झोलाछाप डॉक्टर ने लगाए ऐसे इंजेक्शन, मासूम की थम गई सांसें

सर्दी खांसी से पीड़ित था बच्चा, दो इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत गुना के प्राइवेट अस्पताल लाए तब तक हो गई मौत..

By: Shailendra Sharma

Published: 13 Nov 2020, 06:56 PM IST

गुना/म्याना. झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से एक मासूम बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। यह बच्चा जिले के म्याना थाना क्षेत्र के ग्राम टकनेरा का रहने वाला था। जिसे केवल सर्दी खांसी की शिकायत थी। झोलाछाप डॉक्टर ने जैसे ही बच्चे को दो इंजेक्शन लगाए तो उसकी हालत बिगड़ने लगी आनन फानन में पिता मासूम को लेकर गुना के प्राइवेट अस्पताल में पहुंचा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद म्याना में बच्चे के परिजन ने चक्काजाम कर दोषी झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की। चक्काजाम की खबर लगते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और परिजन को समझाइश देकर शांत कराया।

 

पिता ने दर्ज कराई झोलाछाप डॉक्टर की शिकायत

ग्राम टकनेरा निवासी राजाराम कुशवाह ने बताया कि उसके 6 वर्षीय मोहित को सर्दी खांसी थी। जिसका इलाज कराने वह गुरुवार की देर शाम गांव के एक चिकित्सक रामकृष्ण प्रजापति के पास गया था। उसने बच्चे को दो इंजेक्शन लगाए, एक पैर में और एक हाथ में। थोड़ी ही देर में बच्चे की तबियत खराब हो गई। उसे उल्टी होने लगी। यह देख हम सभी घबरा गए। झोलाछाप डॉक्टर और वह खुद बच्चे को लेकर तत्काल गुना के एक प्राइवेट अस्पताल आए। यहां डॉक्टर ने देखते ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद हम प्राइवेट एंबुलेंस से बच्चे को लेकर सीधे म्याना थाना आए। जहां पुलिस को पूरी घटना बताई। पुलिस ने बच्चे का पीएम कराकर शव सौंप दिया। खास बात यह है कि इस दौरान भी आरोपी झोलाछाप चिकित्सक बच्चे के पिता के साथ ही मौजूद था।

 

सिर्फ नोटिस तक सिमटी झोलाछाप डॉक्टर्स पर कार्रवाई

गुना जिले में लंबे समय से कई झोलाछाप डॉक्टर्स हैं जो काफी समय से अपनी दुकानें भी चला रहे हैं। गलत इलाज के कारण पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है लेकिन इन पर अभी तक कठोर कार्रवाई नहीं हुई है। बीते दिनों सीएमएचओ ने झोलाछाप डॉक्टर्स पर कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन ये कार्रवाई नोटिस तक सिमट कर रह गई। सीएमएचओ कार्यालय इनकी दुकानें बंद नहीं करवा सका है। क्योंकि विभाग की कार्रवाई सिर्फ नोटिस देने तक सीमित है। समय-समय पर कार्रवाई दिखाने के लिए झोलाछाप डॉक्टर्स की दुकानें सील भी की गईं लेकिन यह दुकानें कब और कैसे खुल गईं यह जानकारी स्थानीय नागरिकों को तक नहीं है। यहां बता दें कि शासन की गाइड लाइन के तहत जिन डॉक्टर्स ने सीएमएचओ कार्यालय में पंजीयन नहीं कराया या फिर वह अपनी पैथी छोड़ दूसरी पैथी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं तो वे झोलाछाप की श्रेणी में आते हैं। ऐसा इस समय अधिकांश डॉक्टर कर रहे हैं लेकिन विभाग यह सब देखकर अनजान बना हुआ है।

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