केदारनाथ के जंगल में मिले तेंदुआ और भालू के पगमार्ग

केदारनाथ धाम के जंगल में तेंदुआ और भालू विचरण कर रहे हैं। इसकी पुष्टि वन्य प्राणी सर्वेक्षण में हुई है। दोनों जानवरों के पगमार्ग और मल मिला है।

By: praveen mishra

Published: 13 Mar 2018, 09:19 AM IST

गुना. केदारनाथ धाम के जंगल में तेंदुआ और भालू विचरण कर रहे हैं। इसकी पुष्टि वन्य प्राणी सर्वेक्षण में हुई है। दोनों जानवरों के पगमार्ग और मल मिला है। वन विभाग की टीम ने केदारनाथ की बीट पर ३ दिन तक सर्वे किया है।
इसमें दोनों मांसाहारी जानवरों के होने के संकेत मिले हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण जानवर पेंगुलिन होने की भी पुष्टि हुई है। इसकी सबसे ज्यादा तस्करी होती है, इसलिए यह प्रजाति विलुप्त होती जा रही है। विभाग ने १३९ बीटों पर ३ दिन तक सर्वे किया। इसमें भेडिय़ा, लोमड़ी, जंगली सुअर, शियार आदि बड़ी सं या में मिले हैं।

मांसाहारी जानवरों का सर्वे तीन दिन तक चला और सोमवार से शाकाहारी जानवरों का सर्वे शुरू हो गया है। यह सर्वे राष्ट्रीय स्तर से कराया जा रहा है। वन संरक्षक डीएस कनेश ने बताया, केदारनाथ बीट पर तेंदुआ और भालु के होने की पुष्टि हुई है। उनका विस्टा मिला है। शाकाहारी जानवरों का सर्वे सुबह ६ बजे से दोपहर २ बजे तक होगा। शाकाहारी जानवर पानी की तलाश में भी होती हैं। पानी के स्त्रोतों के पास सर्वे होगा। इसके पहले सुबह ६ बजे से ८.३० के बीच सर्वे किया गया था। इसमें १६० से ज्यादा कर्मचारियों ने सर्वे किया था। रैंजर और डिप्टी रैंजरों ने मॉनीटरिंग की।

फैक्ट फाइल
२२०० वर्ग किमी में फैल हुआ है गुना का जंगल।
गुना में सबसे ज्यादा सागौन के पेड़ हैं, बीनागंज, आरोन में तस्करी भी होती है।
गुना का जंगल में वल्र्ड लाइफ भी है, यहां तेंदुआ भालू भी हैं।
इस जंगल में तेंदुपत्ता का भी उत्पादन होता है।
शेष जंगल में सभी प्रजाति के पेड़ पौधे मौजूद हैं।

सड़क से नहीं जुड़ सके गांव
धरनावदा . एक ओर जहां प्रधानमंत्री सड़क योजना से गांवों को जोड़ा जा रहा है, लेकिन क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं जो सड़क से नहीं जुड़ सके। ऐसा ही मामला बालाभेंट से लेकर रुठियाई के बीच आने वाले गांव का है। यह मार्ग मात्र 7 किलोमीटर का है, लेकिन इस मार्ग में पांच से छह छोटे गांव आते हैं। यहां के निवासियों ने बताया यहां पर कभी सड़क डाली ही नहीं गई। कई बार यहां के निवासी मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई असर नहीं हुआ है। बालाभेट से दावतपुरा बिशनपुरा, रजना खेड़ी, रघुनाथपुरा ऐसे कहीं छोटे गांव इस मार्ग में आते हैं। लोगों ने बताया, अगर यह रोड बन जाता है तो कई छोटे गांव रुठियाई से जुड़ जाएंगे और बारिश में आने वाली असुविधाओं से यह लोग बच जाएंगे। बारिश के दिनों में कई छोटे रास्ते बंद हो जाते हैं और लोगों को परेशानी होती है।

praveen mishra
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned