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ऋषियों एवं देश के इतिहास को भली भांति जानना है तो संस्कृत आना जरूरी

संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता बोले

गुना

Published: August 22, 2021 11:11:25 am

गुना। संस्कृत भारती द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह के द्वितीय दिवस में ऑनलाइन व्याख्यानमाला का आयोजन गुना जनपद इकाई द्वारा किया गया। जिसमें जिले एवं अन्य स्थानों से कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। मुख्य वक्ता डॉ लक्ष्मी नारायण पांडेय, सेवानिवृत्त प्राध्यापक संस्कृत महाविद्यालय द्वारा संस्कृत एवं संस्कृति पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में ध्येयमंत्र,संस्कृत गीत, परिचय एवं अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कैलाश नारायण मीणा द्वारा की गई।
मुख्य वक्ता डॉ पांडे द्वारा बताया गया कि सम्यक प्रकार से एवं पूर्णता परिष्कृत भाषा है संस्कृत। साथ ही उन्होंने संस्कृत भाषा जानने- सुनने के प्रयोजन पर बताया कि हमें अपने स्वयं के इतिहास पूर्वजों ऋषियों एवं देश के इतिहास को भली प्रकार से जानना है तो संस्कृत का ज्ञान होना आवश्यक है।
हमारे मूल्य, संस्कार ज्ञान, विज्ञान,शिल्प कला, आयुर्वेद चिकित्सा आदि संस्कृत भाषा के ग्रंथों एवं पुस्तकों में समाहित है। संस्कृत भाषा को मात्र कर्मकांड या पंडितों की भाषा मानने के विषय पर उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के ग्रंथों में मात्र 17 प्रतिशत कर्मकांड है एवं शेष 83 प्रतिशत भाग में बौद्धिक संपदा, ज्ञान, विज्ञान, कला दर्शन, इतिहास आदि समाहित है, इसलिए संस्कृत के विषय में पूर्वाग्रहों को छोड़कर संस्कृत भाषा जानना चाहिए।
समाज में पुन: सत्यमेव जयते की स्थापना करनी है। संस्कारों की स्थापना करना है। देश के प्रति समर्पण भाव लाना है तो संस्कृत भाषा का अध्ययन, संभाषण अवश्य करना चाहिए। इस उद्देश्य को लेकर संस्कृत भारती की स्थापना उपरांत इसे एक जन आंदोलन बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया था। पांडे ने बताया कि मनुष्य और पशु में यही अंतर है कि मनुष्यों में मूल्य संस्कार विवेक आदि होते हैं। संस्कृत भारती जनपद गुना के विभाग संयोजक रमेश चंद शर्मा द्वारा अतिथियों एवं विद्वानों का आभार प्रकट किया। जनपद मंत्री नरेंद्र भारद्वाज द्वारा संचालन किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ मुकेश शर्मा के शांति पाठ के साथ हुआ।
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