बारूद के ढेर पर बैठा है गुना का बाजार, संकरी गलियों में बहुमंजिला इमारतें

- शैक्षणिक संस्थाओं के पास तक नहीं हैं खुद के फायर फाइटिंग के इंतजाम

- न दुकानदारों के पास हैं, फायर ब्रिगेड के पास नहीं हैं पर्याप्त दमकल और ना ही प्रशिक्षित स्टॉफ...

गुना। गुना का चाहें बाजार अनुराधा गली का हो, या हनुमान गली हो। यहां काफी सं या में दुकान हैं, लेकिन इतनी सकरी है कि वहां फायर ब्रिगेड तो दूर एक चार पहिया वाहन आसानी से नहीं जा सकता है।

गुना के बाजारों में प्रतिदिन लाखों रुपए का कारोबार होता है, सैकड़ों की तादाद में व्यापारी और दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारी भयभीत रहते हैं, इसकी वजह ये है दुकानें एक-दूसरे से सटी हुई बनी हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर दुकानों के पास फायर से टी सिस्टम तक नहीं हैं।

इतना ही नहीं बहुमंजिला इमारतें, शैक्षणिक संस्थानो में भी खुद के सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। फायर ब्रिगेड का आलम ये है कि उनके पास न तो पर्याप्त दमकल है और ना ही प्रशिक्षित स्टॉफ है। कुल मिलाकर ये है कि गुना शहर वर्तमान समय में बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

आग की घटनाओं घटनाओं पर काबू पाने नगर पालिका की दमकलों का उपयोग किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि ये दमकल जरा सी आग पर भी काबू पाने में फेल हो जाती हैं। ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

बावजूद इसके न तो नपा ने अपने साधनों को अपडेट किया और ना ही गुना के बाजार समेत शिक्षण संस्थाओं और बहुमंजिला इमारतों में फायर फाइटिंग के इंतजाम कराए। शहर की तंग गलियों में लोगों ने अतिक्रमण कर लिए, जहां से दमकल ले जाना भी मुश्किल है। दरअसल, हर वर्ष गर्मियों में रोजाना दो से तीन जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं।

उसे बुझाने जब नपा की दमकल पहुंचती है तो उसका दम निकल जाता है। कभी उसका पानी खत्म हो जाता है तो कभी मशीनरी काम नहीं करती है, जिससे पानी का प्रेशर कम हो जाता है। इससे आग पर काबू नहीं कर पाते है।

दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों में लगी आग से हुई जनहानि के बाद पत्रिका टीम ने अलग-अलग बाजार और क्षेत्रों में जाकर आग से होने वाले हादसे के समय फायर से टी सिस्टम या फायर ब्रिगेड की तैयारियों को बारीकी से देखा तो कई बाजारों में आगजनी के समय फायर ब्रिगेड तक पहुंचने का सुगम रास्ता ही नजर आया। वहीं बहुमंजिला इमारतें में फायर से टी सिस्टम ही नजर नहीं आए।

बहुमंजिला इमारतों में नहीं बुझा पाएंगे आग
उधर, शहर में ५० से ज्यादा बहुमंजिला इमारतें है और चार मॉल हैं। जिनकी ऊंचाई 50 से लेकर ७0 फीट तक है, लेकिन पालिका अग्निशमन के पास केवल फीट फीट की ही सीढ़ी है। ऊपरी मंजिल से लोगों को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए रस्से, जाल, पर्याप्त सीढ़ी, हाइड्रोलिक प्लेट फॉर्म आदि के इंतजाम तक नहीं है।

सूरत हादसे के बाद गुना में भी ऐसे कई कोचिंग संस्थान है जो दूसरी व तीसरी मंजिल पर संचालित है, लेकिन वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। गुना में एसडीएम शिवानी गर्ग ने कोचिंग संस्थानों के खिलाफ जांच कर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन ये कार्रवाई कागजों में ही सिमटकर रह गई।

तंग गलियों में दमकल नहीं पहुंच सकती
नगर पालिका के पास तीन दमकल वाहन है जो क्रमश साढ़े ३ हजार, साढ़े ५ हजार और साढ़े 6 हजार लीटर क्षमता के है। तंग गलियों में आग लगने पर वाहन का पहुंचना भी मुश्किल है। शहर के छोटे बाजार, अनुराधा गली, सत्य नारायण मंदिर गली, बताशा गली, हनुमान गली और सौकत गली,जैन मंदिर वाली गली, सराफा बाजार, छोटी मस्जिद गली, मुरली धोकल गली, उदासी आश्रम गली, बतासा गली में दमकल पहुंच पाना मुश्किल होता है। कुछ दिन पहले ही जीनघर की दुकान में लगी आग पर काबू करना मुश्किल हो गया था। दमकल को रोड पर ही रखना पड़ा था।

60 किमी दूर तक जाती है दमकल
श्रममंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के क्षेत्र में शहर से 60 किमी दूर फतेहगढ़, बमोरी के गांवों तक गुना की दमकल जाती है। उसे पहुंचने में 60 से 70 मिनट लग जाते हैं। बमोरी क्षेत्र में लंबे समय से दमकल की मांग उठ रही है, लेकिन यहां व्यवस्था नहीं हो सकी। याना के अलावा गुना तहसील के भी कई गांव ऐसे हैं, जहां पहुंचने में काफी वक्त लगता है। यहां आग पर काबू पाने से पहले ही व्यापक नुकसान हो जाता है। बमोरी क्षेत्र में इस तरह की कई घटनाएं पूर्व में सामने आ चुकी हैं।

आधा जिला गेल और एनएफएल के भरोसे
गुना के अलावा आरोन, राघौगढ़, कुंभराज और चांचौड़ा में भी दमकल है, लेकिन यहां की फायर ब्रिगेड खराब होने पर एनएफएल से मंगानी पड़ती है। गैस और यूरिया प्लांट की दमकलों के भरोसे ही आधे जिले की सुरक्षा है। इसके बाद भी नगर परिषद और नपा अपने क्षेत्र में आग बुझाने की व्यवस्था नहीं कर रही हैं।

कर्मचारियों के पास नहीं सुरक्षा उपकरण
नपा में दमकल पर ड्यूटी पर रहने वाले किसी भी कर्मचारी के पास सुरक्षा उपकरण नहीं है। बारह कर्मचारी हैं। उनके पास ग्लब्ज, बायलर शूट, से टी शू, हेलमेट सहित अन्य कोई सामान नहीं है। जिससे उन्हें आग बुझाते समय परेशानी होती है और वह ठीक से आग बुझाने के लिए काम नहीं कर पाते हैं।

नगर पालिका के पास नहीं हैं फायर बुलेट फायटर
सूत्र बताते हैं कि सकरी गली में फायर ब्रिगेड नहीं जा सकती है वहां के लिए नगर पालिका या नगर निगम के पास फायर बाइक फायटर होते हैं, लेकिन गुना में प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री का गृह जिला होने के बाद भी फायर बाइक फायर कहीं नजर नहीं आती है।

आग से यहां भी हो चुके हैं हादसे
कुछ समय पूर्व गुना में बारूद से कैंट के नदी मोहल्ले में विस्फोट हो गया था, वहां इतनी सकरी गली थी कि उसमें फायर ब्रिगेड घटना स्थल तक नहीं पहुंच पाई थी।कोतवाली के पास लगी गुमटियों में आग लग गई थी, उस समय भी फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंच पाई थी।


अभी शहर में मुहिम जारी है। सभी आयामों पर एक-एक कर ध्यान दिया जा रहा है। पहले सफाई, अब अतिक्रमण हटवाया है। लोगों के कब्जा हटने से काफी जगह निकल गाई है। अगला कदम फायर से टी के लिए उठाया जाएगा।
- शिवानी गर्ग, एसडीएम गुना

praveen mishra
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