पत्रिका ऑन द स्पॉट : प्रभारी मंत्री के जाते ही यह कैसा बदलाव, गंभीर मरीजों को न पलंग नसीब और न चादर, स्ट्रेचर पर ही कराना पड़ रहा इलाज

  • डायलिसिस वार्ड तक पहुंचाने वाले लिफ्ट के रास्ते पर जड़ दिया ताला
  • जहां मरीज को जरूरत वहां पलंग नहीं, जहां खाली वहां भेजते नहीं
  • निरीक्षण के बाद अगले दिन ही बिगड़ी जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं

By: Narendra Kushwah

Published: 21 Jul 2021, 12:04 AM IST

गुना. जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं व व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को जिले के प्रभारी मंत्री ने यहां निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने सिविल सर्जन को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद अगले दिन व्यवस्थाओं में सुधार आने की वजाए पहले की तरह ही सब कुछ ढर्रे पर नजर आया। न तो चिकित्सक निर्धारित समय से ओपीडी में बैठे और न ही जाने के वक्त समय का ध्यान रखा। यही नहीं भर्ती मरीजों को सही और समय पर इलाज और भोजन मिल रहा है या नहीं, यह देखने वाला भी कोई नहीं है। गंभीर मरीजों को पलंग तो क्या फर्श पर बिछाने चादर तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। स्ट्रेचर पर रखे हुए ही उनका इलाज किया जा रहा है। ऐसे हालात जिला अस्पताल के तब बने हुए हैं जब जिले में रहने वाले नेता राज्य से लेकर केंद्र में मंत्री रह चुके हैं।
जानकारी के मुताबिक जिले के नए प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सोमवार को जिला अस्पताल का गहन निरीक्षण किया था। इस दौरान ओपीडी से लेकर आईपीडी तक बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली थीं। यही नहीं भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की मात्रा में गड़बड़ी मिली। जिसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को व्यवस्थाएं सुधारने चेताया था। प्रभारी मंत्री के आदेश और निर्देशों पर अगले दिन कितना अमल हुआ और व्यवस्थाओं में सुधार आया, यह जमीनी हकीकत जानने के लिए पत्रिका टीम ने मंगलवार को जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर देखा। इस दौरान व्यवस्थाओं में सुधार होना तो बहुत दूर, इसके उलट वार्ड में गंभीर मरीज फर्श पर लेटे नजर आए। ओपीडी से अधिकांश डॉक्टर गायब थे। वे अपने कक्ष को छोड़ दूसरे कक्षों में बैठे हुए थे। जिसके कारण मरीज उन्हें ढूंढते रहे और थक हारकर बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए।
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भोजन की न गुणवत्ता सही और न मात्रा
कोरोना महामारी ने दो साल पहले जिला अस्पताल में भोजन वितरण की व्यवस्था में बदलाव करा दिया। जिसके बाद भोजन को थाली में देने की वजाए पैकिटों में दिया जाने लगा। इससे थाली साफ करने का संकट भी खत्म हो गया। वहीं कुछ मरीज अस्पताल की थाली में भोजन लेना पसंद नहीं करते थे, वे भी भोजन लेने लगे। लेकिन मरीजों का यह घाटा हुआ कि पैकिट में जो भोजन दिया जा रहा है उसकी मात्रा बहुत कम है। इसमें चार रोटी के अलावा जो सब्जी दी जाती है वह बहुत कम रहती है। जिससे एक व्यक्ति का पेट तक नहीं भर पाता है। वहीं सब्जी से लेकर रोटी की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है।
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वार्डों से गायब हुआ डाइट चार्ट
सरकार के निर्देश हैं कि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों व प्रसूताओं को दी जाने वाली डाइट का चार्ज प्रत्येक वार्ड में चस्पा किया जाए ताकि मरीजों को भी यह पता होना चाहिए कि उन्हें कब कौनसा मीनू दिया जाएगा और उसकी मात्रा कितनी रहेगी। मरीजों को दिए जाने वाले भोजन में गड़बड़ी करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने वार्डों में डाइट चार्ट तक नहीं लगाया है।
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वार्ड में पलंग हैं तो मरीज नहीं, मरीज है तो पलंग नहीं
जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह से ढर्रे पर चल रही हैं। मंगलवार को जब ग्रामीण क्षेत्र से झगड़े में गंभीर रूप सेे घायल जिला अस्पताल पहुंचे तो उन्हें ऐसी जगह भर्ती करने के लिए लिख दिया गया जहां पलंग ही नहीं थे। जबकि दूसरे वार्ड में एक नहीं बल्कि पांच पलंग खाली थे। इसके बावजूद गंभीर मरीज को जमीन पर लिटा दिया गया। उसके बिछाने बैडशीट तक उपलब्ध नहीं कराई गई। जबकि मरीज की हालत जमीन पर लेटने लायक नहीं थी। पलंग के अभाव में मरीज को स्ट्रेचर पर लेटे समय ही इंजेक्शन लगा दिया गया।
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प्रभारी मंत्री को दिखाने लिफ्ट के रास्ते का ताला खोला जाते ही किया बंद
सोमवार को प्रभारी मंत्री जिला अस्पताल का निरीक्षण करेंगे, यह जानकारी सभी को थी। इसलिए जिला अस्पताल प्रबंधन ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए उनके से पहले लिफ्ट जाने वाले रास्ते का ताला खोल दिया। जबकि यह ताला करीब 3 माह से बंद है। जिसे प्रभारी मंत्री के जाते ही फिर से लगा दिया गया। यहां बता दें कि डीईआईसी भवन के फस्र्ट फलोर पर डायलिसिसटी यूनिट है। जहां ऐसे लोग आते हैं जो शारीरिक रूप से सीढिय़ां चढ़कर नहीं जा सकते। उनकी सुविधा के लिए ही लाखों रुपए खर्च कर लिफ्ट लगाई गई थी, जिसे अस्पताल प्रबंधन ने पिछले तीन माह से बंद कर रखा है। इसकी वजह तीन माह पहले इसी भवन के एक हिस्से में कोविड वार्ड को संचालित किया जाना था। लेकिन वर्तमान में यहां कोई भी पॉजिटिव केस एडमिट नहीं है। वैसे भी कोविड वार्ड में आने जाने का रास्ता पहले से ही अलग है और डायलिसिस यूनिट के लिए अलग रास्ता है। इसके बावजूद प्रबंधन ने लिफ्ट को बंद कर रखा है।
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एक दर्जन गार्ड फिर भी खुलेआम घूमते हैं जानवर
जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में यहां एक दर्जन सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। यहां तक अस्पताल के मेन गेट पूरे समय एक गार्ड तैनात रहता है। इसके बावजूद पूरे परिसर से लेकर वार्ड के अंदर तक जानवर पहुंच जाते हंैं। जो मरीजों के साथ-साथ अटैंडरों के लिए खतरा बने हुए हैं। स्थिति यह है कि मरीज अटैंडर परिसर में पेड़ के नीचे छांव में खाना तक नहीं खा पाते हैं।

Narendra Kushwah Reporting
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