यहां न प्रभारी मंत्री की चलती है और न कलेक्टर की

वाह रे जिला अस्पताल : मरीज बढ़े, पलंग खाली,जमीन पर कराना पड़ रहा है इलाज
-लंच के बाद डॉक्टरों के चेम्बर खाली, मरीजों की भीड़, सिविल सर्जन का भी चेम्बर बंद,ठेके को लेकर नाराजगी

By: praveen mishra

Published: 14 Sep 2021, 12:34 AM IST

गुना। मौसम में उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल के मेडिकल और सर्जीकल बार्ड में पलंग खाली हैं, इसके बाद भी दूर-दराज से आने वाले मरीजों को पलंग नसीब नहीं हो रहे हैं, वे जमीन पर ही लेटकर अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। डॉक्टरों और स्टॉफ का आलम ये है कि लंच के आधे घंटे बाद भी डॉक्टर अपने चेम्बर में नहीं पहुंच रहे हैं। जबकि मरीज उनके चेम्बर के बाहर खड़े होकर उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भले ही जिला अस्पताल में प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दे दें, इसके बाद भी वहां की व्यवस्थाएं सुधरने को तैयार नहीं हैं।
दो दिन पूर्व कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए जिला अस्पताल का निरीक्षण करने गए थे, वहां एक नहीं कई दिशा-निर्देश व्यवस्थाओं में सुधार बाबत दे आए थे। इसके बाद सोमवार को पत्रिका टीम दोपहर सवा दो से पौने तीन बजे तक जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं और वहां मिल रहे इलाज को देखने पहुंची तो व्यवस्था पूर्व की तरह चरमराई हुई नजर आईं।
पत्रिका टीम दोपहर लंच के बाद सवा दो बजे करीब जिला अस्पताल पहुंची तो सामान्य ओपीडी कक्ष में कोई डॉक्टर नहीं था, सारी कुर्सियां खाली पड़ी हुई थीं। बाहर पन्द्रह-बीस मरीज यहां बैठने वाले डॉक्टर के आने का इंतजार करते देखे गए। डॉक्टर आरएस भाटी, समेत कई डॉक्टरों के चेम्बर बंद मिले। सिविल सर्जन डा. हर्षवर्धन जैन का कक्ष भी बंद मिला। यहां मौजूद एक कर्मचारी का कहना था कि सिविल सर्जन ही नहीं बैठेंगे तो डॉक्टर क्यों अपनी सीट पर बैठेंगे। उसने लंच का समय दोपहर डेढ़ से सवा दो बजे तक का है, लेकिन यहां डॉक्टर और कुछ स्टॉफ पौने तीन बजे तक अपनी सीट पर नजर नहीं आए। सोमवार को मिले भोजन की क्वालिटी को दो-तीन मरीजों ने ठीक नहीं बताई।


सर्जरी बार्ड के बाहर रो रहा था मरीज
जिला अस्पताल में सर्जरी बार्ड के बाहर एक मरीज दर्द के मारे बुरी तरह दहाड़ मारते हुए रो रहा था। उसका कहना था कि पैर में दर्द हो रहा है, डॉक्टर को सुबह से बुला रहा हूं, न डॉक्टर आ रहा है और न नर्सिंग स्टॉफ। अंदर जाकर देखा तो चार पलंग खाली पड़े हुए थे। इसके आगे जाकर मेडिकल बार्ड देखा तो वहां दो-तीन पलंग खाली पड़े हुए थे।
जमीन पर लेटे थे मरीज
मेडिकल बार्ड के बाहर छह-सात मरीज जमीन पर लेटे थे,जिनमें दो मरीजों के ड्रिप चढाई जा रही थी। इसी बीच एक मरीज को स्ट्रेचर पर उसके परिजन लाते हुए दिखे। स्ट्रेचर पर अस्पताल का कर्मचारी न होने का कारण पूछा तो मरीज को यदि इलाज कराने लाना है तो उसके परिजन को ही स्ट्रेचर पर लाना पड़ेगा। जमीन पर दो मरीज दर्द से कराह रहे थे जिनके परिजनों का कहना था कि डॉक्टर को बुलाने के लिए कई बार नर्सिंग स्टॉफ से कह चुके हैं कोई न आ रहा है और न बुला रहा है।

नहीं सुधरा आरओ प्लांट
पिछले दिनों प्रभारी मंत्री प्रद्युम्र सिंह तोमर जिला अस्पताल गए थे, उन्हें वहां आरओ प्लांट बंद मिला था। जिसको चालू कराने के उन्होंने निर्देश दिए थे। प्रभारी मंत्री के निरीक्षण के एक माह बाद भी आरओ प्लांट चालू नहीं हो पाया।
ओपीडी में संख्या 800 पहुंची
एक समय था जब कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी एक हजार से घटकर 100 से भी नीचे आ चुकी है। जो जुलाई माह के बाद एकाएक बढऩा शुरू हो गई। बीच में जब लगातार बारिश का दौर चला तब ही अस्पताल में कम संख्या में मरीज पहुंचे थे लेकिन जैसे ही बारिश थमी तो अचानक से मरीजों की संख्या बढ़ गई। जो वर्तमान में 800 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
जानकारी के मुताबिक बीते कुछ माह से जिले में भले ही कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा शून्य पर बना हुआ है। लेकिन इसके बावजूद कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह से कोरोना संकट से मुक्त नहीं हो सकी हैं। यही वजह है कि अस्पताल का मेडिकल वार्ड-2 अभी तक चालू नहीं हो सका है। जो अभी कोरोना के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित है। ऐसे में मेडिकल वार्ड-1 पर अत्याधिक लोड है। इस वार्ड की कुल क्षमता 39 पलंगों की है। लेकिन यहां भर्ती मरीजों की संख्या दोगुनी है। ऐसे में गंभीर मरीजों को पलंग, बैड तो क्या फर्श पर भी जगह नहीं मिल पा रही है।
सफाई कर्मचारियों में नए ठेके को लेकर विरोध
जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा नाराजगी वहां काम कर रहे सफाई कर्मचारियों में चल रही है, इसकी वजह ये है कि जिला अस्पताल में सिक्योरिटी, सफाई का ठेका ऐसी कंपनी को दिया है जो पहले से ही ब्लैक लिस्टेड है, उस कंपनी
ने ठेका लेने के बाद पेटी कान्ट्रेक्टर के रूप में मनीष रघुवंशी को दिया है। पूर्व में काम कर रहे आधा सैकड़ा से अधिक सफाई व सुरक्षा कर्मियों को हटा दिया है, जिसको लेकर बेहद नाराजगी है। हटाए गए कर्मियों का कहना है कि हमें काम पर वापस नहीं लिया जो जंगी आंदोलन करेंगे।
ऑक्सीजन प्लांट भी नहीं हुए चालू
पत्रिका टीम जब ऑक्सीजन प्लांट देखने पहुंची तो, बंद मिले, इसके लिए अलग से विशेषज्ञों की टीम बुलाने की बात एक कर्मचारी ने कही, यह टीम कब आएगी, यह कोई बताने को तैयार नहीं था। जबकि कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना गुना में प्रबल होती जा रही है।
आज-कल में आ सकती है काया कल्प की टीम
सूत्रों ने बताया कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधरवाने के लिए प्रभारी मंत्री प्रद्युम्र सिंह तोमर ने हाल ही में तीन करोड़ रुपए दिलाए, लेकिन जिला अस्पताल का प्रबंधन संभालने वाले अफसर व्यवस्था सुधारने की जगह अपने निजी स्वार्थ में लगे हैं। खबर है कि आज-कल में जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं को देखने काया-कल्प की टीम गुना आ सकती है।

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