बारिश से गिरे मकान

बारिश से गिरे मकान

brajesh tiwari | Publish: Sep, 03 2018 10:53:40 PM (IST) Guna, Madhya Pradesh, India

जिले में पिछले करीब एक सप्ताह से रुक-रुक कर कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश हो रही है। जिसके कारण अब हालात बिगडऩे लगे हैं। पानी बैठने से कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है।

गुना. शहर के कोरी मोहल्ला में ही करीब एक दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और सात मकानों की दीवारें गिर गई हैं। जिसके कारण लोग पड़ोसियों या रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जन हानि नहीं हुई। पिछले कुछ सालों से सितंबर का महीना आते-आते बारिश का दौर लगभग थम जाता था। कई सालों बाद सितंबर माह में ऐसा मौसम देखने को मिला है, जब लगातार सप्ताह भर तक बारिश का सिलसिला जारी हो। आसमान पर लगातार काली घटाएं छाई हुई हैं और हर रोज बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में इस सीजन में अब तक ८४३ मिमी बारिश हो चुकी है। जिसमें से लगभग ४० एमएम बारिश सितंगर के तीन दिनों में हुई है। वहीं रविवार सुबह ८.३० बजे से सोमवार सुबह ८.३० बजे के बीच २ एमएम बारिश जिले में हुई। मौसम विभाग ने ४ सितंबर को जिले में भारी बारिश की चेतावनी भी दी है। ऐसे में कच्चे मकानों की खतरा और बढ़ गया है।

कोरी मोहल्ले में गिरे मकान
कोरी मोहल्ले में सात मकानों की दीवारें गिरने से मकान मालिकों की गृहस्थी का सामान दब गया है। गनीमत रही कि एक-एक दीवार गिरी, जिससे जन हानि और नुकसान अधिक नहीं हो पाया। लेकिन कई लोगों का सामान मलबे में दबने और पानी गिरने से खराब हो गया। लोग दिन भर अपने सामान को निकालने और मकान को बारिश से बचाने की जुगत में लगे रहे। लगातार हो रही बारिश के कारण मकानों की मरम्मत का काम भी लोग नहीं कर पा रहे हैं। बस्ती में रामसेवक राठौर, मदन मदन मोहन, लक्ष्मी नारायण, नारायण लाल, हुकुम चंद, रामभरोसा, मोहनसिंह आदि के मकानों की दीवारें गिर गई। उनकी घर-गृहस्थी का सामान मलबे में दब गया। गिरे हुए मकानों का जायजा लेने पटवारी भी मौके पर पहुंचे व रिपोर्ट बनाई।

 

कहीं मकान न गिर जाए, इस डर के कारण नहीं सो पा रहे हैं घर में

सात मकानों के अलावा कई मकानों में पानी बैठने से दीवारे क्षतिग्रस्त हो रहीं है। कहीं मिट्टी गिर रही है तो कुछ घरों में दरारें पड़ गई हैं। जिसके कारण जिनके घर गिरे हैं, वे और जिने क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वे भी रात में अपने घरों में नहीं सो रहे हैं। कोई पड़ोसी के यहां शरण लिए हुए तो कोई रिश्तेदारी में समय काट रहा है। रहवासियों ने बताया कि मकानों की मरम्मत बारिश रुकने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल तो मकान ढह जाने के डर से वह अपने ही घर में चैन से नहीं सो पा रहे हैं। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए भय सताता है कि कहीं मकान गिर न जाए और वह चोटिल न हो जाएं।

पीएम आवास में नहीं आया नाम
लोगों ने बताया कि वे करीब एक साल पहले प्रधानमंत्री आवास आवास योजना के लिए फार्म भर चुके हैं। लेकिन अभी तक पीएम आवास में उनका नाम नहीं आया। सभी लोग बीपीएल परिवार के हैं और ज्यादातर कच्चे मकानों में रह रहे हैं। पीएम आवास योजना में पक्का मकान बनने की उम्मीद थी, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। बारिश ने कच्चा मकान भी गिरा दिया। यदि पीएम आवास के तहत उन्हें मकान मिल जाता तो वह जर्जर मकानों में रहने मजबूर नहीं होते।

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