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गुना में 50 से अधिक कुओं को कचरे से पाटकर निर्माण कराने की तैयारी

कुओं पर पक्का निर्माण हो जाने से रिचार्ज होना बंद हो गया और उसके आसपास के जल स्त्रोत भी रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं।

गुनाJun 17, 2024 / 12:45 pm

Ashish Pathak

guna hindi news

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गुना। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि जल संरक्षण सप्ताह के तहत जल स्त्रोत तलाशे जाएं, उनको रिचार्ज कराने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए, जिससे आगामी आने वाले समय में गुना शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र की जनता को पानी के लिए भटकना न पड़े। इसके लिए जिला प्रशासन ने जल स्त्रोतों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इसी बीच गुना शहर में एक नया खुलासा हुआ है कि गुना में 500 से अधिक कुएं थे, जो बारिश के समय रिचार्ज होकर आसपास के लोगों की प्यास बुझाते थे। इससे शहर में पेयजल संकट कम होता था। लेकिन कुछ समय से पेयजल संकट जो बढ़ा, इसका कारण गुना शहर में कुओं को पाटकर आलीशान मकान और दुकान बनाना सामने आया है। इन कुओं को कब्जाने में माफियाओं ने राजस्व विभाग के अधिकारियों का सहारा लिया और उन कुओं पर कब्जा कर लिया। कुओं पर पक्का निर्माण हो जाने से रिचार्ज होना बंद हो गया और उसके आसपास के जल स्त्रोत भी रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं। इसको लेकर कुओं पर कब्जे की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों को की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जहां एक और उन कुओं पर बने आलीशान मकान व दुकानें कुओं और जल स्त्रोतों को लेकर प्रशासन के बने नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, वहीं दूसरी और कुओं को पाटकर निर्माण कार्य करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सिंध नदी के सूख जाने से पानी की कमी आ जाने से गुना शहर वासी चिंतित हैं। पूर्व में एक-एक क्षेत्र में पांच से तीस-तीस कुएं होते थे जो आसपास के लोगों की प्यास बुझाया करते थे। मेन बाजारों में इन कुओं को पाटकर निर्माण करने का काम हाट रोड, सुगन चौराहा, नई सड़क जैसे क्षेत्रों से शुरू हुई जो रुकने का नाम नहीं रहा है। पत्रिका टीम ने जब रविवार को गुना शहर के आसपास के कुओं व कुइयों समेत अन्य जल स्त्रोतों को देखा तो वहां की स्थिति सबसे अलग मिली। जिनमें से अधिकतर कुओं व रिचार्ज के जल स्त्रोतों को पाटकर कब्जे हुए मिले।
हम निर्माण कार्य करा रहे

हाट रोड स्थित निचला रपटा पर झिरिया वाले मंदिर में चार-पांच साल पुराना एक कुआं हुआ करता था। उस कुएं से आसपास के लोग पानी भरने आते थे। चार-पांच साल पूर्व इस कुएं को पाटकर निर्माण किए जाने का ताना-बाना बुना गया और धीरे-धीरे उस कुएं को पाटना शुरू हो गया। कुछ समय पूर्व इस कुएं को पूरी तरह पाट दिया गया और वहां निमार्ण कार्य शुरू हो गया। यहां के एक-दो दुकानदारों से पूछा तो उन्होंने कहा कि झिरियां वाली कुईयां बहुत लोगों की प्यास बुझाती थी और गुनिया नदी से यह हर वर्ष रिचार्ज होती थी। इस कुएं में हमेशा पानी रहता था। इस कुएं की संपत्ति को कैलाश नारायण अग्रवाल के पुत्र अपनी बताते हुए कहते हैं कि कुआं और मंदिर हमारी ही निजी संपत्ति है, उस पर हम निर्माण कार्य करा रहे हैं, कुआं हमने नहीं कचरा डल कर बंद हो गया है। यहां कुआं बंद कर उस पर निर्माण कार्य चलता हुआ मिला।
मंडी में थे छह कुएं

सूत्र बताते हैं कि पुरानी गल्ला मंडी में छह कुएं हुआ करते थे, आज एक भी दिखाई नहीं देते हैं। कर्नेलगंज क्षेत्र में बीस कुएं थे जो पूरी तरह गायब हो गए। जिनमें कई पर पक्के मकान तक बन गए और दुकानें तक बंद हो गईं। उदासी आश्रम के पास जो कुआं था, वह कुआं भी ठिकाने लग गया। नई सड़क पर एक होटल के पास, पंडा जी चौराहे पर जो कुएं थे, वे भी गायब हो गए। प्रकाश टॉकीज वाली गली में जो कुएं थे, वे भी गायब हो गए। गुना शहर के हनुमान गली में एक कुआं होता था, वो भी अब नजर नहीं आता, उस जगह पर एक बिल्डिंग बन गई है। क्राइस्ट स्कूल, जाट मोहल्ला, दुर्गा टॉकीज के बगल वाली गली में, व्यास जी की पुलिया वाली गली में, पुरानी छावनी क्षेत्र में 25, कोल्हूपुरा में आठ, पंडा जी चौराहे पर, बोहरा कॉलोनी,सुगन चौराहा में जो कुएं थे, वे भी पूरी तरह गायब हो गए हैं। तलैया मोहल्ले में जो कुआं है उसको भी पाटकर निर्माण करने की तैयारी है। शीतला माता मंदिर वाली गली में एक कुआं था, वो भी पट गया है उस पर आलीशान मकान बन गया है। इसके अलावा डेढ़ सौ से अधिक कुएं ऐसे हैं जिन पर आलीशान मकान और दुकान बनकर तैयार हैं। इनमें से कुछ को संबंधित लोग अपनी निजी भूमि में कुआं होना बता रहे हैं। जबकि राजस्व विभाग के दस्तावेजों में वह शासकीय हैं। इसके साथ ही मंदिर-धर्मशालाओं में भी जो कुएं थे वे भी धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं।
कुएं नहीं पटते तो नहीं होती पानी की कमी

शहर के लोगों के अनुसार पांच सौ से अधिक कुओं में से डेढ़ कुएं तो पूरी तरह गायब हो गए हैं जबकि इन कुओं में कई कुएं सार्वजनिक थे तो कुछ निजी थे, इन कुओं को पाटकर दुकानें और काम्प्लैक्स बन गए, बाकी कुओं को पाटकर निर्माण कराने की तैयारियां चल रही हैं। गुना के मोहित, राजेन्द्र, सूरज जैसे लोगों का कहना था कि इन कुओं को न पाटे जाएं यह रिचार्ज हो जाएं तो आसपास के लोगों के घरों में पर्याप्त पानी मिल सकता है।
यही हाल है अंचल का

जल विशेषज्ञ राजेन्द्र सिंह के अनुसार गुना शहर के साथ-साथ गुना ग्रामीण के बमौरी, मारकी महू, सिमरौद,झागर,आरोन, सिरसी, जैसे कई गांव ऐसे हैं जहां के कुएं भूजल स्तर गिरने से सूखते जा रहे हैं। जिससे वहां पानी संकट बढ़ता जा रहा है। भूजल स्तर गिरने से जल स्त्रोत सूखने लगे और वहां पानी का संकट छाता जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के भी कुएं पूरी तरह बंद हो गए और उन पर निर्माण हो गए। जल स्त्रोतों को यदि माफियाओं से नहीं बचाया तो आगामी समय में पानी के लिए हाहाकार मच सकता है।
इनका कहना है

-जल संरक्षण सप्ताह के तहत हम श्रमदान भी करा रहे हैं और जल स्त्रोतों को अतिक्रमण से भी मुक्त करा रहे हैं। कुओं को पाटकर यदि निर्माण कर लिया है, तो इसकी जांच करवाते हैं और कुओं से अतिक्रमण हटवाने की कार्यवाही कराई जाएगी।
डॉ. सतेंद्र सिंह कलेक्टर गुना

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