बढ़ रही है सीटें और कम हो रहे आवेदन, 50 प्रतिशत से भी कम आवेदन पहुंचे

बढ़ रही है सीटें और कम हो रहे आवेदन, 50 प्रतिशत से भी कम आवेदन पहुंचे

Amit Mishra | Publish: May, 29 2019 12:05:13 PM (IST) | Updated: May, 29 2019 12:05:14 PM (IST) Guna, Guna, Madhya Pradesh, India

आरटीई से लोगों का मोहभंग या क्रियान्वयन में कमी...

गुना। जिले में आरटीई से लोगों को मोह भंग हो रहा है या फिर इसके क्रियान्वयन में कोताही बरती जा रही है। पिछले साल की तरह इस साल भी सीटें खाली रहने की आशंका है। प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करने अब केवल एक दिन शेष है और अब तक आधी से भी कम सीटों के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि कमजोर ओर वंचित वर्ग के बच्चों को प्राईवेट स्कूलों में शिक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। हर साल की तरह इस साल भी प्राईवेट स्कूलों ने नियमानुसार 25 प्रतिशत खाली सीटों की घोषणा कर दी थी। जो पिछले साल की अपेक्षा अधिक थीं।

आज का दिन बचा है...
इन सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया 30 अप्रैल से शुरू हुई थी और 29 मई को ऑन लाइन आवेदन बंद हो जाएंगे। यानी आवेदन करने के लिए अब केवल बुधवार को दिन ही शेष है। एक्ट के तहत निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन करने एक महीने का समय दिया गया था। लेकिन इस एक महीने में बच्चों के अभिभावकों ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई।


पूरे जिले में 587 प्राईवेट स्कूलों ने कुल 6 हजार 999 सीटें प्रवेश के लिए दर्शायी थीं। इनके विरुद्ध सोमवार शाम तक केवल 2 हजार 375 बच्चों के ही आवेदन ऑन लाइन किए गए हैं। जो घोषित संख्या का मात्र 34 प्रतिशत हैं। यानी अब भी 66 प्रतिशत सीटों के लिए आवेदन ही किया गया है। जिससे बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाएंगी।

जटिलताओं और लंबे इंतजार ने किया परेशान
हर मां-बाप अपने बच्चे को प्राईवेट स्कूल में अच्छी शिक्षा दिलावाना चाहते हैं। तो फिर क्या कारण है कि वे सरकारी योजना के तहत मिलने वाले निशुल्क एडमीशन के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं। अधिकांश लोगों को या तो प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में जानकारी नहीं है, या फिर लोग योजना के नियम शर्तों व जटिलताओं से परेशान हैं।

इसके साथ ही प्रवेश के लिए एक बार ही लाटरी हो रही है। जिसके कारण आवेदन करने के बाद भी कई बच्चे इसके लाभ से वंचित रह जाते हैं। प्रवेश के लिए महीनों इंतजार भी करना पड़ता है। लंबी और उबाऊ प्रवेश प्रक्रिया तथा प्रवेश की गारंटी न होने के कारण भी अभिभावक इससे दूर हो रहे हैं।


बढ़ रही हैं सीटें घट रहे हैं आवेदक
आरटीई के तहत प्रवेश के लिए हर साल जिले में सीटें तो बढ़ रही हैं, लेकिन आवेदक कम होते जा रहे हैं। जिससे सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना खटास में पड़ती नजर आ रही है। पिछले वर्ष जहां जिले भर में कुल 6 हजार 500 सीटें थी, वहीं इस बार इनकी सं या 6 हजार 999 हो गई है। पिछले सत्र में 4 हजार 419 अभिभावकों ने इसके तहत आवेदन किया था, जिनमें से करीब 3 हजार 300 बच्चों को प्रवेश दिया गया था। लेकिन इस बार यह आंकड़ा और कम होता दिखाई दे रहा है।

सुधरवा सकते हैं गलत मोबाइल नंबर
जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों के प्रवेश के लिए आवेदन किया है। उनके मोबाइल नंबर गलत हो जाने के कारण ओटीपी नहीं आ रहा है। जिसके कारण अभिभावक चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे अभिभावकों को बीआरसीसी कार्यालय जाकर आवेदन नंबर, समग्र आईडी, बच्चे का नाम, पिता का नाम, जन्म दिनांक, गलत मोबाइल नंबर व सही मोबाइल नंबर लिखकर देना होगा। बीआरसीसी मोबाइल नंबर सही कर देंगे और ओटीपी उन्हें मिल जाएगा। इसके बाद जानकारी में परिवर्तन किया जा सकता है।


सत्यापन में भी पिछड़े
आवेदन करने के साथ ही आवेदनों व दस्तावेजों के सत्यापन का काम भी जारी है। लेकिन इसमें भी जिले के सभी विकासखंड पिछड़ रह हैं। डीपीसी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 50 प्रतिशत आवेदनों का ही सत्यापन हो पाया है। इनमें भी सबसे फिसड्डी बमोरी विकासखंड है। यहां न के बराबर सत्यापन कार्य अब तक हुआ है। सत्यापन के लिए भी मात्र दो दिन बचे हैं। 30 मई तक सत्यापन कराया जाना है।


ये है आगामी कार्यक्रम
पालकों द्वारा सत्यापन कराया जाना 30 मई तक
सत्यापन प्रपत्र अपलोड करना 5 जून तक
ऑनलाइन लॉटरी 12 जून को
पोर्टल से आवंटन पत्र डाउनलोड करना है 12 से 20 जून
निजी स्कूलों द्वारा प्रवेश देना 13 से 25 जून
प्रवेशित बच्चों की आरटीई के पोर्टल पर रिपोर्टिंग 13 से 30 जून तक करनी होगी।

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