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जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो घर से आपको लाना होंगे बिस्तर

-मौसमी बीमारियों से बढ़े मरीज, इलाज के नाम पर मिलता है ठेंगा
जमीन पर लेटकर इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण, सर्दी शुरू, कंबल तक नसीब नहीं

 

गुना

Published: November 19, 2021 12:19:16 am

गुना। मरीजों को सुविधा देने के नाम पर हर वर्ष स्वास्थ्य विभाग करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। इसके बाद भी न तो अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरने को तैयार हैं और न ही अस्पताल प्रशासन की मनमानी के चलते मरीजों को इलाज तक नसीब नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं यदि आपको अपना इलाज कराना है तो आपको जमीन पर ही न लेटना होगा बल्कि आपको अपने लेटने व ओढऩ़े के लिए बिस्तर तक लाना होंगे। अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य मंत्री से लेकर कलेक्टर तक निर्देश देते रहे हैं इसके बाद भी यहां की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को जिला अस्पताल में ओपीडी के समय मरीजों की भीड़ दिखाई दी, लेकिन अधिकतर डॉक्टर अपनी सीट से नदारद दिखाई दिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं व अन्य व्यवस्थाएं को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन डा. हर्षवर्धन जैन, आरएमओ डा. सुधीर राठौर तथा एडमिनिस्टे्रटर डा. शिल्पा टांटिया की है। जिनके वेतन पर शासन हर माह लाखों रुपए खर्च कर रहा है लेकिन इसके बावजूद भी जिला अस्पताल अव्यवस्था हर मामले में आंसू बहा रहा है। यहां बता दें कि इस समय जिला अस्पताल में दो स्थानों पर मेडीकल वार्ड संचालित हैं, एक अस्पताल के मुख्य भवन में तो दूसरा डीईआईसी भवन के फस्र्ट फ्लोर पर। यहां बता दें कि जिला अस्पताल के मुख्य भवन में संचालित मेडीकल वार्ड में 60 से अधिक मरीज भर्ती हैं जबकि डीईआईसी भवन के मेडीकल वार्ड में मात्र 25 मरीज ही भर्ती हैं।
खास बात यह है कि इस अव्यवस्था को निर्मित करने के लिए वार्ड के प्रभारी डॉक्टर ही जिम्मेदार हैं। जो न तो वार्ड की क्षमता देखकर मरीजों को भर्ती कर रहे हैं और न ही मरीजों की परेशानी व शारीरिक हालत को देख रहे हैं। इस समय जिला अस्पताल के मुख्य भवन में संचालित मेडीकल वार्ड पूरी तरह से फुल है। न तो पुरुष वार्ड में जगह है और न ही महिला वार्ड में। यही नहीं गैलरी में भी चारों तरफ अलग अलग बीमारी के मरीज लेटे हुए हैं। इनमें टीबी के गंभीर मरीज भी शामिल हैं। जिनसे अन्य मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा है। वहीं डीईआईसी भवन में संचालित मेडीकल वार्ड में न सिर्फ पलंग खाली पड़े हैं बल्कि गैलरी भी खाली देखी गई।
जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो घर से आपको लाना होंगे बिस्तर
जिला अस्पताल में इलाज कराना है तो घर से आपको लाना होंगे बिस्तर
वृद्ध व श्वांस के मरीज नहीं चढ़ पाते ऊपर
जिला अस्पताल के चिकित्सक इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि वे मरीज को भर्ती करते समय न तो उसकी गंभीर बीमारी देखते हैं और न ही उसकी शारीरिक अक्षमता। यही कारण है कि इन दिनों कई ऐसे मरीज हैं जिन्हें डॉक्टर ने डीईआईसी भवन के फस्र्ट फ्लोर पर भर्ती करने के लिए लिख दिया है। जिससे उन्हें पहले तो सीढिय़ां चढ़कर वार्ड तक जाने में बहुत परेशानी हुई। यहां कहने को लिफ्ट लगी है, लेकिन वह भी अधिकतर बंद रहती है। वहीं अब समय पर डॉक्टर न मिलने की परेशानी भी झेल रहे हैं। क्योंकि इस वार्ड में डॉक्टर नियमित व जरुरत के समय मरीज को उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।
मौसमी बीमारियों ने बढ़ाई ओपीडी
सूत्र बताते हैं कि जिला अस्पताल में मौसमी बीमारियों की वजह से ओपीडी में दिनों-दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। खांसी-जुकाम, वायरल,हृदय से संबंधित आदि के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। यहां इलाज कराने आने वाले कई लोगों ने पत्रिका को बताया कि वे ओपीडी के तहत पर्चा बनवाकर डॉक्टर को दिखाने का इंतजार करते रहे। उनके चेम्बर खाली पड़े हुए थे। जांच के लिए मशीनें हैं लेकिन उनको खराब बताकर बाहर जांच कराने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही एसएनआईसीयू और प्रसूति वार्ड की हालत बेहद खराब है, जहां भी अपेक्षा से अधिक मरीज आ रहे हैं, उनको सुविधा के नाम पर केवल ठेंगा दिखाया जा रहा है।
मरीजों को कंबल तक नसीब नहीं
अस्पताल में भर्ती मरीजों ने पत्रिका को बताया कि इस जिला अस्पताल का तो भगवान ही मालिक है, हमारा मरीज मेडिकल बार्ड है जिसे कंबल तक नसीब नहीं हैं। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि हमको इलाज कराने के लिए घर से बिस्तर तक लाना पड़ते हैं।
गरीब मरीजों पर भारी पड़ रहा निजी डॉक्टर का खर्च
अव्यवस्था का शिकार जिला अस्पताल में गरीब मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वे मरीज जो मजबूरीवश निजी डॉक्टर के पास इलाज कराने तो पहुंच रहे हंै। लेकिन यह खर्च उन पर भारी पड़ रहा है। कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें पैसे उधार लेकर अपना इलाज करवाना पड़ रहा है।
-मुझे सांस लेने में बहुत तकलीफ है। बिना किसी सहारे के मैं खड़ा भी नहीं रह पाता हूं। मैं अस्थमा बीमारी से पीडि़त हूं। डॉक्टर ने भर्ती तो कर दिया लेकिन लेटने पलंग तो क्या फर्श पर भी जगह नहीं है। बैठकर ही बोतल चढ़वाई है। ऐसी हालत में मैं आगे कैसे भर्ती रह पाऊंगा।
सुखराम मरीज

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