वाह री पुलिस, फरियादी को 21 साल लग गए पुलिस थाने में धोखाधड़ी के आरोपी अफसर के खिलाफ मामला दर्ज कराने में

-पैसे की कमी तो खेत बेचकर पढ़ाया बच्चों को
-मामला 417 बोरी धनिया के कूट रचित हस्ताक्षर कर बेचने का मामला, चांचौड़ा पुलिस थाने में मामला दर्ज

By: praveen mishra

Published: 20 May 2021, 10:01 PM IST

गुना। प्रदेश में भाजपा की सरकार है, पुलिस में रिपोर्ट भी अब ऑन लाइन लिखी लगी है, जांच पड़ताल भी तेजी से होने लगी है, समय पर विवेचना न करने वाले पुलिस अधिकारी व कर्मियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई होने लगी है। इस सबके बाद भी गुना जिले के चांचौड़ा पुलिस थाने का एक ऐसा रोचक मामला सामने आया है, जहां एक फरियादी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने में 21 साल गुजर गए, जबकि वह इस दौरान शिकायत करने चांचौड़ा थाना प्रभारी से लेकर मुख्यमंत्री तक से कर चुका था। पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा को जब फरियादी ने अपनी पीड़ा आवेदन के साथ सुनाई तो उन्होंने चांचौड़ा एसडीओपी को इस पूरे मामले की जांच करने के लिए अधिकृत किया। उस जांच रिपोर्ट के आधार पर दो दिन पूर्व चांचौड़ा पुलिस थाने ने एक वेयर हाउस के तत्कालीन शाखा प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल के विरुद्ध धोखाधड़ी आदि धाराओं के तहत मुकदमा कायम किया है। उधर फरियादी भैरूलाल बताते हैं कि इस बीच उनको पैसे की कमी हुई तो उन्हें कई परेशानियों से गुजरना पड़ा, जिसकी बयां करुं तो मेरे आंसू निकल आते हैं।

ये है मामला
31 मार्च 1999 को बीनागंज के वार्ड क्रमांक 15 में रहने वाला 55 वर्षीय फरियादी भैरूलाल साहू ने अपना 417 बोरी धनिया शासकीय राज्य भंडारण गृह बीनागंज में अपने ससुर ओमप्रकाश साहू के नाम पर बीनागंज स्थित वेयर हाउस के तत्कालीन शाखा प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल से मिलकर रखा था। माल रखने की जमा रसीद भी उसको दी थी। भेरूलाल साहू को पैसों की आवश्यकता पड़ी तो उसने विजय कुमार अग्रवाल से बैंक लोन लेने को कहा गया तो विजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि मैं देवेन्द्र जैन के मकान में किराए से रहता हूं जो धनिया वेयर हाउस में रखा है उसकी पर्ची देवेन्द्र के पास गिरवी रख दी और देवेन्द जैन से दो रुपए प्रति सैकड़ा के हिसाब से एक लाख 85 हजार रुपए उधार ले लिए थे।
राजस्थान से लौटकर पहुंचा हिसाब चुकाने
गिरवी पर पैसा उठाने के बाद भैरूलाल को अपने धंधे में घाटा हो गया और वह राजस्थान चला गया। वर्ष 2000 में भैरूलाल राजस्थान से लौटकर देवेन्द्र के पास पहुंचा और अपनी गिरवी रखी धनिए की रसीद वापस मांगी तो देवेन्द्र क कहना था कि विजय अग्रवाल एक पत्र लेकर आया था उस पर भैरुलाल के हस्ताक्षर थे और कहा कि भैरूलाल माल नहीं उठा रहा है उस माल को बेच दो, मैंने वह रसीद विजय अग्रवाल को दे दी थीं, विजय ने मुझे एक लाख 35 हजार रुपए दिए और कहा कि 50 हजार रुपए बाद में दिलवा दूंगा। विजय से भैरूलाल मिला तो उसने अपना माल का हिसाब करने को कहािि,जसमें रसीद में माल की कीमत 1 लाख 96 हजार 695 रुपए थी, बाजार में 25 रुपए किलो के हिसाब से उस धनिए की कीमत 4 लाख 17 हजार रुपए बताई।

फर्जी हस्ताक्षर किए थे भेरूलाल के
चांचौड़ा पुलिस थाने में की गई रिपोर्ट केअनुसार यह जानकारी में सामने आया कि कूटरचित करके भैरूलाल के फर्जी हस्ताक्षर किए 417 बोरी धनिया वेयर हाउस से निकालकर अग्रवाल ने वह अशोक कुमार पालीवाल को बेचा था। विजय कुमार अग्रवाल, ओमप्रकाश पालीवाल और रमेश चिड़ार मुकद्दम की सांठगांठ जांच में पाई गई थी।
एसडीओपी ने की जांच बताया गया कि इस पूरे मामले की जांच एसडीओपी चांचौड़ा ने कुछ समय पूर्व की, इस जांच रिपोर्ट के आधार पर 21 साल बाद विजय कुमार अग्रवाल निवासी गीता कॉलोनी ग्वालियर वर्तमान में अम्बाह रोड केन्द्रीय विद्यालय मुरैना वेयर हाउस में पदस्थ क खिलाफ चांचौड़ा पुलिस थाने ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 467, 468 के तहत मामला कायम किया है।
आठ से अधिक थाना प्रभारी बदल गए
सन् 1999 में रखे धनिया को धोखाधड़ी से बेचे जाने की पहली शिकायत सन् 2000 में चंाचौड़ा पुलिस थाने को की थी, इसके बाद वह लगातार भैरूलाल थाने के चक्कर लगाता रहा, उसकी सुनवाई न होकर उसे टाला जाता रहा। इसी बीच आठ से दस थाना प्रभारी बदल गए, तीन एसडीओपी बदल गए। जांच अधिकारी की अदला-बदली होती रही। मगर आरोपी विजय कुमार अग्रवाल के विरुद्ध मामला दर्ज नहीं हो पाया। हाल ही में चांचौड़ा एसडीओपी मुनीष राजौरिया वहां पहुंचे, उनके सामने जब यह मामला जांच के लिए आया तो उन्होंने इसकी जांच कर मामला दर्ज करने की बात कही।
खेत तक बेचना पड़ा मुझे : भैरूलाल
बीनागंज निवासी भैरूलाल बताते हैं कि इधर मेरा धनिया का पैसा विजय कुमार अग्रवाल हड़प गए, उधर मेरे पास पैसे की तंगी हो गई, मुझे बच्चों को पढ़ाने के लिए अपना ढाई बीघा का खेत बेच दिया, तब जाकर उन बच्चों की फीस स्कूल में जमा की। भैरुलाल का कहना था कि ऐसा कोई जिले में अफसर नहीं हैं जिसके यहां मैंने अपनी गुहार न लगाई हो। लेकिन सब जगह से कार्रवाई का आश्वासन मिलता रहा, कार्रवाई अब जाकर हो पाई। उन्होंने बताया कि यह मामला दर्ज कराने के बाद दो दिन से लगातार उसको धमकी भी मिल रही हैं। जबकि इस मामला दर्ज कराने से पहले बयान के लिए वेयर हाउस के कुछ अफसरों को बुलाया, उनसे तस्दीक कराई तो उन्होंने भी माना कि भैरूलाल के साथ धोखाधड़ी हुई है।

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