एक हजार रुपए दो, मृत्यु, आय, जन्म और जाति का प्रमाण पत्र बनवा लो!

तहसील और एसडीएम कार्यालय में चल रहा प्रमाण पत्रों का फर्जीवाड़ा

By: Manoj vishwakarma

Published: 19 Mar 2020, 02:01 AM IST

गुना. लंबे समय से फर्जी जाति और आय प्रमाण पत्र बनाने वालों का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह द्वारा यहां आने वाले भोले-भाले लोगों को एक हजार रुपए से 5000 रुपए लेकर फर्जी जाति और आय प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। इसको लेकर पत्रिका ने कुछ समय पूर्व जिला प्रशासन को खबर के जरिए चेताया था, जिसमें एक कम्प्यूटर ऑपरेटर पर गाज गिरा दी थी, लेकिन इस गिरोह में शामिल लोग उस समय कार्रवाई से बच गए थे।

ऐसा ही एक मामला बुधवार को उस समय आया जब जाति प्रमाण पत्र तस्दीक के लिए एसडीएम शिवानी रायकवार के पास पहुंचा, उनकी नजर में अपने ही हस्ताक्षर नकली लगे। उन्होंने इस प्रमाण पत्र को फर्जी माना और इस तरह के प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह के एक सदस्य को कोतवाली पुलिस के हवाले कराया। फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वालों के गिरोह में तहसील, लोक सेवा केन्द्र और बाहरी लोग शामिल है।

यहां बना प्रमाण पत्र

तहसील कार्यालय में कुछ समय पूर्व आयुषी शर्मा का एक आय प्रमाण पत्र बना है, उसमें भी एसडीएम शिवानी रायकवार के नकली हस्ताक्षर मिले। इसको नायब तहसीलदार सोनू गुप्ता ने पकड़ा। कुल मिलाकर ये दोनों प्रमाण पत्र फर्जी निकले।

इन प्रमाण पत्रों में फर्जी की पकड़ जारी होने की तिथि 28 अप्रैल 2०2० डलना एवं उस प्रमाण पत्र के शब्द असली प्रमाण पत्र से कुछ अलग मिले। जानकारी मिली है कि अभी तक जारी हुए फर्जी प्रमाण पत्रों में शिवानी रायकवार के डिजीटल हस्ताक्षर नकली होना भी दिखाई दिए। जिस पर एसडीएम का कहना था कि वह नकली हस्ताक्षर को लेकर आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराएंगीं।

ये है प्रक्रिया

आपको जाति या आय प्रमाण पत्र बनवाना है तो उसको भरकर लोक सेवा केन्द्र में तीस रुपए की फीस समेत जमा करना होगी। यह प्रमाण पत्र जांच उपरांत अधिकतम सीमा 45 दिन में आवेदक को मिल जाएगा। इसमें दस्तावेज के रूप में सारी कागजी कार्रवाई करना आवेदक को अनिवार्य होगी। इसके बाद प्रमाण पत्र बन जाता है।

ये है मामला

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार गुना निवासी कुलदीप गुर्जर को पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र की जरूरत थी, वह प्रमाण पत्र बनवाने तहसील आया, जहां उसे प्रदीप ठाकुर नामक युवक मिल गया, उसने बताया कि एक हजार रुपए में यह प्रमाण पत्र बनाकर दे देंंगे। ठाकुर ने उससे एक हजार रुपए लिए और यह प्रमाण पत्र जल्द से जल्द बनवाने की बात कही। कुलदीप गुर्जर यह प्रमाण पत्र लेने आया तो उसे अभी नहीं बनने की बात कहकर चलता कर दिया। इसकी शिकायत एक-दो लोगों ने एसडीएम शिवानी रायकवार से की कि तहसील में पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाण पत्र उनके नकली हस्ताक्षरों से जारी हो रहे हैं। इसकी जांच-पड़ताल में उन्होंने एक टीम बनाई, इस टीम की पकड़ में प्रदीप ठाकुर आ गया, जिसको एसडीएम रायकवार के समक्ष लाया गया। एसडीएम कार्यालय में मौजूद प्रदीप ठाकुर ने इस मामले को रहस्य खोला, बार-बार एक ही बात कहता रहा कि क्या मैं ही बनाता हूं, कौन बनाता है और कौन हस्ताक्षर करता है, यह सबको मालूम है, मुझे ही क्यों फंसाया जा रहा है। उसने यह रहस्य खोला कि अभी तक ऐसे 45 प्रमाण पत्र जारी हो गए हैं। एसडीएम के आदेश पर उसको कोतवाली पुलिस के हवाले कराया।

Manoj vishwakarma Desk
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