कलेक्टर से बच्चियों की गुहार 'हमें पढ़वा दीजिए, क्लेक्टर अंकल'

जनसुनवाई में पहुंचीं मदद की आशा से, बोलीं- माता-पिता नहीं हैं, ताऊ को नहीं मिलता पर्याप्त वेतन...

गुना@प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट...
स्कूल ड्रेस में दो छोटी बच्चियां। कलेक्टर के सामने हाथ जोड़कर कर बोल रहीं थीं कलेक्टर अंकल। हमारे मम्मी-पापा दोनों ही नहीं हैं, ताऊ को इतना वेतन नहीं मिलता कि वो हमको पढा लें। आप हमें पढ़वा दीजिए।

पैसे के अभाव में हमको कई बार भूखे भी सोना पड़ता है। यह कहना था मोहनी और शिवानी कुशवाह का। यह दोनों बच्चियां अपने ताऊ के साथ जनसुनवाई में एक आवेदन लेकर कलेक्टर से मदद की गुहार करने कलेक्ट्रेट पहुंची थीं।

मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। जनसुनवाई में ज्यादातर आवेदन राशन कार्ड बनवाने, कुटीर बनवाने और जमीनी मामलों को लेकर आते हैं।

मंगलवार को जनसुनवाई मेें गुलाबगंज केंट गुना निवासी नीलम सिहं कुशवाह के साथ मोहनी ओर शिवानी आईं। उन्होंने कलेक्टर अंकल से मदद मांगते हुए कहा कि वे दोनों पढऩा चाहती हैं, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते पढ़ाई-लिखाई कर पाना संभव नहीं हैं।

बच्चियों ने सुनाई व्यथा: बच्चियों ने बताया कि उनके माता-पिता की मृत्यु कुछ समय पहले हो गई है, पेशे से मजदूर हरवीर सिंह की मृत्यु 25 अक्टूबर को मजदूरी का कार्य करते समय श्रीराम कॉलोनी गुना में बिजली के करंट लगने से मौत हो चुकी है, इससे पूर्व हरवीर की पत्नी यानि उनकी मां का भी निधन हो चुका है।

हरवीर सिंह मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन यापन करता था। बच्चियों के साथ आए उनके ताऊ ने बताया कि कमाई का कोई जरिया न होने से इन बच्चियों को पढ़ाने में मुश्किल हो रही है। शिवानी पांचवीं क्लास में और मोहनी तीसरी क्लास में पढ़ती है।

हम करना चाहते हैं माता-पिता का नाम रोशन: बच्चियों से जब पत्रिका ने चर्चा की तो उन्होंने बताया कि वे केवल पढऩा-लिखना चाहती हैं, पढ़-लिखकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हैं। लेकिन उनकी कोई भी मदद नहीं कर रहा है।

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दीपेश तिवारी
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