scriptIn the political battle of Scindia-KP, the project worth crores is not | सिंधिया-केपी की राजनीतिक लड़ाई में करोड़ों का प्रोजेक्ट एफडीडीआई को नहीं मिल पा रही पहचान | Patrika News

सिंधिया-केपी की राजनीतिक लड़ाई में करोड़ों का प्रोजेक्ट एफडीडीआई को नहीं मिल पा रही पहचान

-प्रभारी बोले प्रवेश के लिए युवाओं को पे्रेरित करने को लेकर हम सांसद से भी मिले थे

गुना

Updated: January 25, 2022 01:57:36 pm

गुना। केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से मप्र में छिंदवाड़ा के बाद गुुना जिले की बमौरी विधानसभा के हरिपुर गांव में एक सौ दस करोड़ रुपए की लागत से निर्मित खुला एफडीडीआई (फुटवियर डिजाइन एण्ड डवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट)दम तोड़ता नजर आ रहा है।इसकी वजह ये है कि दूर-दराज क्षेत्रों के बच्चे बहुत कम कनेक्टीविटी न होने के कारण यहां नहीं आ रहे हैं, प्रचार-प्रसार के अभाव में यहां बच्चे भी प्रवेश नहीं ले रहे हैं। कुल मिलाकर ये है कि युवाओं को रोजगार दिलाने का सपना जो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने देखा था वो यहां पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। सिंधिया के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर ध्यान देने के लिए यहां का स्टॉफ वर्तमान सांसद डा. केपी यादव से भी मिला और उनसे यहां अधिक से अधिक युवा प्रवेश लें इसके लिए वे युवाओं को प्रेरित करें इसका आग्रह भी किया था, लेकिन उन्होंने भी सिंधिया के प्रोजेक्ट होने से उस पर ध्यान नहीं दिया। यह प्रोजेक्ट भी सिंधिया-केपी की राजनीतिक लड़ाई में अपनी पहचान खोता जा रहा है।
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सिंधिया के प्रयासों से यहां खुला था भवन
केन्द्र के पूर्व वाणिज्य राज्य मंंत्री व गुना के तत्कालीन सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने संसदीय क्षेत्र को एक सौगात के रूप में पांच -वर्ष पूर्व गुना में फुटवियर डिजाइन एण्ड डवलपमेन्ट इंस्टीट्यूट खुलवाने के प्रयास किए थे। जिसके तहत जमीन की तलाशी गई, इसके लिए तीन स्थान नियत हुए थे। जिसमें एक स्थान गुना रेलवे स्टेशन से दो-ढाई किलोमीटर दूर ही था। शहर से बारह किलोमीटर दूर यानि बमौरी विधानसभा के हरिपुर गांव में सरकारी भूमि चिन्हित कराकर फायनल कराया। उनका स्वार्थ यह था कि यहां इंस्टीट्यूट खुलेगा तो उनकी निजी जमीनों के दाम ऊंचे हो जाएंगे। ऐसा तो हुआ, लेकिन शहर से दूर और अपराधी बाहुल्य क्षेत्र हरिपुर में खोला गया यह इंस्टीट्यूट अपने प्रचार-प्रसार के अभाव में और बच्चों के प्रवेश न लेने से सिंधिया द्वारा देखे गए युवाओं को फुटवियर डिजाइन का कोर्स कराकर स्वरोजगार उपलब्ध करा पाने संबंधी योजना का सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। हां हरिपुर के लोगों को यह फायदा हुआ कि उनकी जमीन के दाम जरूर बढ़ गए थे और उनको इंस्टीट्यूट बनाने के एवज में जमीन देने के बदले अच्छा पैसा भी मिला था।
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सिंधिया ने किया था उद्घाटन
मप्र में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा में खुलने के बाद गुना के हरिपुर में केन्द्रीय मंत्री सिंधिया के प्रयासों से खुला था। इसके लिए बीस एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। इसके बाद केन्द्र सरकार द्वारा मिली स्वीकृति के बाद यहां भवन निर्माण संबंधी काम शुरू हो गया जिस पर लगभग 110 करोड़ रुपए खर्च हुआ था। मगर उसके निर्माण की गुणवत्ता में ध्यान न रखने का हश्र यह है कि मात्र तीन साल में इस भवन में जगह-जगह पलस्तर उखड़ गया था और देखरेख के अभाव में बदनुमा दाग बन गए थे जो इस बात का संदेश दे रहे थे कि इस भवन के निर्माण में गुणवत्ता का कतई ध्यान नहीं रखा गया,हाल ही इस भवन का सुधार कार्य कराया गया है। इस भवन का उद्घाटन 10 अप्रैल 2017 को तत्कालीन गुना-शिवपुरी के सांसद व तत्कालीन वाणिज्य राज्य मंत्री केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया था, इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बमौरी विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन कांग्रेस विधायक महेन्द्र सिंह सिसौदिया ने की थी।
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सिंधिया-केपी की राजनीतिक लड़ाई में करोड़ों का प्रोजेक्ट एफडीडीआई को नहीं मिल पा रही पहचान
सिंधिया-केपी की राजनीतिक लड़ाई में करोड़ों का प्रोजेक्ट एफडीडीआई को नहीं मिल पा रही पहचान

बच्चे भी नहीं आ रहे प्रवेश लेने
इस संस्था से जुड़े कई फैकल्टी के अनुसार में इस संस्था में कहने को आठ फेकल्टी है, बच्चों की संख्या देखी जाए तो इन आठ फेकल्टी में 52 बताई जबकि सीट 60 से अधिक हैं जो हर बार खाली ही रह जाती हैं। इस संस्था में प्रवेश लेने वाले एक छात्र से प्रथम सेमेस्टर के रूप में 87 हजार रुपए ली जाती है। इसके बाद यह फीस घटती व बढ़ती रहती है। नौ का यहां स्टॉफ है जिनके वेतन पर ही हर माह लगभग दस लाख रुपए खर्च होता है। इसके अलावा दूसरे खर्चें भी अलग हैं। बहुमंजिलें मशीनें तो हैं लेकिन पर्याप्त बच्चों के न होने से वह धूल खा रही हैं। बच्चों के अनुसार एक तो शहर से काफी दूर ये संस्था है ओर दूसरी हॉस्टल और संस्था में जो सुविधाएं हमको मिलना चाहिए वे नहीं मिल पा रही हैं।
हंगामा हुआ तो बच्चों को जोधपुर शिफ्ट कर दिया था
बताया गया कि दो-ढाई साल पूर्व यहां पढ़ रहे बच्चों ने कोई सुविधा न मिलने के बाद यहां नाराजगी जाहिर कर हंगामा किया था। उनकी नाराजगी ये थी कि वहां प्रेक्टिकल के लिए लैब, मशीन और स्टॉफ तक नहीं था। जिसके बाद यहां से 35 बच्चों को जोधपुर स्थित एफडीडीआई की संस्था में शिफ्ट कर दिया था।
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ेघाटे में चल रही है संस्था
संस्थान के प्रमुख आरके सिंह मानते हैं कि यहां बच्चों की संख्या और स्टॉफ पर होने वाले खर्चे के अनुपात में गुना में संस्था घाटे में चल रही है। वैसे अधिकतर जगह ऐसी इंस्टीट्यूट मेट्रो सिटी में हैं, केवल यहीं ग्रामीण क्षेत्र में खुली है। उसकी वजह कुछ भी हो सकती है। कम प्रवेश की वजह प्रचार-प्रसार और जागरूकता का अभाव बताया। यहां प्रवेश बढ़े इसके लिए हम सांसद डा. केपी यादव से भी मिले थे, लेकिन उन्होंने भी कोई रूचि नहीं ली थी।

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