामला भी इसी एटीएम बूथ पर मुकेश ओझा के साथ घटित हुआ। उन्होंने बताया कि 5 दिसंबर को इसी एटीएम से पैसे निकाले थे। जिसके बाद उनके खाते से दो बार में 20 हजार रुपए निकल गए। तीसरा शिकार शंभू गिरि हुए। जिनके खाते से तीन बार में 24 हजार 500 रुपए शिवपुरी के एटीएम से निकाल लिए गए।
- मधुसूदनगढ़ निवासी सरकारी शिक्षिका रिंकू साहू ने बताया कि 8 नवंबर को एक एटीएम से पैसे निकाले थे। जिसके बाद 10 नवंबर को जब मैं मधुसूदनगढ़ के एटीएम से पैसे निकालने गई तो पता चला कि उनके खाते से पैसे निकले हैं। बंैक जाकर खाते की डिटेल्स निकलवाई तो सामने आया कि दो बार में पानीपत के एटीएम से 40 हजार रुपए निकले हैं। जिसकी शिकायत थाने में करने गई तो पहली बार में तो पुलिस ने रिपोर्ट न लिखते हुए मुझे ही इसके लिए दोषी ठहराया गया।
-
उपभोक्ता को सुरक्षा मुहैया कराना बैंक प्रबंधन की जिम्मेदारी
इस समय शहर सहित जिले भर में अधिकांश एटीएम बिना गार्ड के ही संचालित हैं। बैंक प्रबंधन ने इन एटीएम बूथों को प्राइवेट कंपनी को ठेके पर देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। जबकि उपभोक्ताओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की है। लेकिन एटीएम बूथ का संचालन संभालने वाली प्राइवेट कंपनी बीमा कराकर अपने आपको सुरक्षित कर लेती है। वहीं असुरक्षित एटीएम बूथ का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। वहीं एटीएम बूथ में लगे कैमरे भी उपभोक्ताओं की मदद में कोई काम नहीं आ पा रहे हैं।
-
क्या है कार्ड क्लोनिंग
कार्ड क्लोन, एक ऐसा टर्म है जिसके जरिए जालसाज किसी डेबिट कार्ड का क्लोन (डुप्लीकेट) बना लेते हैं। हर डेबिट कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है जिसमें अकाउंट से जुड़ी सभी जानकारी सेव रहती है। जालसाज स्कीमर नाम के एक डिवाइस का इस्तेमाल कार्ड क्लोनिंग के लिए करते हैं। इस डिवाइस को कार्ड स्वैपिंग मशीन में फिट कर दिया जाता है और कार्ड स्वाइप होने पर यह कार्ड की डिटेल्स को कॉपी कर लेती है। इनमें अकाउंट से जुड़ी सभी जानकारी शामिल रहती है। कॉपी किया गया डेटा एक इंटरनल मेमरी यूनिट में स्टोर हो जाता है।
एटीएम के कीपैड में जब कोई यूजऱ अपने कार्ड का पिन एंटर करता है तो ओवरले डिवाइसेज के जरिए कार्ड के पिन को रीड कर लिया जाता है। इसके बाद जालसाज इन डिटेल्स के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। कुछ डिवाइसेज ऐसी होती हैं तो पिन ***** कैमरे के साथ आती हैं और ये एटीएम से पिन को कॉपी कर लेती हैं।
-
एटीएम बूथ में जाने से पहले यह जांच लें
एटीएम से रकम निकालने से पहले जांच लें कि कोई स्कीमर तो नहीं है। स्वैपिंग पॉइंट के अगल-बगल हाथ लगाकर देखें। कोई वस्तु नजर आए तो सावधान हो जाएं। स्कीमर की डिजाइन ऐसी होती है कि वह मशीन का पार्ट लगती है। कीपैड का एक कोना दबाएं। अगर पैड स्कीमर होगा तो एक सिरा उठ जाएगा। मौजूदा समय में जरूरी है कि डेबिट कार्ड का पिन बदल दें। इससे जालसाजों के जाल में फंसने से बच सकते हैं।
-
यह भी रखेें सावधानियां
- ईमेल में मिले लिंक पर न करें क्लिक
- किसी मैसेज में मिले ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल पेमेंट ऐप या शॉपिंग वेबसाइट के लिंक पर क्लिक न करें।
- ऑनलाइन बैंकिंग या शॉपिंग के लिए पब्लिक वाई फाई और असुरक्षित इंटरनेट से बचें। ऐसा करने से जानकारी हैक होने का खतरा रहता है।
- ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स या फिर नेट बैंकिंग के लिए हमेशा मजबूत पासवर्ड ही चुनें। जैसे कि अगर पासवर्ड में अपरकेस व लोअरेकस के साथ स्पेशल करेक्टर का इस्तेमाल करते हैं तो सुरक्षा के लिहाज से बेहतर रहेगा।

Narendra Kushwah Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned