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पत्रिका बिग इश्यू : डेढ़ महीने में कई बार खाद लेने लाइन में लगे, मिला सिर्फ टोकन

क्या ऐसे ही खेती लाभ का धंधा बनेगी
खाद लेने घंटों लाइन में लगे, नंबर आया तब पता चला खाद खत्म
- 2022 मैट्रिक टन डीएपी खाद एक दिन बंटने के बाद ही हुआ खत्म
- 10 दिन पहले जिन सैकड़ों किसानों को टोकन बांटे उन्हें मिला ही नहीं
- सर्द रातों में मंडी में ही खुले में ठहरने को मजबूर किसान
- बोले, बड़े किसानों को रात में की जा रही ब्लैक, छोटे किसानों को टोकन के बाद भी नहीं नसीब नहीं

गुना

Published: November 17, 2021 11:56:38 pm

गुना. हम पिछले कई सालों से खेती करते आ रहे हंै लेकिन वर्तमान में जो हालात देखने को मिल रहे हैं, ऐसे हमने कभी नहीं देखे। बीते तीन सालों में तो और भी ज्यादा स्थिति खराब हुई है। मौजूदा समय में किसानों को फसल पैदा करने से लेकर बेचने में जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसे देखकर तो ऐसा लगता है जैसे खेती को छोड़कर किराना की दुकान खोल लें। यह पीड़ा नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी में टोकन के लिए अलसुबह लाइन में लगे किसानों की है। जिन्होंने पत्रिका को अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि पिछले डेढ़ माह से लगातार वह मंडी में आ रहे हैं। कभी शासकीय अवकाश तो कभी लंबी लाइनों के चक्कर में आज तक खाद नहीं ले पाए हैं। धीरे-धीरे बोवनी का समय निकलता जा रहा है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो बिना खाद के बोवनी करनी पड़ेगी।
जानकारी के मुताबिक बीते 15 दिनों में दो बार ओडीसा से डीएपी खाद की रैक आ चुकी है। जिसमें 5 हजार मैट्रिक टन से अधिक खाद आया था। रैक आने के बाद मालगाड़ी से सीधे ट्रकों में लोड कर खाद राज्य विपणन संघ के डबल लॉक गोदामों को भेज दी गई। जिसके बाद एक दो दिन ही इन गोदामों पर खाद का वितरण हुआ और अगले दिन ही खाद खत्म होने की घोषणा कर दी। इसी बीच त्यौहारों की छुट्टियां भी पड़ गईं, जिससे खाद लेने का इंतजार और लंबा खिंचता चला गया। यह स्थिति आज तक बनी हुई है। जिले की किसी भी विधानसभा क्षेत्र के किसानों को अभी तक पर्याप्त खाद नहीं मिला है।
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पत्रिका बिग इश्यू : डेढ़ महीने में कई बार खाद लेने लाइन में लगे, मिला सिर्फ टोकन
पत्रिका बिग इश्यू : डेढ़ महीने में कई बार खाद लेने लाइन में लगे, मिला सिर्फ टोकन

छोटे किसान लाइन में, बड़ों को ब्लैक हो रहा
नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी वितरण केंद्र पर खाद लेने आए किसान रामसिंह ने बताया कि वह पिछले सात दिनों से मंडी आ रहा है। सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक लाइन में लगने के बाद उसे किसी तरह टोकन हासिल हो सका। लेकिन उस पर 29 नवंबर की तारीख लिख दी गई। यह तारीख लाइन में लगे सैकड़ों किसानों को दी गई है। इसे देखकर यह समझ नहीं आ रहा कि अभी तो सिर्फ टोकन मिला है, खाद लेने के लिए कितने दिन और इंतजार करना पड़ेगा। किसान का आरोप है कि वह पिछले काफी समय वितरण केंद्र को देख रहा है, यहां हर दिन लाइन में लगने वाले छोटे किसान हैं। जबकि ज्यादा जमीन वाला बड़ा किसान अभी तक उन्होंने लाइन में नहीं देखा। वहीं रास्ते में डीएपी खाद के कट्टों से भरी कई ट्रॉलियां देखी हैं जो सीधे बड़े किसानों के पास पहुंच रही हैं। गांव में भी कई बड़े किसान ऐेसे हैं जिनके पास पर्याप्त खाद पहुंच चुका है और उन्होंने बोवनी भी कर दी। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि गोदाम से रात में ही खाद ब्लैक हो रहा है।
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अन्नदाता के साथ हो रहा गलत व्यवहार
पत्रिका टीम ने जिला मुख्यालय पर नानाखेड़ी मंडी सहित बमोरी के बागेरी गोदाम पर जाकर वितरण व्यवस्था देखी। इस दौरान सामने आया कि व्यवस्था के नाम पर किसानों के साथ गलत व्यवहार हो रहा है। सबसे पहले बात करते हैं नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी वितरण केंद्र की। जहां किसानों को तीन जगह लाइन में लगना पड़ता है। पहले टोकन के लिए, जहां कर्मचारी अपनी मनमर्जी से कभी टोकन देना बंद कर देते हैं। यहां किसान अलसुबह 5 बजे से ही लाइन में लग जाता है लेकिन कर्मचारी 12 बजे तक आते हैं और 4 बजे से पहले ही टोकन देना बंद कर देते हैं। दूसरी लाइन मंडी समिति कार्यालय परिसर के अंदर लगवाई जा रही है। जहां बहुत कम किसानों को अंदर लाइन में लगने दे रहे हैं। जबकि बाहर खड़े किसानों के पास टोकन भी मौजूद है। यदि कोई किसान अपनी बात सशक्त रूप से रखता है तो पुलिस अपना रौब झाड़ते हुए मामला दर्ज कराने की धमकी देने लगते हैं। ऐसे में किसान असहाय होकर रह गया है।

महीने भर खाद के लिए लाइन में तो, जुताई और पानी कब देगा
शासन-प्रशासन जानकर भी अन्नदाता की परेशानी को अनदेखा कर रहा है। अक्टूबर माह से खाद वितरण शुरू हुआ था, नवंबर माह आधा गुजर चुका है। 15 दिसंबर तक बोवनी का समय है। डेढ़ माह गुजरने के बाद भी खाद के लिए अन्नदाता लाइन में लगा है। ऐसे में उसकी पीड़ा है कि बोवनी से पहले खेतों को तैयार करना पड़ता है। पहले जुताई की जाती है फिर उसमें पानी दिया जाता है। इस काम में भी काफी समय लगता है। जिस किसान परिवार में खेती करने वाले ज्यादा सदस्य नहीं हैं वह तो ऐसे हालातों में खेती कर ही नहीं पाएगा। 10 बीघा वाले किसान को खाद के 5 कट्टे चाहिए लेकिन उसे 2 कट्टे ही दिए जा रहे हैं। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि 3 कट्टों के लिए किसान को कब तक और कितनी बार लाइन में लगना पड़ेगा।
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शनिवार को ओडीसा से आई थी 2022 मैट्रिक टन खाद
लंबे इंतजार के बाद शनिवार को ओडीसा से 2022 मैट्रिक टन डीएपी लेकर मालगाड़ी गुना पहुंची थी। जहां से खाद के कट्टे ट्रकों में भरकर राज्य विपणन संघ के सभी डबल लॉक गोदामों पर भेजे गए थे। इनमें राज्य विपणन संघ के गुना वेयर हाउस पर 550, बमोरी में 527, आरोन में 300, राघौगढ़ में 200, बीनागंज में 200, कुंभराज में 150 मैट्रिक टन के अलावा फतेहगढ़ 25 तथा मधुसूदनगढ़ 30 व अन्य केंद्रों के लिए 40 टन खाद भेजी गई थी। रविवार को शासकीय अवकाश रहा। सोमवार को खाद वितरण हुआ लेकिन मंगलवार दोपहर 12 बजे ही खाद खत्म होने की बात कह दी गई।
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