ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टर के बाद मरीज भी निकला कोरोना पॉजिटिव

पत्रिका अलर्ट : कहीं यह लापरवाही सामुदायिक संक्रमण की वजह न बन जाए
ग्रामीण क्षेत्र में क्लीनिक पर इलाज करा रहे 5 मरीजों में से एक का सैंपल लिया तो निकला पॉजिटिव
गांव में हर घर में एक सदस्य बीमार, बुखार आने पर आसपास के गांव में अप्रशिक्षित डॉक्टर से करवा रहे इलाज
ग्रामीणों को डर, यदि एक ने कोरोना की जांच कराई तो सभी को कर देंगे घर में बंद
मधुसूदनगढ़ के उकवद गांव में प्रशासन के औचक निरीक्षण में मामला आया सामने
इससे पहले कोरोना पॉजिटिव डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करते पकड़ा जा चुका है

By: Narendra Kushwah

Published: 17 May 2021, 10:23 PM IST

गुना. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भले ही बीते कुछ दिनों से कोरोना का ग्राफ गिरता हुआ दर्शा रहे हैं लेकिन यह वास्तविक स्थिति नहीं हैं। क्योंकि जब कोरोना के मरीज बढ़े तो घबराकर प्रशासन ने पूरे जिले भर में कोरोना कफ्ूर्य लागू कर सख्ती से पालन करना शुरू कर दिया। वहीं गंभीर मरीजों की संख्या से सरकारी व निजी अस्पताल फुल गए। सरकारी अस्पतालों में सामान्य ओपीडी को बंद कर दिया गया। यहां जांच कराने आने वाले हर मरीज को कोविड संदिग्ध के रूप में देखा जाने लगा। इसी बीच तत्कालीन कलेक्टर का वह आदेश जिसके तहत हर कोरोना सैंपल देने वाले को तब तक संस्थागत क्वारंटीन रहना पड़ेगा जब तक कि उसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती। यह सभी स्थितियों ने शहर से लेकर गांव वालों को घरों ेके अंदर कैद रहने को मजबूर कर दिय।
जिसके परिणामस्वरूप ऐसे लोग भी अपना इलाज नहीं करा पा रहे थे जिन्हें हल्का बुखार, सर्दी जुकाम या खांसी है। तब से लेकर अभी तक लगभग हर व्यक्ति अपना इलाज प्राइवेट डॉक्टर्स से ही करा रहे हैं। लेकिन यह इलाज ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हर तरह से भारी पड़ रहा है। इसके हाल ही में कई उदाहरण सामने आ चुके हैं।
सबसे पहला मामला सिरसी थाना क्षेत्र में सामने आया था। जहां कोरोना पॉजिटिव अप्रशिक्षित डॉक्टर ही ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों का इलाज करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके बाद दूसरा मामला मधुसूदनगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम उकावद में सामने आया है। जहां क्लीनिक पर इलाज करा रहे पांच मरीजों में से एक की जब एंटीजन किट से जांच की गई तो वह कोरोना पॉजिटिव निकला। कुल मिलाकर यह दोनों ही स्थिति ग्रामीण क्षेत्र सामुदायिक संक्रमण का कारण बन सकती हैं।
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गांव की जमीनी स"ााई, हर घर में एक बीमार
कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे Óयादा ग्रामीण क्षेत्र को अपनी चपेट में लिया है। इसकी गवाही स्वास्थ्य विभाग की हर दिन की कोरोना रिपोर्ट भी दे रही है। वहीं अधिकारी भी नाम न छापने की शर्त पर इससे इंकार नहीं कर रहे हैं। पत्रिका ने भी ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले अलग-अलग लोगों से बात की, जिसमें जमीनी हकीकत जो सामने आई है वह भी चौकाने वाली तो नहीं है क्योंकि इसकी जानकारी सभी को है लेकिन कोई भी खुलकर नहीं कहना चाहता। इस समय में गांव में रहने वाले प्रत्येक परिवार में एक सदस्य तो बीमार है ही। चूंकि उन्होंने कोरोना की जांच नहीं कराई है इसलिए उन्होंने सरकारी रूप से कोरोना पॉजिटिव नहीं कहा जा सकता है।
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क्लीनिक पर 5 मरीजों को चढ़ रही थी ड्रिप
मधुसूदनगढ़ तहसील के नजदीकी ग्राम उकावद में उस समय हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई जब वहां अचानक प्रशासनिक टीम पहुंची। डॉ एसएल कश्यप की क्लीनिक में पांच मरीजों को ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। इनमें से एक मरीज से जब लक्षणों की जानकारी ली तो उसके आधार पर उसका रैपिट एंटीजन किट से सैंपल लिया गया तो वह पॉजिटिव निकला। यह देखते ही सभी घबरा गए। आनन फानन में अन्य मरीजों का भी सैंपल लिया गया है, जिन्हें रिपोर्ट आने तक होम क्वारंटीन जबकि पॉजिटिव मरीज को स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती करा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि एसडीएम के नेतृत्व में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित निरीक्षण के क्रम में उकावद गांव में पहुंची थी।
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मारकीमहू गांव में तो कोरोना पॉजिटिव डॉक्टर ही कर रहा था इलाज
जिले के सिरसी थाना क्षेत्र के ग्राम मारकी महू में 14 मई को प्रशासनिक टीम की छापामार कार्रवाई के दौरान कोरोना पॉजिटिव डॉक्टर ही मरीजों का इलाज करते हुए पकड़ में आ गया। दल के सदस्यों ने बताया कि डॉ सुबीर दत्त जो स्वयं कोरोना पॉजीटिव था, इसके बाद भी वह गांवों के लोगों का इलाज कर रहा था। जानकारी मिलने पर वहां टीम पहुंची तो सूचना सही पाई गई। मौके पर न तो कंटेनमेंटजोन का पोस्टर लगा मिला और न ही क्लीनिक पर मरीजों के बीच सोशल डिस्टेसिंग। जिसके आधार पर डॉक्टर के खिलाफ सिरसी पुलिस थाने में धारा 188, 269,270 के तहत मामला दर्ज कराया गया।

Narendra Kushwah Reporting
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