scriptHungry and thirsty farmers stand in queue from 5 am | खाद की भयंकर किल्लत, भूखे-प्यासे किसान सुबह 5 बजे से कतार में खड़े होने को मजबूर | Patrika News

खाद की भयंकर किल्लत, भूखे-प्यासे किसान सुबह 5 बजे से कतार में खड़े होने को मजबूर

कभी टोकन रद्द हो जाते हैं। तो कभी टोकन मिलने के बाद भी खाद नहीं मिल रहा है।

गुना

Published: November 08, 2021 11:18:16 am

गुना. किसानों को खाद की भयंकर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। त्योहारों के दिन होने के बावजूद वे सारे काम छोड़कर खाद के लिए अलसुबह से कतार में खड़े होने को मजबूर हैं। इसके बावजूद कभी टोकन रद्द हो जाते हैं। तो कभी टोकन मिलने के बाद भी खाद नहीं मिल रहा है। हालात यह है कि किसानों को अवकाश के दिन रविवार को भी परेशानी झेलना पड़ रहा है। हालात यह है कि अलसुबह से भूखे प्यासे किसान केंद्र खुलने के पहले पहुंच जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें खाद नहीं मिल रहा है।
खाद की भयंकर किल्लत, भूखे-प्यासे किसान सुबह 5 बजे से कतार में खड़े होने को मजबूर
खाद की भयंकर किल्लत, भूखे-प्यासे किसान सुबह 5 बजे से कतार में खड़े होने को मजबूर
सरकार के आश्वासन और प्रशासन के कुप्रबंधन के चलते अन्नदाता की मुसीबतें लगातार बढ़ती ही चली जा रही हैं। किसानों को हर दिन नई-नई तारीखें दी जा रही हैं कभी टोकन के लिए तो कभी खाद वितरण के लिए। अन्नदाता को समझ नहीं आ रहा है कि क्या उसे सही समय पर खाद मिल पाएगी और वह बोवनी कर पाएगा। पर्याप्त खाद की उपलब्धता न होने और किसानों की संख्या के हिसाब से वितरण सेंटर चालू न होने से अन्नदाता को खाद लेने के लिए बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही नजारा रविवार को जिला मुख्यालय पर नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी परिसर में देखने को मिला।

अलसुबह से कतार में खड़े अन्नदाता
यहां सुबह 5 बजे से ही किसान लाइन में लग चुके थे। यह लाइन इतनी लंबी थी कि जितना कार्यालय परिसर में जगह थी, उसकी दीवार तक लोग लाइन में थे। इनमें कुछ खड़े थे जबकि कुछ के शरीर ने जवाब दे दिया था इसलिए वे जमीन पर ही बैठे हुए थे। इस लाइन में लगने की इजाजत सिर्फ उन्हीं किसानों को थी जिनके पास 9 नवंबर तक के टोकन हैं। इस तारीख के बाद वाले टोकन जो किसान लेकर आए थे उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। क्योंकि प्रशासन ने ऐसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की थी कि इन किसानों को भी खाद दिया जा सके। खाद वितरण को लेकर प्रशासन द्वारा किसानों को सही जानकारी नहीं दी जा रही है। इसी वजह से किसान की परेशानी दोगुनी हो गई है।रविवार को नानाखेड़ी मंडी में दो जगह किसानों की लंबी लाइन लगी थी। एक मंडी कार्यालय परिसर के अंदर तो दूसरी लाइन गोदाम के पास टोकन लेेने के लिए। पत्रिका टीम जब यहां पहुंची तो दोपहर 11 बजे आधा सैकड़ा से अधिक किसान लाइन में लगे हुए थे। टोकन बांटे जाने वाले कक्ष पर ताला लगा हुआ था।
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दावा और हकीकत
कृषि विभाग ने दावा किया है कि वर्तमान में 22250 मैट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। 1250 टन डीएपी की नई रैक प्राप्त हुई है। इस बार 3.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। ज्यादातर किसान अब तक बोवनी कर चुके हैंं। जिन्हें 10 हजार टन डीएपी बांटा जा चुका है। इसकी जमीनी हकीकत यह है कि जिले में राज्य विपणन संघ के 7 डबल लॉक गोदाम हैं, लेकिन कृषि विभाग ने 6 नवंबर को जारी प्रेस नोट में खाद वितरण के लिए सिर्फ नानाखेड़ी मंडी वाले डबल लॉक गोदाम का ही उल्लेख किया। ऐसे में सवाल उठता है कि पर्याप्त खाद है तो अन्य केंद्रों पर वितरण क्यों नहीं किया जा रहा।
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वितरण व्यवस्था में ये हैं खामियां
जब डबल लॉक गोदाम, निजी दुकानों पर खाद के लिए मारामारी शुरू हुई तो आनन फानन में प्रशासन ने 40 सहकारी समितियों को वितरण केंद्र बनाकर नाम की सूची जारी कर दी। 15 दिन बाद भी इन सभी समितियों पर खाद तक नहीं पहुंच पाया है। निजी खाद विक्रेताओं की संख्या कम होने से दुकानदार कालाबाजारी कर रहे हैं। यह प्रशासनिक कार्रवाई से कई बार प्रमाणित हो चुकी है।

खाद की भयंकर किल्लत, भूखे-प्यासे किसान सुबह 5 बजे से कतार में खड़े होने को मजबूरदो सैकड़ा किसान, काउंटर सिर्फ एक ही
नानाखेड़ी मंडी कार्यालय में रविवार को दो सैकड़ा से अधिक किसान खाद लेने आए थे। लाइन में सिर्फ वही किसान लग पाए जिन पर 9 नवंबर तक का टोकन था। इसके बावजूद लाइन लंबी हो गई। ऐेसे में एक किसान को 4 कट्टा खाद लेेने के लिए 5 से 6 घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। भूखे-प्यासे किसानों का कहना था कि काउंटर बढ़ाकर दो कर दी जाती तो इतना इंतजार नहीं करना पड़ता।
मैंने नानाखेड़ी मंडी में 25 अक्टूबर को लाइन में लगकर टोकन लिया था, जिसके आधार पर मुझे ३ नवंबर को खाद मिलना था। जब वह यहां आया तो बताया गया कि इस दिन के सभी टोकन प्रशासन ने रद्द कर दिए हैं। अब तुम्हें फिर से टोकन लेना होगा। रविवार को मंडी में लंबी लाइन लगी थी। 12 बजे तक लाइन में लगे, लेकिन फिर भी टोकन नहीं मिल सका।
इरफान खान, किसान मावन

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