government hospital : कागज में अस्पताल को सीएससी का दर्जा, हकीकत में नहीं है कोई भी सुविधाएं

government hospital : कागज में अस्पताल को सीएससी का दर्जा, हकीकत में नहीं है कोई भी सुविधाएं

Amit Mishra | Updated: 17 Jul 2019, 03:45:26 PM (IST) Guna, Guna, Madhya Pradesh, India

अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक की भी सुविधा नहीं

गुना/म्याना. सरकार स्वास्थ्य Government hospital सुविधाओं को बढ़ाने के लिए हर साल विभिन्न योजनाओं government schemes पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, इसके बावजूद आमजन को पर्याप्त स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले के अंचल में स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह से लडख़ड़ाई हुई हैं। जिसका एक उदाहरण है फोरलेन हाइवे Four lane स्थित ग्राम म्याना। यहां सरकार ने कहने को तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र Samudayik Swasthya Kendra बना दिया है। लेकिन यहां मिलने वाली सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक की भी नहीं हैं।

 

अस्पताल में एक डॉक्टर्स एक नर्स
यह अस्पताल एक डॉक्टर्स व एक नर्स के भरोसे चल रहा है। न तो मरीजों को एक्सरे की सुविधा है और न ही पोस्टमार्टम की व्यवस्था। इस असुविधा के बीच गंभीर मरीजों को 30 किमी दूर गुना जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इसी तरह मृतक को भी पोस्टमार्टम के लिए गुना ही ले जाना पड़ता है।

स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही
जानकारी के मुताबिक गुना-शिवपुरी के बीच फोरलेन पर स्थित ग्राम म्याना में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को शासन ने जरुरत के मुताबिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा तो दे दिया लेकिन व्यवस्थाएं व सुविधाओं का विस्तार आज तक नहीं किया गया है। यही कारण है कि यह अस्पताल कहलाता तो सीएससी है लेकिन मरीजों को सुविधाएं पीएससी स्तर की भी नहीं मिल पा रही हैं। क्योंकि यहां सालों से एक डॉक्टर व एक नर्स ही पदस्थ है। ऐसे में मरीजों को 24 घंटे स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

 

निजी अस्पताल में इलाज कराया
करंट की शिकार बालिका को ले जाना पड़ा गुना: म्याना अस्पताल के नजदीक ही रहने वाली एक बालिका को 27 जून को करंट लग गया था। जिसके बाद परिजन तत्काल उसे लेकर म्याना अस्पताल पहुंचे लेकिन उस समय डॉक्टर नहीं मिले। मजबूरी में परिजन बिना प्राथमिक उपचार के ही बालिका को गुना लेकर आए और निजी अस्पताल में इलाज कराया।

पीएम के लिए गुना जाना पड़ता है
इसी तरह सबसे ज्यादा परेशानी मृतक के परिजनों व पुलिस को पीएम कराने में आती है। क्योंकि म्याना थाना क्षेत्र में यदि कोई भी व्यक्ति की सड़क दुर्घटना या झगड़े में मौत होती है तो उसका पीएम कराने गुना ही जाना पड़ता है। ऐसे में शव को गुना तक लाने व ले जाने का आर्थिक भार परिजनों को ही उठाना पड़ता है। इससे काफी परेशान हैं।

 

स्वास्थ्य मंत्री को ग्रामीण भी बता चुके हैं हकीकत
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक म्याना अस्पताल पर आसपास के करीब 50 गांव के लोग निर्भर हैं। जबकि अस्पताल में एक डॉक्टर व नर्स के अलावा कोई नहीं है। स्टाफ कम होने से जरुरत के समय मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है। यह परेशानी हमने बीते माह पंचनामा बनाकर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट को दिया था लेकिन आज तक कुछ नहीं हो सका है।

 

यह हैं शासन के मापदंड
स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के मुताबिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को भर्ती करने की सुविधा होती है। जिसके लिए कम से कम 4 डॉक्टर होना जरूरी है ताकि वे राउंड द क्लॉक ओपीडी व आईपीडी में अपने सेवाएं दे सकेें। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ में भी 5 स्टाफ नर्स होना चाहिए।

इसके अलावा सीएससी स्तर की जांच सुविधाएं जिनमें एक्सरे की सुविधा भी होना अनिवार्य है। पीएम हाउस भी होना चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ भी म्याना सीएससी पर नहीं है। स्थिति तो यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी कम से कम 2 स्टाफ नर्स होती हैं लेकिन म्याना अस्पताल में तो केवल एक ही नर्स है। जो अन्य मरीजों के अलावा डिलेवरी भी करवाती है।


यह बोले जिम्मेदार
म्याना स्वास्थ्य केंद्र को शासन से सीएससी का दर्जा प्राप्त है। लेकिन यहां एक डॉक्टर व एक नर्स ही पदस्थ हैं। एक्सरे की सुविधा नहीं है। पोस्टमार्टम हाउस न होने के कारण यहां पीएम भी नहीं होते हैं। स्वास्थ्य केंद्र की जो भी स्थिति है उससे हम वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
डॉ अनिल राजपूत, मेडिकल ऑफीसर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र म्याना

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