जेनेरिक की जगह लिख रहे हैं ब्रांडेड दवाईयां, सुविधाओं के नाम पर ठेंगा

जेनेरिक की जगह लिख रहे हैं ब्रांडेड दवाईयां, सुविधाओं के नाम पर ठेंगा

By: दीपेश तिवारी

Published: 25 Apr 2018, 03:13 PM IST

गुना। जिला अस्पताल में मरीजों को सुविधाओं के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है। इलाज कराने आए मरीजों या प्रसूति के लिए आने वाली महिलाओं को अपने पसंदीदा निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जा रहा है। वहीं सरकारी डॉक्टरों को शासन की ओर से पर्याप्त वेतन मिल रहा है, इसके बाद भी दवाई कंपनियों से कमीशन के फेर में वे जेनेरिक दवाईयां न लिखकर ब्राण्डेड दवाईयां लिख रहे हैं।

जिनको खरीदकर भोले-भाले गरीब मरीज लुट रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के आदेश हैं कि कोई भी डॉक्टर ब्राण्डेड दवाई न लिखे, मगर इस आदेश को गुना के अधिकतर सरकारी डॉक्टर मानने तैयार नहीं है। कुल मिलाकर ये है कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। सूत्रों ने बताया कि अधिकतर सरकारी डॉक्टर जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं नाम-मात्र की दे रहे हैं। वहां वे दिखावे के लिए एक-दो जेनेरिक दवाएं लिख रहे हैं। बाकी अपने निजी अस्पताल या अपने नजदीकियों के नर्सिंग होम में जाकर मरीजों के परिजनों को ब्राण्डेड दवाओं के नाम पर लुटवा रहे हैं।

सेन ने कहा, बाजार से लेना पड़ी दवाएं
कुंभराज से आए मांगीलाल बताते हैं कि मैंने अपने बच्चे को सरकारी अस्पताल में न मिलने पर उनके क्लीनिक पर दिखाया तो उन्होंने लंबा-चौड़ा पर्चा लिख दिया, जिसकी दवाईंयां लगभग 1०००-12०० की आई थीं। वे दवाईयां अस्पताल में नहीं थीं।

जेनेरिक मात्र सरकारी अस्पतालों के लिए
बताया जाता है कि जेनेरिक दवाएं केवल सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होती हैं। जबकि ब्राण्डेड दवाई काफी महंगी होती है और इनका प्रचार-प्रसार एमआर करते हैं जो ब्राण्डेड दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों को इसके एवज में अलग-अलग सेवाएं भी करते हुए देखे जा सकते हैं। निजी प्रैक्टिस में डाक्टर ब्रांडेट दवाएं ही लिखते हैं।

जेनेरिक प्रभावशाली और असरकारी दवा
जेनेरिक दवाएं प्रभावशाली, असरकारी होती हैं। इसके बाद भी ज्यादातर डॉक्टर मरीजों को जेनेरिक की जगह ब्राण्डेड दवाईयां लेने पर जोर देते हैं। जैसे जेनेरिक दवाओं में पैरासिटामॉल और ब्राण्डेड में क्रॉसिन, जेनेरिक सिटराजिन और ब्राण्डेड में एलसीडेन्ट, जेनेरिक में फेरस और ब्राण्डेड में आर्वीटोल समेत कई दवाएं हैं।

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दीपेश तिवारी
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