नगर पालिका को कॉलोनाइजर से मिले 45 करोड़ तो हो सकता है शहर का चहुंमुखी विकास

कॉलोनाइजरों को नहीं मिली राहत, 102 की सूची तैयार, वसूली की नपा ने की तैयारी
-एसेसमेन्ट के लिए नपा ने शुरू किए नोटिस भेजना, विकास शुल्क किया निर्धारित, कॉलोनाइजरों में सत्ता से जुड़े राजनेता और धन्नासेठ भी शामिल

By: praveen mishra

Updated: 08 Oct 2021, 12:43 AM IST

गुना। गुना शहर की अवैध कॉलोनियों व एसेसमेन्ट करने के हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने आदेश दिए हैं। इस आदेश के बाद नगर पालिका सक्रिय हुआ और उसने नए सिरे से 102 कॉलोनाइजरों की सूची तैयार की है, जिन पर पूर्व से तय विकास शुल्क समेत नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस आदेश और नगर पालिका के नोटिस के बाद कॉलोनाइजरों में हड़कम्प मच गया है। इस बार एसेसमेन्ट करने के लिए कॉलोनाइजरों के साथ-साथ प्लॉट धारकों से भी चर्चा करेगा। ये कॉलोनाइजर यदि नगर पालिका को विकास शुल्क देते हैं तो नगर पालिका के पास लगभग 45 करोड़ रुपया एकत्रित हो सकता है और शहर में विकास संबंधी कार्य तेजी से हो सकते हैं।
प्रदेश में भाजपा की सत्ता बनते ही उनसे जुड़े नेता सक्रिय हुए और बगैर अनुमति व डायवर्सन के खेती, नदी-नाले, राजस्व व अन्य की भूमि पर कॉलोनियों का निर्माण किया और विकास के नाम पर ठेंगा प्लॉट खरीदने वालों को ठेंगा दिखाया।सत्ता के नशे में चूर और राजनेताओं के नजदीकी कुछ कॉलोनाइजरों ने नगर पालिका में विकास शुल्क भी जमा नहीं किया। तत्कालीन कलेक्टर ने यहां की अवैध कॉलोनियों को लेकर कलेक्टर के रूप मेें कई कॉलोनाइजरों पर जुर्माना लगाया और कई अवैध भवनों को गिराने के आदेश दिए। कलेक्टर के इस आदेश के विरुद्ध तीस से अधिक कॉलोनाइजर कोर्ट चले गए,उन्होंने कलेक्टर के आदेश को चुनौती दी जिसमें कहा कि कॉलोनाइजरों के विरुद्ध जुर्माना लगाने का अधिकार नगर पालिका सीएमओ को है न कि कलेक्टर को। याचिका में आग्रह किया कि कलेक्टर द्वारा कॉलोनाइजरों के विरुद्ध दिए गए आदेशों को निरस्त किया जाए। कोर्ट ने पिछले दिनों इन याचिकाओं की सुनवाई कर कलेक्टर द्वारा लगाए गए जुर्माना और तोडऩे संबंधी दिए आदेश को समाप्त किया और कहा कि नगर पालिका का सीएमओ कॉलोनाइजरों और प्लॉट धारकों को नोटिस देकर तलब करे और उनके द्वारा किए गए निर्माण आदि का असेसमेन्ट करे। इसके साथ ही कॉलोनाइजरों की याचिकाओं का निराकृत कर दिया है। स्मरण रहे कि कुछ समय पूर्व हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाओं की सुनवाई कर कलेक्टर के आदेश पर रोक भी लगाई थी।
नोटिस भेजकर पैसा वसूलने की तैयारी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 102 कालोनाइजरों के नामों की सूची तैयार की है इसमें उन कॉलोनाइजरों को शामिल किया है जिनकी कॉलोनियों पर कलेक्टर न्यायालय से सुनवाई के बाद हाईकोर्ट से उनकी याचिकाओं का निराकरण हो चुका है। जल्द ही इनके नामों की सूची तहसीलदार के पास पहुंचेंगी, वहां से बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू होगी। कॉलोनाइजरों ने जुर्माना नहीं भरा तो उनकी संपत्ति भी कुर्क कराने की कार्रवाई प्रशासक सकते हैं। यह जुर्माना या विकास शुल्क लगभग 45 करोड़ रुपए नगर पालिका के खाते में आ सकता है इससे शहर में जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकती है।


भास्कर ने शुरू की थी कार्रवाई
कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जमीन घेरकर, बगैर डायवर्सन के कॉलोनी बनाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की कार्ययोजना बनी थी। बगैर डायवर्सन एवं बगैर अनुमति के कॉलोनी बनाने और कॉलोनी बनाने के समय दिखाए गए सपने पूरे न करने आदि को लेकर शिकायतें आने के बाद लगभग 89 कॉलोनाइजरों को प्रशासन ने चिन्हित किया था, तत्कालीन कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने एक टीम बनाकर ऐसे कॉलोनाइजरों के नामों की सूची बनाई थी, जिसमें गुना शहर और जिले भर के 89 कॉलोनाइजरों के नाम शामिल थे।जिन पर एफआईआर तक के आदेश हुए, लेकिन कागजों में ही यह आदेश कैद होकर रह गए थे। वर्तमान में कॉलोनाइजरों की संख्या 102 तक पहुंच गई।

फ्रेंक नोबल ने नकेल डालने के काम को बढ़ाया
भास्कर लाक्षाकार के बाद कलेक्टर बनकर आए कुमार पुरुषोत्तम ने कॉलोनाइजरों के विरुद्ध कार्रवाई की, इस कार्रवाई को लेकर हड़कम्प सा मच गया था। कुछ कॉलोनाइजरों ने भोपाल और दिल्ली जाकर अपने पसंदीदा नेताओं के यहां शरण ली और बचाने की गुहार लगाई। जिसके बाद भी यह कार्रवाई चलती रही, लेकिन इसी बीच कुमार पुरुषोत्तम का तबादला हो गया। इस प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव लाकर वर्तमान कलेक्टर फ्रेंक नोबल ने आगे बढ़ाया था।
नगर पालिका ने बनाई सूची
हाईकोर्ट और प्रशासक के जरिए मिले आदेश के बाद नगर पालिका ने हाल ही में इन 102 कॉलोनियों से जुड़े कॉलोनाइजरों के नामों की सूची तैयार की है। पूर्व में इन कॉलोनाइजरों से विकास शुल्क वसूले जाने के लिए एक सूची बनाई थी, उनसे विकास शुल्क या जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया को नगर पालिका ने अंतिम रूप दिया है। नगर पालिका के सीएमओ तेजसिंह यादव के अनुसार ऐसे कॉलोनाइजरों के नामों की सूची तीन-चार दिन में तहसीलदार कोर्ट में सौंप देंगे। विकास शुल्क या जुर्माना तहसीलदार को ही वसूलने का अधिकार है। विकास शुल्क यदि नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ न्यायालय में परिवाद पत्र नगर पालिका की ओर से पेश किए जाएंगे।
अवैध कॉलोनी में रहने वालों को यह चाहिए सुविधा
- कॉलोनी में नाली, खरंजा और सड़क हो।
-बिजल के खम्बे लगे हों और घर तक विद्युत लाइन जाए।
-पानी की लाइन भी घर के अन्दर तक डली रहे।
-शहर की सड़कें डामरीकरण युक्त हों।
-पार्क की सुविधा हो।


इन कॉलोनाइजरों से विकास शुल्क या जुर्माना वसूलने की राशि
हितेन्द्र कुमार शुक्ला-24,15000, रामचरण माथुर- 11,85000,शिवनारायण कुशवाह-24,65000,अतुल जग्गी- 18,55000,मुकेश राठौर- 10,95000, हरिहर प्रताप सिंह- 13,95000,प्रेमनारायण कुशवाह- 108000,दौलतराम कुशवाह- 17,80000, रामबाबू -20,30000, त्रिलोक चन्द्र माधवानी- 11,85000, अमित रघुवंशी- 13,30000, शंकरलाल कुशवाह- 17,10000,मुनेश धाकड़- 18,35000, भगवती प्रसाद-17,55000,शुभनारायण राजपूत- 16,30000,संजय कुमार चौरसिया- 42,2000, बृजेश सिंह रघुवंशी-20,90000,दातार सिंह कुशवाह- 7,85000,पदम कुमार जैन- 1000000,भानू प्रताप सिंह रघुवंशी-20,90000,कुन्नूलाल-2660000,विद्यादेवी जैन-50,15000,नरेश राठौर- 8,70000, परमहंस राजपूत- 6,35,000, पुरुषोत्तम अग्रवाल-4,80000,गौरव -2,85000,शैलेष पाटनी-295000,कृष्णा लाम्बा- 86,80000,गोपाल कुशवाह- 35,55000,रामप्रसाद कुशवाह- 93 लाख, मृदुल शर्मा- 91,27,500, अंकुर श्रीवास्तव हनुमान कॉलोनी- 8,35,000, अब्दुल सलीम- 58,05000,चंदा देवी चौरसिया- 38,20000,जरनेल सिंह 41,60,000,कुलदीप सलूजा-41,10,000, जसपाल सिंह गिल-33,60000,अमर कौर- 42,75,000 रुपए बकाया हैं।
इसी तरह वीरेन्द्र सिंह पर 73 लाख दस हजार, ओमप्रकाश राठौर- 1,54,25000,बृजेश राठौर- 46,30000,रियाज हुसैन-1,2100000, महावीर जैन- 2,700000, अभय शंकर राजपूत- 52,25000,राकेश,मुकेश, शैलेश, सोनू पाटनी- 3,520000,फूलाबाई कुशवाह- 6,90000, दीवान सिंह जाटव- 7,80000,मुंशीलाल यादव-1000000,विनय सेंगर-52,20000,रवि बिरथरे- 38,60000, पवन- 60,65000,बलवीर सिंह सिख- 40,60000, कल्याणी बाई यादव- 96,30000,बिट्टी देवी राजपूत- 35,65000, शमशाद मोहम्मद- 10,00000,सुनील चौरसिया-21,75000,रामप्रसाद लोधा39,15000,मीना देवी राठौर- 4,95000,कमला देवी आदि- 68,30000 यशवंत कुमार शर्मा- 1000000,जशोदा बाई कुशवाह- 6,95000, रानी जैन- 6,35,000,विनय शास्त्री- 21,30000,हरिसिंह यादव 10,65000,सूरज शर्मा- 18,00000,आशीष अग्रवाल- 14,55000,महेन्द्र संधु- 22,75000, मनोज शर्मा- 18,80000,प्रदीप जैन- 92,45,000,हरप्रसाद-18,9000,हरिशंकर कुशवाह- 19,30000, मधु गुप्ता- 31 लाख 90 हजार, चम्पालाल चौरसिया- 46 लाख 90 हजार, शादुस्ता खान- 33 लाख 40 हजार, शैलेश पाटनी- 58 लाख साठ हजार, संजय भार्गव- 77 लाख 45 हजार, नितेन्द्र कुमार शुक्ला- 42 लाख 45 हजार रुपए आदि पर विकास शुल्क बकाया है।इनके अलावा नोटिस भेजे जाने वालों की सूची में बृजेश मेर, नूर हसन, रसीद खान, मुंशी, उत्तम कुमार,अमर कुमार,जतिन मेहता,वीरेन्द्र सिंह रघुवंशी, सुरेश कुशवाह,अभिषेक, ओमप्रकाश आदि के भी नाम शामिल हैं।
नोट: कॉलोनाइजरों के नाम और राशि नगर पालिका के दस्तावेजों के अनुसार है।
कालोनाइजरों का दर्द ये
आधा दर्जन से अधिक कॉलोनाइजरों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अवैध कॉलोनी यदि बन रही है तो उसमें गलती हमारी के साथ उन अधिकारियों की नहीं है जिन पर अवैध कॉलोनी बनवाने पर रोक लगवाने की है। संबंधित नगर पालिका के अधिकारियों पर भी कार्रवाई होना चाहिए। हम सब एक नम्बर में ही कॉलोनी बनाते हैं और बनाने को तैयार हैं कलेक्टर कॉलोनियों के निर्माण में अह्म भूमिका निभाने वाले अधिकारियों की एक समिति बना दें। वही कॉलोनी निर्माण की पूरी कार्रवाई कराए। जिससे अवैध कॉलोनियों का निर्माण भी पूरी तरह बंद हो जाएगा और शासन को समय पर राजस्व भी मिलने लगेगा। गुना का जिल्द बंदोवस्त अभी तक नहीं हुआ जिससे अवैध कॉलोनी की समस्या अधिकतर समाप्त ही हो जाएगी।
इनका कहना है
-हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसेसमेन्ट करने के लिए कॉलोनाइजरों और प्लॉट धारकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। तहसीलदार के पास विकास शुल्क वसूलने के लिए आरसी कराई जा रही है। कई कॉलोनाइजरों के खिलाफ परिवाद पत्र भी पेश किए जाने की हमारी पूरी तैयारी है।
तेजसिंह यादव सीएमओ नगर पालिका

praveen mishra
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned