शासन ने कार्यालयीन समय बदला, अब सुबह 10 बजे ऑफिस पहुंचना अनिवार्य

पत्रिका लाइव : रजिस्ट्रार कार्यालय सहित कलेक्ट्रेट से जिम्मेदार गायब
- कार्यालय प्रमुख अधीनस्थ स्टाफ को निर्देश देकर खुद पालन करना भूले

By: Narendra Kushwah

Updated: 09 Apr 2021, 12:11 AM IST

गुना. कोरोना काल में सरकारी विभागों के कामकाज का ढर्रा बिगड़ता ही जा रहा है। कार्यालयीन समय पर न तो जिम्मेदार अधिकारी पहुंच रहे हैं और न ही अधीनस्थ अमला। जिसके कारण जनता के समय पर जरूरी काम नहीं हो पा रहे हैं। यह स्थिति तब है जब कोरोना की वजह से पहले ही काफी कम लोग कार्यालय पहुंच रहे हैंं। इन दिनों पड़ कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए शासन ने जनता के साथ-साथ अधिकारी कर्मचारियों की सुविधा को देखते हुए कार्यालयीन समय में तब्दीली करते हुए सुबह 10 बजे का समय निर्धारित कर दिया है। लेकिन इन निर्देशों का पालन सरकारी विभागों में नहीं हो रहा है। यह हकीकत पत्रिका की पड़ताल में सामने आई है।
गुरुवार को पत्रिका टीम ने कलेक्ट्रेट सहित जिला रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर देखा तो अधिकांश स्टाफ मौके से गायब मिला। वहीं कई विभागों में तो कार्यालय प्रमुख ही अपने कक्ष में मौजूद नहीं मिले। वहीं कुछ कार्यालयों में तो स्टाफ यह चर्चा करते हुए सुना गया कि साहब ने हमें तो सुबह 10 बजे आने आदेश दिए हैं लेकिन खुद ही 11 बजे तक ऑफिस नहीं आए।


कहां क्या मिली स्थिति
स्थान : जिला रजिस्ट्रार कार्यालय
समय : 1०. 3० बजे
स्थिति : इन दिनों रजिस्ट्रार कार्यालय पर शासन-प्रशासन का मुख्य फोकस है। क्योंकि यहां से उन्हें राजस्व प्राप्त होता है। यही कारण है कि जनता की सुविधा के लिए छुटिटयों के दिन भी इसे खोले जाने के आदेश दिए गए थे। साथ ही वर्तमान में जो आदेश हुए हैं उसके अनुसार संपूर्ण स्टाफ को सुबह 10 बजे ऑफिस आना है। लेकिन जब यहां पत्रिका टीम पहुंची तो 1०.3० बजे तक जिम्मेदार अधिकारी उपपंजीयक इन्द्रप्रकाश शुक्ला ऑफिस नहीं आए थे। वहीं दूसरे अधिकारी राठौर भी अपने चेम्बर में उपस्थित नहीं थे। पड़ताल में यह भी सामने आया है कि कार्यालय प्रमुख ने अपने अधीनस्थ स्टाफ को पहले ही आदेशित किया था कि वह सुबह 10 बजे से पहले कार्यालय पहुंच जाए। जिसके तहत स्टाफ तो आ गया लेकिन खुद ही गायब हो गए। जबकि जिला रजिस्ट्रार एसएस पाल अपने चेम्बर में बैठे हुए दिखाई दिए।
स्थान : कलेक्ट्रेट
समय : 10. ३५ बजे
स्थिति : कलेक्ट्रेट भवन के पीछे वाले गेट की सीढिय़ों पर कुछ आवेदक बैठे हुए थे। वहीं कुछ वाहन स्टैंड की छाया में खड़े होकर अधिकारियों के आने का इंतजार कर रहे थे। वहीं कलेक्ट्रेट का एक कर्मचारी बिना मास्क के ही गेट पर बैठा था। जबकि प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार शासकीय कार्यालय में तो मास्क लगाना पूरी तरह से अनिवार्य है। 10.44 मिनट पर कलेक्ट्रेट की आवक शाखा में कोई भी मौजूद नहीं था। सभी कुर्सियां खाली पड़ी थी। कक्ष के अंदर लाइट जल रही थी तथा पंखे भी चल रहे थे। 10. 47 मिनट पर जिला खाद्य आपूर्ति विभाग में कुछ स्टाफ मौजूद था जबकि कई बाबू और संबंधित अधिकारी की कुर्सी खाली पड़ी थी।10.49 मिनट पर जिला कोषालय कार्यालय पूरी तरह से खाली था। सिर्फ मेन गेट पर एक पुलिसकर्मी बैठा हुआ था। अधिकारियों के सभी केविन तथा स्टाफ की कुर्सियां खाली नजर आईं।महिला बाल विकास विभाग में भी अधिकतर कर्मचारी अपनी कुर्सी से गायब दिखाई दिए।
स्थान: जल संसाधन विभाग
समय: 1०.5० बजे
स्थिति: पत्रिका टीम जब जल संसाधन विभाग के ईई और एसई कार्यालय पहुंची तो वहां अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी अपनी सीट से गायब मिले। कार्यपालन यंत्री का चेम्बर पूरी तरह से बंद मिला। इस कार्यालय के कर्मचारी वैसे भी साढ़े ग्यारह बजे से पहले नहीं आते हैं। जबकि वहां कुछ लोग अपने काम से वहां पहुंचे थे। हाजिरी और वेतन के मामले में तो ये हाल है कि बाबू या अधिकारी नहीं जाए, फिर भी हाजिरी लग जाएगी और वेतन निकल जाएगा। ऐसा मामला हाल ही में होना बताया गया है। एक कर्मचारी की सात माह अनुपस्थिति रहने के बाद भी वेतन निकलने की बात एक कर्मचारी ने बताई।

Narendra Kushwah Reporting
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