scriptMonday Mega Story: Annadata angry with fertilizer distribution system | मंडे मेगा स्टोरी : खाद वितरण व्यवस्था से अन्नदाता नाराज | Patrika News

मंडे मेगा स्टोरी : खाद वितरण व्यवस्था से अन्नदाता नाराज

- सभी काम छोड़ भूखे-प्यासे सुबह 5 बजे से लाइन में लगने को मजबूर हुए किसान
- दीपावली के लंबे अवकाश के बाद सिर्फ जिला मुख्यालय स्थित नानाखेड़ी मंडी से बांटी जा रही खाद
- अन्य डबल लॉक गोदाम व सहकारी समितियों से वितरण न होने से किसानों की परेशानी बढ़ी
- रविवार के अवकाश के कारण निजी दुकानें भी बंद
- किसान बोले, बिना खाद के कैसे करें बोवनी
- कई किसानों के पुराने टोकन किए रद्द, अब नया टोकन लेने करना पड़ेगी जद्दोजहद

गुना

Published: November 08, 2021 01:14:20 pm

गुना. सरकार के आश्वासन और प्रशासन के कुप्रबंधन के चलते अन्नदाता की मुसीबतें लगातार बढ़ती ही चली जा रही हैं। किसानों को हर दिन नई-नई तारीखें दी जा रही हैं कभी टोकन के लिए तो कभी खाद वितरण के लिए। अन्नदाता को समझ नहीं आ रहा है कि क्या उसे सही समय पर खाद मिल पाएगी और वह बोवनी कर पाएगा। पर्याप्त खाद की उपलब्धता न होने और किसानों की संख्या के हिसाब से वितरण सेंटर चालू न होने से अन्नदाता को खाद लेने के लिए बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही नजारा रविवार को जिला मुख्यालय पर नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी परिसर में देखने को मिला।
यहां सुबह 5 बजे से ही किसान लाइन में लग चुके थे। यह लाइन इतनी लंबी थी कि जितना कार्यालय परिसर में जगह थी, उसकी दीवार तक लोग लाइन में थे। इनमें कुछ खड़े थे जबकि कुछ के शरीर ने जवाब दे दिया था इसलिए वे जमीन पर ही बैठे हुए थे। इस लाइन में लगने की इजाजत सिर्फ उन्हीं किसानों को थी जिनके पास 9 नवंबर तक के टोकन हैं। इस तारीख के बाद वाले टोकन जो किसान लेकर आए थे उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। क्योंकि प्रशासन ने ऐसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की थी कि इन किसानों को भी खाद दिया जा सके।
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मंडे मेगा स्टोरी : खाद वितरण व्यवस्था से अन्नदाता नाराज
मंडे मेगा स्टोरी : खाद वितरण व्यवस्था से अन्नदाता नाराज
आज टोकन बंटेंगे या नहीं, किसी को कुछ नहीं पता
खाद वितरण को लेकर प्रशासन द्वारा किसानों को सही जानकारी नहीं दी जा रही है। इसी वजह से किसान की परेशानी दोगुनी हो गई है। वह पहले ही आसानी से व समय पर खाद न मिलने से परेशान हैं। ऐसे में सही जानकारी न मिलने से वह किराया खर्च कर या अपने निजी साधन से जिला मुख्यालय आता है लेकिन यहां आकर जब उसे पता चलता है कि आज उसे खाद नहीं मिल पाएगा तथा टोकन भी वह नहीं ले सकेगा। यह जानकार उसे बहुत ज्यादा दुख होता है तथा अधिकारियों के प्रति गुस्सा भी आ रहा है लेकिन वह इस समय जाहिर नहीं कर पा रहा है। ऐसी ही स्थिति रविवार को नानाखेड़ी मंडी में देखने को मिली। यहां दो जगह किसानों की लंबी लाइन लगी थी। एक मंडी कार्यालय परिसर के अंदर तो दूसरी लाइन गोदाम के पास टोकन लेेने के लिए। पत्रिका टीम जब यहां पहुंची तो दोपहर 11 बजे आधा सैकड़ा से अधिक किसान लाइन में लगे हुए थे। लेकिन टोकन बांटे जाने वाले कक्ष पर ताला लगा हुआ था। किसानों ने बताया कि वह यहां सुबह 7 बजे से लाइन में यह सोचकर लगे थे कि उनका नंबर जल्द आ जाएगा और वे टोकन लेकर सही समय पर घर पहुंच जाएंगे। लेकिन दोपहर 12 बजे तक कोई भी नहीं आया। कुछ किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों को फोन लगाया तो उन्होंने पहले कहा कि 12 बजे के बाद टोकन बांटे जाएंगे। क्योंकि आज रविवार की छुट्टी है तथा किसानों की संख्या भी कम है। लेकिन थोड़ी देर बाद कृषि अधिकारी ने रविवार की छुट्टी की बात कहकर टोकन न बांटे जाने की बात कह दी। इससे नाराज होकर सभी किसान एकत्रित होकर मंडी कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने कुछ ही देर बाद टोकन बंटवाने की बात कही और तब जाकर टोकन बंटना शुरू हुआ। यह सभी किसान सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में लगे थे, जिन्हें एक बार फिर लाइन में खड़ा होना पड़ा।
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वितरण व्यवस्था में ये हैं खामियां
प्रशासन और कृषि विभाग के पास यह आंकड़ा पहले से मौजूद हैैं कि कितने हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की बोवनी की जानी है। मौजूदा मौसम को देखते हुए बोवनी कब तक किया जाना किसान के लिए फायदेमंद है। इसके लिए कितनी डीएपी खाद की जरूरत है। यह सब डाटा होने के बावजूद शासन-प्रशासन ने समय पर पर्याप्त खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की। सिर्फ प्रेस बयान जारी कर यह कहते रहे कि पर्याप्त खाद उपलब्ध है, किसान को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन जब डबल लॉक गोदाम व निजी दुकानों पर खाद के लिए मारामारी शुरू हुई तो आनन फानन में प्रशासन ने 40 सहकारी समितियों को वितरण केंद्र बनाकर नाम की सूची जारी कर दी। लेकिन 15 दिन बाद भी इन सभी समितियों पर खाद तक नहीं पहुंच पाया है। वहीं निजी खाद विक्रेताओं की संख्या कम होने से दुकानदार कालाबाजारी कर रहे हैं। यह प्रशासनिक कार्रवाई से कई बार प्रमाणित हो चुकी है।
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दो सैकड़ा से अधिक किसान, लेकिन काउंटर सिर्फ एक ही
नानाखेड़ी मंडी कार्यालय में रविवार को दो सैकड़ा से अधिक किसान खाद लेने आए थे। लेकिन लाइन में सिर्फ वही किसान लग पाए जिन पर 9 नवंबर तक का टोकन था। इसके बावजूद लाइन काफी लंबी हो गई। ऐेसे में एक किसान को 4 कट्टा खाद लेेने के लिए 5 से 6 घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे हालातों को देखते हुए लाइन में लगे भूखे-प्यासे किसानों का कहना था कि यदि काउंटर की संख्या बढ़ाकर दो कर दी जाती तो कम से कम उन्हें इतना लंबा इंतजार न करना पड़ता। खाद के लिए मारामारी इतनी है कि लाइन में से निकलकर न तो टॉयलेट के लिए जा सकते और न पानी पीने। यदि रिस्क लेकर चले गए तो विवाद की स्थिति बन जाती है।
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दावा और हकीकत
कृषि विभाग ने दावा किया है कि वर्तमान में 22250 मैट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। 1250 टन डीएपी की नई रैक प्राप्त हुई है। इस बार 3.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। ज्यादातर किसान अब तक बोवनी कर चुके हैंं। जिन्हें 10 हजार टन डीएपी बांटा जा चुका है। इसकी जमीनी हकीकत यह है कि जिले में राज्य विपणन संघ के 7 डबल लॉक गोदाम हैं। लेकिन कृषि विभाग ने 6 नवंबर को जारी प्रेस नोट में खाद वितरण के लिए सिर्फ नानाखेड़ी मंडी वाले डबल लॉक गोदाम का ही उल्लेख किया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पर्याप्त खाद है तो अन्य केंद्रों पर वितरण क्यों नहीं किया जा रहा। किसानों को 50 से 70 किमी दूर से गुना आकर खाद लेकर जाना पड़ रहा है, जो उन्हें काफी महंगा पड़ रहा है।
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जरा इनकी भी सुनो
मैंने नानाखेड़ी मंडी में 25 अक्टूबर को लाइन में लगकर टोकन लिया था। जिसके आधार पर मुझे 3 नवंबर को खाद मिलना था। लेकिन जब वह यहां आया तो बताया गया कि इस दिन के सभी टोकन प्रशासन ने रद्द कर दिए हैं। इसकी वजह बताई कि यह टोकन बहुत ज्यादा किसानों को बांटे गए थे। इसलिए अब तुम्हें फिर से टोकन लेना होगा। रविवार को जब वह मंडी आए तो लंबी लाइन देखकर घबरा गए। इसके बावजूद वह सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक लाइन में लगे लेकिन फिर भी टोकन नहीं मिल सका।
इरफान खान, किसान मावन

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